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Deoria News: हेल्थ ड्रिंक्स में मौजूद ज्यादा शुगर बच्चों की सेहत कर रहा खराब
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बच्चों को आगे चलकर कम उम्र में हो सकती है डाॅयबिटीज
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मीठा ज्यादा पाए जाने के बाद बॉर्नविटा हेल्थ ड्रिंक्स को केटेगरी से हटाने के बाद आप भी अपने बच्चों को लेकर सतर्क हो जाइए। बाजार में मौजूद हेल्थ ड्रिंक्स और तमाम तरह के उत्पाद क्या आपके बच्चे के स्वास्थ्य के लिए सही हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि जानकारी के अभाव में टीवी और सोशल मीडिया के प्रचार से भ्रमित हो रहे हैं।
अनजाने में बच्चाें के स्वास्थ्य मसलन लंबाई, तंदरुस्ती और मानसिक विकास को बाधित तो नहीं कर रहे। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की जांच में बॉर्नविटा में तय मानकों से काफी ज्यादा मीठा मिला है। जांच रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार ने सभी ई-काॅमर्स कंपनियों को बॉर्नविटा जैसे पेय पदार्थों को अपने पोर्टल और प्लेटफाॅर्म से हटाने का निर्देश दिया है।
जिले में भी अभिभावक बच्चों की अच्छी सेहत के लिए चिंतित रहते हैं। वह भी बच्चों की सेहत को लेकर सजग तो रहते हैं, लेकिन शायद उन्हें भी नहीं पता कि जो हेल्थ ड्रिंक्स वह बच्चों को दे रहे हैं, क्या वह सही है या नहीं। बॉल रोग विशेषज्ञ का कहना है कि बच्चों को पैकेट बंद हेल्थ ड्रिंक्स नहीं देना चाहिए। डाॅक्टर के परामर्श से हेल्थ चेकअप के बाद ही इस तरह का हेल्थ ड्रिंक्स देना चाहिए।
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जंक फूड की श्रेणी में आता है हेल्थ ड्रिंक्स
बाल रोग विशेषज्ञ राकेश गुप्ता का कहना है कि पैकेट और डिब्बा बंद हेल्थ ड्रिंक्स और पाउडर जंक फूड की श्रेणी में आता है। इसमें शुगर इतना ज्यादा होता है कि बच्चों को आगे चलकर उन्हें बहुत ही कम उम्र में डाॅयबिटीज की बीमारी हो सकती है। मीठा अधिक खाने से उन्हें धीरे-धीरे भूख लगनी कम हो जाएगी। मोटापा हो जाता है, जिससे तमाम तरह की बीमारियां होने लगती हैं। वह आगे कहते हैं कि अभिभावक डाॅक्टर पर तंदरुस्त रहने और लंबाई बढ़ाने के लिए कोई दवा या हेल्थ ड्रिंक्स लिखने के लिए कहते है। जो अभिभावकों को नहीं करना चाहिए।
पहले बच्चे का चेकअप करा लें फिर उन्हें डाक्टर के परामर्श पर हेल्थ ड्रिंक्स पिलाना चाहिए।उन्होंने बच्चियों के बारे में तो खास ध्यान देने की बात कहते हुए कहा कि किशोरावस्था में ज्यादा मीठा खाने से उनके मासिक धर्म पर असर पड़ता है। साथ ही फर्टीलिटी पर भी असर पड़ता है।-- -- -
इंसर्ट
कौन कौन सी हो सकती है बीमारी
-ब्लड प्रेशर और हार्ट से संबंधित बीमारी हो सकती है।
-बैड कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ सकता है।
-कम उम्र में डायबिटीज हो सकती है।
-भूख न लगने की समस्या।
-मोटापा बढ़ने की समस्या।
-दांत में कीड़े लगने की समस्या।
-मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है। याद्दाश्त कमजोर हो सकरी है।
-रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मीठा ज्यादा पाए जाने के बाद बॉर्नविटा हेल्थ ड्रिंक्स को केटेगरी से हटाने के बाद आप भी अपने बच्चों को लेकर सतर्क हो जाइए। बाजार में मौजूद हेल्थ ड्रिंक्स और तमाम तरह के उत्पाद क्या आपके बच्चे के स्वास्थ्य के लिए सही हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि जानकारी के अभाव में टीवी और सोशल मीडिया के प्रचार से भ्रमित हो रहे हैं।
अनजाने में बच्चाें के स्वास्थ्य मसलन लंबाई, तंदरुस्ती और मानसिक विकास को बाधित तो नहीं कर रहे। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की जांच में बॉर्नविटा में तय मानकों से काफी ज्यादा मीठा मिला है। जांच रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार ने सभी ई-काॅमर्स कंपनियों को बॉर्नविटा जैसे पेय पदार्थों को अपने पोर्टल और प्लेटफाॅर्म से हटाने का निर्देश दिया है।
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जिले में भी अभिभावक बच्चों की अच्छी सेहत के लिए चिंतित रहते हैं। वह भी बच्चों की सेहत को लेकर सजग तो रहते हैं, लेकिन शायद उन्हें भी नहीं पता कि जो हेल्थ ड्रिंक्स वह बच्चों को दे रहे हैं, क्या वह सही है या नहीं। बॉल रोग विशेषज्ञ का कहना है कि बच्चों को पैकेट बंद हेल्थ ड्रिंक्स नहीं देना चाहिए। डाॅक्टर के परामर्श से हेल्थ चेकअप के बाद ही इस तरह का हेल्थ ड्रिंक्स देना चाहिए।
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जंक फूड की श्रेणी में आता है हेल्थ ड्रिंक्स
बाल रोग विशेषज्ञ राकेश गुप्ता का कहना है कि पैकेट और डिब्बा बंद हेल्थ ड्रिंक्स और पाउडर जंक फूड की श्रेणी में आता है। इसमें शुगर इतना ज्यादा होता है कि बच्चों को आगे चलकर उन्हें बहुत ही कम उम्र में डाॅयबिटीज की बीमारी हो सकती है। मीठा अधिक खाने से उन्हें धीरे-धीरे भूख लगनी कम हो जाएगी। मोटापा हो जाता है, जिससे तमाम तरह की बीमारियां होने लगती हैं। वह आगे कहते हैं कि अभिभावक डाॅक्टर पर तंदरुस्त रहने और लंबाई बढ़ाने के लिए कोई दवा या हेल्थ ड्रिंक्स लिखने के लिए कहते है। जो अभिभावकों को नहीं करना चाहिए।
पहले बच्चे का चेकअप करा लें फिर उन्हें डाक्टर के परामर्श पर हेल्थ ड्रिंक्स पिलाना चाहिए।उन्होंने बच्चियों के बारे में तो खास ध्यान देने की बात कहते हुए कहा कि किशोरावस्था में ज्यादा मीठा खाने से उनके मासिक धर्म पर असर पड़ता है। साथ ही फर्टीलिटी पर भी असर पड़ता है।
इंसर्ट
कौन कौन सी हो सकती है बीमारी
-ब्लड प्रेशर और हार्ट से संबंधित बीमारी हो सकती है।
-बैड कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ सकता है।
-कम उम्र में डायबिटीज हो सकती है।
-भूख न लगने की समस्या।
-मोटापा बढ़ने की समस्या।
-दांत में कीड़े लगने की समस्या।
-मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है। याद्दाश्त कमजोर हो सकरी है।
-रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है।