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सीओ जिया-उल-हक के बाप का दर्द: मेरा डिप्टी एसपी बेटा मरा, वहीं से मैं बर्बाद हो गया, अब बस मेरी ये आखिरी इच्छा

Thu, 28 Sep 2023 09:48 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, देवरिया
अमर उजाला नेटवर्क, देवरिया Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 28 Sep 2023 09:48 AM IST
सार

यूपी के पुलिस उप अधीक्षक (डीएसपी) जियाउल हक की हत्या में विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की भूमिका की जांच सीबीआई करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को दरकिनार कर दिया, जिसमें राजा भैया सहित पांच के खिलाफ सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट खारिज करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी।

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सीओ जियाउल हक के माता पिता हाथ में बेटे का फोटो दिखाते हुए - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

मेरा बेटा डिप्टी एसपी था। पढ़ने में होनहार था, चौक-चौराहे के स्कूल से पढ़ाई करने के बाद जब नौकरी मिली तो आस जगी कि परिवार की मुश्किलें खत्म हो जाएंगी। पर बेटे की हत्या के बाद परिवार ही बर्बाद हो गया। रात को सोता हूं तो उसका चेहरा याद आता है। दस साल बाद भी उसके कातिलों को अभी तक सजा नहीं हुई, इसका मुझे मलाल है। जीते जी बेटे के कातिल को सजा हो जाए, यही मेरी आखिरी ख्वाहिश है...।
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यह दर्द खुखुंदू थाना क्षेत्र के जुआफर गांव निवासी जियाउल हक के पिता शमशुल हक का है। डिप्टी एसपी जियाउल हक 2013 में प्रतापगढ़ के कुंडा में तैनाती के दौरान रात के समय हथिगवां थाना क्षेत्र के गांव बालीपुर में दो मार्च 2013 को दोहरे हत्याकांड की सूचना पर पहुंचे थे। जहां बेरहमी से पीटकर उनकी हत्या कर दी गई थी। 
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इस मामले की जांच में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नया मोड़ आ गया है। सीओ की पत्नी व ओएसडी पुलिस मुख्यालय परवीन आजाद की याचिका पर कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया सहित अन्य पांच की भूमिका की फिर से सीबीआई जांच की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश की जानकारी होने पर सीओ के पिता शमशुल हक और मां हाजरा ने बुधवार को कहा कि इस फैसले से न्याय की उम्मीद जगी है। 
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उन्होंने कहा कि बेटा चला गया और सब कुछ खत्म हो गया। गरीबी में एक-एक पाई जोड़कर अपने लड़के को अफसर बनाया था। जब सुख के दिन आए तो वह हमेशा के लिए चला गया। महज चौदह माह पहले उसकी शादी हुई थीं। ये सब बातें जब याद आती हैं तो आंखें डबडबा जाती हैं।

उन्होंने कहा कि कुंडा की घटना में रघुराज प्रताप सिंह का हाथ है, हमें यह पूरा यकीन है। निष्पक्ष जांच कर आरोपपत्र दाखिल हो और आरोपियों को सजा मिले, यही मेरी मांग है। वर्तमान में सीओ के माता-पिता की जिम्मेदारी उनके दूसरे बेटे शोहराब अली पर है। शोहराब गोरखपुर एडीजी ऑफिस में तैनात हैं। उनके कंधे पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी है।

हत्याकांड में दर्ज हैं दो मुकदमे
जियाउल हक हत्याकांड के अधिवक्ता खलीफ अहमद खां ने बताया कि के मामले में 2013 में दो मुकदमे दर्ज हुए थे। एक मुकदमा थाना प्रभारी ने 14 लोगों के खिलाफ दर्ज कराया था। दूसरा, सीओ की पत्नी डॉ. परवीन ने राजा भैया समेत अन्य चार पर दर्ज कराया था। इसमें थाना प्रभारी की तहरीर के केस में चार्जशीट दाखिल है। पर निर्णय पर रोक है। जबकि, दूसरे मुकदमे में सीबीआई ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी।

इस पर डॉ. परवीन ने प्रोटेस्ट दाखिल किया था, जिसकी मंजूरी मिल गई। अब स्पेशल मजिस्ट्रेट सीबीआई लखनऊ की अदालत में फिर से राजा भैया सहित अन्य पर दर्ज केस की विवेचना सीबीआई करेगी। उन्होंने बताया कि दोनों मुकदमों में कई बार उतार-चढ़ाव हुए। अंत में सुप्रीम कोर्ट से न्याय की उम्मीद जगी है। निष्पक्ष जांच होने के बाद भी आगे की कार्रवाई तय होगी। 

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के आने के बाद उठा था शव, पत्नी और भाई को मिली है नौकरी
प्रतापगढ़ के हथिगवां थाना इलाके के गांव बलीपुर में दो मार्च 2013 को रात करीब सवा आठ बजे दोहरे हत्याकांड की सूचना पर पहुंचे कुंडा क्षेत्र के क्षेत्राधिकारी (डीएसपी) जियाउल हक को पहले लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटा गया। बाद में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। तीन घंटों तक उनकी लाश प्रधान के घर के पीछे खड़ंजे पर पड़ी रही। 

 

जियाउल हक की सुरक्षा में लगे गनर इमरान और विनय कुमार जान बचाकर भाग गए थे। इस घटना के बाद 2013 में प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया था। राजा भैया को इस्तीफा देना पड़ा था और तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को जुआफर गांव जाना पड़ा था। 

 

इसके बाद सीओ का शव उठ सका था। उन्होंने पत्नी परवीन आजाद को ओएसडी और सीओ के भाई को सिपाही की नौकरी सहित 25-25 लाख रुपये की मुआवजा राशि दी थी। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे राहुल गांधी सहित तमाम राजनीतिक दल के कद्दावर नेता जुआफर गांव पहुंचे थे।
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