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Deoria News: एमडीए अभियान की सफलता के लिए सबका सहयोग जरूरी
Wed, 16 Jul 2025 12:45 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Wed, 16 Jul 2025 12:45 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जिले के भागलपुर व भलुअनी ब्लॉक में 10 अगस्त से सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए मंगलवार को सीएमओ कार्यालय में दोनों ब्लॉक के एमओआईसी सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। इसमें एमडीए अभियान की सफलता के टिप्स दिए गए।
प्रभारी सीएमओ डॉ. एसके सिन्हा ने कहा कि अभियान की सफलता के लिए ब्लॉक स्तर पर सबका सहयोग जरूरी है। नोडल अधिकारी डॉ. हरेंद्र कुमार ने कहा कि ब्लॉक स्तर पर माइक्रोप्लान व बूथ प्लान बनाना, दवा की स्थिति, फैमिली रजिस्टर की संख्या की आवश्यकता, रैपिड रिस्पांस टीम का गठन करना है।
जिला मलेरिया अधिकारी सीपी मिश्रा ने कहा कि दो साल से कम उम्र के बच्चे, गर्भवतियों, अति गंभीर बीमार को दवा नहीं खिलानी है। फाइलेरिया को हाथी पांव भी कहा जाता है। फाइलेरिया बीमारी संक्रमण आमतौर पर बचपन में होता है, मगर इसके लक्षण 10 से 15 साल के बाद दिखाई देते हैं।
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यदि बीमारी की पहचान समय से नहीं की गई तो यह बीमारी दिव्यांग बना सकती है। इस दौरान डिप्टी सीएमओ डॉ. आरपी यादव, डॉ. अश्विनी पांडेय, सहायक मलेरिया अधिकारी सुधाकर मणि, हस्मतुल्लाह, पीसीआई के प्रतिनिधि आदि मौजूद रहे।
फाइलेरिया क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होती है। फाइलेरिया पीड़ित व्यक्ति को काटने के बाद वह मच्छर यदि दूसरे व्यक्ति को काटता है तो ऐसे में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में यह बीमारी फैलने की आशंका बनी रहती है।
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देवरिया। फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जिले के भागलपुर व भलुअनी ब्लॉक में 10 अगस्त से सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए मंगलवार को सीएमओ कार्यालय में दोनों ब्लॉक के एमओआईसी सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। इसमें एमडीए अभियान की सफलता के टिप्स दिए गए।
प्रभारी सीएमओ डॉ. एसके सिन्हा ने कहा कि अभियान की सफलता के लिए ब्लॉक स्तर पर सबका सहयोग जरूरी है। नोडल अधिकारी डॉ. हरेंद्र कुमार ने कहा कि ब्लॉक स्तर पर माइक्रोप्लान व बूथ प्लान बनाना, दवा की स्थिति, फैमिली रजिस्टर की संख्या की आवश्यकता, रैपिड रिस्पांस टीम का गठन करना है।
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जिला मलेरिया अधिकारी सीपी मिश्रा ने कहा कि दो साल से कम उम्र के बच्चे, गर्भवतियों, अति गंभीर बीमार को दवा नहीं खिलानी है। फाइलेरिया को हाथी पांव भी कहा जाता है। फाइलेरिया बीमारी संक्रमण आमतौर पर बचपन में होता है, मगर इसके लक्षण 10 से 15 साल के बाद दिखाई देते हैं।
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यदि बीमारी की पहचान समय से नहीं की गई तो यह बीमारी दिव्यांग बना सकती है। इस दौरान डिप्टी सीएमओ डॉ. आरपी यादव, डॉ. अश्विनी पांडेय, सहायक मलेरिया अधिकारी सुधाकर मणि, हस्मतुल्लाह, पीसीआई के प्रतिनिधि आदि मौजूद रहे।
फाइलेरिया क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होती है। फाइलेरिया पीड़ित व्यक्ति को काटने के बाद वह मच्छर यदि दूसरे व्यक्ति को काटता है तो ऐसे में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में यह बीमारी फैलने की आशंका बनी रहती है।