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Deoria News: श्रद्धा ही शिव और पार्वती का स्वरूप
Sun, 09 Aug 2026 12:46 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 09 Aug 2026 12:46 AM IST
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खुखुंदू। क्षेत्र के शिव मंदिर मठिया में चल रही शिव महापुराण कथा में शनिवार को शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग मार्मिक ढंग से सुनाया गया। श्रोताओं को बताया गया कि श्रद्धा और विश्वास ही शिव और पार्वती का स्वरूप है। शिव-पार्वती विवाह के अवसर पर पूरे पंडाल को सजाया गया था।
महंत राघवेन्द्र शास्त्री ने बताया कि सती ने अपने मृत्यु के समय ही शिवजी से यह वरदान मांगा था कि अगले जन्म में भी मैं आपकी पत्नी बनूं। उसी के चलते सती ने हिमालय के घर में पार्वती के रूप में दुबारा जन्म लिया और पर्वत की पुत्री होने के नाते उनका नाम पार्वती रखा गया।
उन्होंने बताया कि माता पार्वती ने अपने कठोर तपस्या के बल पर मिले वरदान में फिर से शिवजी को ही पति के रूप में मांगा।
कथा के अंत में शिवजी की बरात यात्रा की बड़ी ही मनमोहक झांकी निकाली गई। जो गाजे-बाजे के साथ जैन मंदिर परिसर से होते हुए करीब एक किलोमीटर तक पैदल ही मठिया शिव मंदिर कथा स्थल पर पहुंची।
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महंत राघवेन्द्र शास्त्री ने बताया कि सती ने अपने मृत्यु के समय ही शिवजी से यह वरदान मांगा था कि अगले जन्म में भी मैं आपकी पत्नी बनूं। उसी के चलते सती ने हिमालय के घर में पार्वती के रूप में दुबारा जन्म लिया और पर्वत की पुत्री होने के नाते उनका नाम पार्वती रखा गया।
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उन्होंने बताया कि माता पार्वती ने अपने कठोर तपस्या के बल पर मिले वरदान में फिर से शिवजी को ही पति के रूप में मांगा।
कथा के अंत में शिवजी की बरात यात्रा की बड़ी ही मनमोहक झांकी निकाली गई। जो गाजे-बाजे के साथ जैन मंदिर परिसर से होते हुए करीब एक किलोमीटर तक पैदल ही मठिया शिव मंदिर कथा स्थल पर पहुंची।
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