फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Deoria News ›   Education has become a business... Rs. 10,000 is being spent on books and notebooks in first grade

Deoria News: शिक्षा बनी कारोबार... पहली कक्षा में किताब-कॉपी पर खर्च हो रहे 10 हजार

Sun, 13 Apr 2025 11:42 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Updated Sun, 13 Apr 2025 11:42 PM IST
विज्ञापन
Education has become a business... Rs. 10,000 is being spent on books and notebooks in first grade
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

सलेमपुर। अब शिक्षा महंगी हो गई है। सरकार के लाख जतन के बाद भी कॉपी-किताब और ड्रेस पर खर्च होने वाली भारी-भरकम रकम अभिभावकों को परेशान कर रही है।
सीबीएसई और आईसीएस से मान्यता प्राप्त स्कूलों में पढ़ाई पर आने वाला खर्च पूछिए मत। मध्यम वर्गीय अभिभावकों को बच्चों का पाठ्य सामग्री जुटाने में पसीना छूट जा रहा।
यहां अन्य कक्षाओं की बात छोड़िए, पहली कक्षा में ही किताब-कॉपी, बैग और ड्रेस पर करीब 10 हजार से अधिक का बजट बन रहा है, जिनके पास पढ़ने योग्य एक से अधिक बच्चे हैं, उनकी हालत बिगड़ जा रही है। कॉपी-किताबों का कोई भी मानक तय नहीं है। इसका नतीजा यह है कि बस्ते के बोझ से बचपना दबता जा रहा है।
विज्ञापन

नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो गया है। आजकल निजी स्कूलों में बच्चों के दाखिले के लिए होड़ मची हुई है। सरकारी विद्यालयों में छिटपुट की संख्या में नामांकन के लिए बच्चे आ रहे हैं। वहीं निजी विद्यालयों में बच्चों संग अभिभावकों की लाइन लग रही है। अंदर अलग-अलग काउंटर सजे हुए हैं। फीस के काउंटर भी हैं। पाठ्य सामग्री के लिए अलग काउंटर पर जाना पड़ रहा है। नियम-कानून सभी ताक पर है।
विज्ञापन
विज्ञापन

अभिभावकों को आरोप है कि विद्यालय प्रबंधन का अपना नियम है। महंगी फीस और वाहन किराया ही वसूल नहीं किया जा रहा है, बल्कि इसके अलावा भी कॉपी, किताब, बैग, बॉटल और ड्रेस के नाम पर सबसे ज्यादा रकम अभिभावकों से लिया जा रहा है। जहां यह व्यवस्था नहीं है वहां एक निर्धारित दुकान के नाम का स्लिप पकड़ाकर अभिभावकों को भेज दिया जा रहा है।
एनसीईआरटी की पुस्तकों की अनिवार्यता को इन विद्यालयों में दरकिनार कर दिया गया है। महंगी दामों में मिलने वाली प्राइवेट पुस्तकों की अनिवार्यता अधिकांश स्कूलों में कर दी गई है।
अभिभावकों का कहना है कि आम तौर पर बाजार में उपलब्ध कॉपियां भी यहां के लिए उपयोगी नहीं है। विद्यालय की ओर महंगे दर की कॉपी, बैग आदि भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। हाई प्रोफाइल विद्यालयों में नामांकन का पूरा पैकेज बनाकर दिया जा रहा है। तभी तो नगर एक आईसीएसई के स्कूल में दाखिला कराने आई वार्ड नंबर तीन भठवां धर्मपुर की रहने वाली प्रतिभा मिश्र बताया कि अरे साहब, मत पूछिए।

यह पढ़ाई है या कारोबार.. कुछ समझ में नहीं आ रहा है। सातवीं कक्षा में बेटे का दाखिला कराए हैं। किताब, काॅपी, ड्रेस पर ही 12 हजार रुपए से अधिक खर्च हो गए। एडमिशन और फीस जमा करना बाकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed