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ससुराल वालों ने प्रेरित किया तो डॉक्टर बन बढ़ाया परिवार का मान

Sun, 18 Oct 2020 10:58 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 18 Oct 2020 10:58 PM IST
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dr suman become doctor
ससुराल वालों ने प्रेरित किया तो डॉक्टर बन बढ़ाया परिवार का मान
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सलेमपुर (देवरिया)। वर्ष 2003 में ही 10वीं की पढ़ाई के दौरान किसान परिवार ने घर की बिटिया की शादी कर दी। इसके बाद तो पढ़ाई में होशियार बिटिया के डॉक्टर बनने के लक्ष्य को ही मानों ग्रहण लग गया। हालांकि होनहार बहू के आगे पढ़ने की चाह को देखते हुए ससुराल के लोगों ने उसे आगे पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। प्रोत्साहन मिला तो बहू ने भी ईमानदार से प्रयास करते हुए खुद के सपनों को सच कर दिखाया और अब वह डॉक्टर बनकर मरीजों की सेवा करने के साथ ही परिवार को मान बढ़ा रही हैं।
भटनी ब्लॉक के नोनापर गांव निवासी कृष्णदेव गुप्ता 20 साल पहले पान की दुकान चलाकर परिवार का भरण पोषण करते थे। अब यह छोटी से गुमटी किराने की दुकान के रुप में बदल चुकी है। दो बेटे और दो बेटियों में तीसरे नंबर की बेटी सुमन शुरू से ही पढ़ाई में तेज थी। इसी के चलते नवोदय विद्यालय कुशीनगर में उसका प्रवेश हो गया। वर्ष 2003 में 10वीं में पढ़ाई के दौरान ही पिता ने सुमन की शादी देवरिया सदर ब्लॉक के हरपुर गांव के रामअधार गुप्ता के बेटे राकेश गुप्ता से कर दी।
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पढ़ाई के दौरान शादी हो जाने से सुमन ने सोचा कि अब वह कभी डॉक्टर नहीं बन पाएगी। काबिल व योग्य बहू की पढ़ाई में चाह को देखते हुए ससुराल के लोगों ने उसे घर-गृहस्थी में न रमाते उसकी पढ़ाई जारी रखने का निर्णय लिया। ससुर रामअधार गुप्ता विदेश में प्राइवेट जॉब करते हैं। ऐसे में पढ़ाई के दौरान आर्थिक संकट नहीं रहा। सुमन ने 12वीं के बाद फिजियोथेरेपी का डिप्लोमा कोर्स, एक साल डीएमएलटी के बाद एक साल गोरखपुर में रहकर प्राइवेट जॉब भी की। बेटी अंशू के जन्म के बाद वर्ष 2010 में सुमन का एमबीबीएस में दाखिला हो गया। वर्ष 2015 में कोर्स पूरा होने के बाद बेटे अंश का जन्म हुआ। वर्ष 2017 में सुमन ज्वाइनिंग सलेमपुर सीएचसी में हो गई। तभी से वह यहां पर अपनी सेवा दे रही हैं। अस्पताल में आने वाले मरीजों को मुश्किल से मुश्किल घड़ी से निपटने के लिए भी प्रेरित करती हैं। उनकी बिटिया अंशू 13 वर्ष की हो चुकी हैं। घर के साथ ही वह चिकित्सकीय पेशे का भी निर्वहन कर रही हैं। डॉ. सुमन कहती हैं कि ससुराल के लोगों ने उनके सपनों में रंग भरने में भरपूर सहयोग किया। सीएचसी पर आने वाले मरीजों की सेवा करने में जो खुशी मिलती है उसे बयां नहीं किया जा सकता। बेटियां किसी भी मामले में कम नहीं है, उन्हें सही राह मिले तो वह खुद की तरक्की के साथ ही अन्य लोगों का भी सहयोग कर सकती हैं।
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