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Deoria News: डाक्टर के थे ड्राइवर...अब मुन्ना भाई अस्पताल वाले
Thu, 22 Jun 2023 11:35 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Thu, 22 Jun 2023 11:35 PM IST
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देवरिया। शहर के तमाम अस्पतालों का हाल मुन्ना भाई एमबीबीएस फिल्म जैसा है। न डाक्टर की पढ़ाई और कोई अनुभव भी नहीं। पर आज वह अस्पताल के मालिक है। रुतबा ऐसा है कि डाक्टर भी इन्हें सर कह कर बुलाते है। चौंकाने वाली बात तो यह है कि मुन्ना भाई एमबीबीएस जैसी धमक बनाने वालों के पास डिग्री की बात अलग है। छोटी कक्षा की पढ़ाई तक नहीं है।
चौकाने वाली बात तो यह है कि मुन्ना भाई एमबीबीएस जैसी धमक बनाने वाले संचालक हाईस्कूल फेल और बढ़ई का काम करते थे। कोई पहले एंबुलेंस चालक था और इंजेक्शन लगाते-लगाते डॉक्टर बन गया। इसमें से एक सज्जन तो यह हैं जो शहर के राघव नगर मुहल्ले में अस्पताल खोले हैं, वह पहले फर्नीचर का काम करते थे। सीसी रोड के एक अस्पताल संचालक पहले एंबुलेस चलाते थे। रुद्रपुर रोड पर एक अस्पताल चलाने वाली महिला कक्षा आठ पास है और आज अस्पताल संचालक बन बैठी है। इतना ही नहीं शहर के न्यू काॅलोनी मुहल्ला निवासी डेंटिस्ट ने तो एक बड़ा अस्पताल ही खड़ा कर लिया है। यहां पर हर इमरजेंसी सुविधा उपलब्ध है। इनके यहां घटना होने के बाद अस्पताल सील हुए, ये मुन्ना भाई हिम्मत नहीं हारे। फिर से धंधा बेखौफ करने लगे। इलाज के नाम पर इन अस्पतालों में मरीजों का सिर्फ शोषण ही नहीं बल्कि मौत के बाद भी लूट खसोट होती है। ज्यादातर सील किए गए अस्पताल ऐसे हैं जहां लापरवाही में मरीजों की मौत हुई है। इतना ही नहीं इलाज के नाम पर मरीजों को बंधक बनाकर लूटने का भी काम किया गया है। इसमें से कई ऐसे मुन्ना भाई अस्पताल संचालक हैं, जिनकी पकड़ विभाग में बहुत मजबूत है। सील होने के कुछ ही दिन बाद अस्पताल खुल जाता है।
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ऑपरेशन के दौरान पेट में काटन ही छोड़ दिया
- गौरीबाजार क्षेत्र का एक अस्पताल संचालक करीब एक साल पहले ऑपरेशन करने के दौरान महिला के पेट में काटन ही छोड़ दिया था, जिसके कारण फिर से ऑपरेशन कराना पड़ा। इस डॉक्टर के बारे में चर्चा है कि इंटर पास है।
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गर्भवती महिला को इंजेक्शन लगाते ही हो गई मौत
शहर के रामनाथ देवरिया मुहल्ले में स्थित एक अस्पताल संचालक पहले बरहज रोड पर अस्पताल खोला था। कम पढ़ा-लिखा संचालक ने बड़े बोर्ड लगाकर मरीजों को लुभाने का काम किया। अभी छह माह पहले रामनाथ देवरिया में अस्पताल पहुंची एक गर्भवती को इंजेक्शन लगा दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। इससे पहले भी इसके अस्पताल पर एक महिला की मौत हो चुकी है।
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एंबुलेंस चालक और आशाओं की सांठगांठ से पनप रहा धंधा
मेडिकल कॉलेज के ठीक सामने निजी एंबुलेंस लगे रहते हैं। स्टाफ नर्स, वार्ड ब्वाय और आशाओं की मिलीभगत से सरकारी अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को इनके यहां भेज दिया जाता है। करीब आठ माह पहले भटनी निवासी एक गर्भवती की मौत का मामला जब सामने आया तो पुलिस ने केस दर्ज किया। इसमें पता चला कि एक आशा ने गर्भवती को पहुंचाया था। इसी तरह दो गर्भवतियों की मौत सलेमपुर के एक अस्पताल में हुई थी। यहां भी आशा ने ही भेजा था।
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अवैध अस्पतालों व झोलाछाप के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। एक साल के अंदर करीब चार अस्पतालों और 25 झोलाछाप के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
-डॉ. राजेंद्र प्रसाद, एसीएमओ
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चौकाने वाली बात तो यह है कि मुन्ना भाई एमबीबीएस जैसी धमक बनाने वाले संचालक हाईस्कूल फेल और बढ़ई का काम करते थे। कोई पहले एंबुलेंस चालक था और इंजेक्शन लगाते-लगाते डॉक्टर बन गया। इसमें से एक सज्जन तो यह हैं जो शहर के राघव नगर मुहल्ले में अस्पताल खोले हैं, वह पहले फर्नीचर का काम करते थे। सीसी रोड के एक अस्पताल संचालक पहले एंबुलेस चलाते थे। रुद्रपुर रोड पर एक अस्पताल चलाने वाली महिला कक्षा आठ पास है और आज अस्पताल संचालक बन बैठी है। इतना ही नहीं शहर के न्यू काॅलोनी मुहल्ला निवासी डेंटिस्ट ने तो एक बड़ा अस्पताल ही खड़ा कर लिया है। यहां पर हर इमरजेंसी सुविधा उपलब्ध है। इनके यहां घटना होने के बाद अस्पताल सील हुए, ये मुन्ना भाई हिम्मत नहीं हारे। फिर से धंधा बेखौफ करने लगे। इलाज के नाम पर इन अस्पतालों में मरीजों का सिर्फ शोषण ही नहीं बल्कि मौत के बाद भी लूट खसोट होती है। ज्यादातर सील किए गए अस्पताल ऐसे हैं जहां लापरवाही में मरीजों की मौत हुई है। इतना ही नहीं इलाज के नाम पर मरीजों को बंधक बनाकर लूटने का भी काम किया गया है। इसमें से कई ऐसे मुन्ना भाई अस्पताल संचालक हैं, जिनकी पकड़ विभाग में बहुत मजबूत है। सील होने के कुछ ही दिन बाद अस्पताल खुल जाता है।
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ऑपरेशन के दौरान पेट में काटन ही छोड़ दिया
- गौरीबाजार क्षेत्र का एक अस्पताल संचालक करीब एक साल पहले ऑपरेशन करने के दौरान महिला के पेट में काटन ही छोड़ दिया था, जिसके कारण फिर से ऑपरेशन कराना पड़ा। इस डॉक्टर के बारे में चर्चा है कि इंटर पास है।
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गर्भवती महिला को इंजेक्शन लगाते ही हो गई मौत
शहर के रामनाथ देवरिया मुहल्ले में स्थित एक अस्पताल संचालक पहले बरहज रोड पर अस्पताल खोला था। कम पढ़ा-लिखा संचालक ने बड़े बोर्ड लगाकर मरीजों को लुभाने का काम किया। अभी छह माह पहले रामनाथ देवरिया में अस्पताल पहुंची एक गर्भवती को इंजेक्शन लगा दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। इससे पहले भी इसके अस्पताल पर एक महिला की मौत हो चुकी है।
एंबुलेंस चालक और आशाओं की सांठगांठ से पनप रहा धंधा
मेडिकल कॉलेज के ठीक सामने निजी एंबुलेंस लगे रहते हैं। स्टाफ नर्स, वार्ड ब्वाय और आशाओं की मिलीभगत से सरकारी अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को इनके यहां भेज दिया जाता है। करीब आठ माह पहले भटनी निवासी एक गर्भवती की मौत का मामला जब सामने आया तो पुलिस ने केस दर्ज किया। इसमें पता चला कि एक आशा ने गर्भवती को पहुंचाया था। इसी तरह दो गर्भवतियों की मौत सलेमपुर के एक अस्पताल में हुई थी। यहां भी आशा ने ही भेजा था।
अवैध अस्पतालों व झोलाछाप के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। एक साल के अंदर करीब चार अस्पतालों और 25 झोलाछाप के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
-डॉ. राजेंद्र प्रसाद, एसीएमओ