{"_id":"645944ee13d8ff188d096794","slug":"dont-lose-land-worth-lakhs-in-order-to-save-fees-deoria-news-c-7-1-157479-2023-05-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Deoria News: फीस बचाने के चक्कर में गंवा न बैठें लाखों की जमीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Deoria News: फीस बचाने के चक्कर में गंवा न बैठें लाखों की जमीन
Tue, 09 May 2023 12:22 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Tue, 09 May 2023 12:22 AM IST
विज्ञापन
दलालो के डर से मकान पर लिखवा रहे है मकान बिकाउ नही है।
- भू-माफियाओं के जाल में फंसे तो डूब जाएगी रकम
- दलालों के झांसे में आकर कागजातों की नहीं करा रहे हैं जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। अगर आप कोई जमीन खरीदने जा रहे हैं तो जानकारों से दस्तावेज की जांच जरूर करा लें। कहीं ऐसा न हो कि जांच-पड़ताल की ढाई से दो हजार रुपये फीस बचाने के चक्कर में लाखों की जमीन डूब जाए। दलालों के चक्कर में फंसकर जमीन तो लिखवा ली पर कहीं ऐसा न हो कि वह पहले ही किसी को बेच दी गई हो। इस कारण खारिज दाखिल भी नहीं होगा और कोर्ट कचहरी के फेर में फंसना पड़ जाएगा।
शहर में फर्जीवाड़े के कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिससे जमीन खरीदने वाले लोगों को सबक लेने की जरूरत है। तथाकथित प्रापर्टी डीलरों के झांसे में आकर प्रापर्टी खरीद ली और बैनामा के बाद जब वह कब्जा करने के लिए पहुंचे तो पता चला कि किसी को जमीन पहले ही बेच दी गई है। उन्हें थाने से लगायत कोर्ट तक का चक्कर लगाना पड़ा। शहर के कोतवाली रोड स्थित निबंधन कार्यालय में हर रोज 50 से 70 रजिस्ट्री होती है। भूमि की रजिस्ट्री होने के बाद तहसील स्तर से खारिज-दाखिल और नामांतरण की प्रक्रिया होती है। अधिवक्ताओं की सलाह यह है कि इस खतरे से बचने के लिए जमीन की बारीकी से पड़ताल कर लें।
-- -- -- -- --
केस नंबर- 1- महुआडीह थाना क्षेत्र के चैनपुर निवासी चंदा देवी के नाम पर दूसरी महिला खड़ा कर उसकी जमीन बेच दी गई। क्रेता जब जमीन पर कब्जा करने गया तो पता चला कि असली मालिक कोई दूसरा है। इस मामले में कोतवाली पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
विज्ञापन
-- -- -- --
केस नंबर-2
- शहर के गरूलपार मोहल्ला निवासी बकरीदन की भूमि जालसाजी कर कुछ लोगों ने अपने नाम करा ली। जांच-पड़ताल में पता चला कि कूटरचना कर भूमि बैनामा कराई गई है। इस मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है।
-- -- -- -- -- --
दलालों के डर से मकान पर भी लिखा रहे हैं बिकाऊ नहीं है जमीन
देवरिया। तथाकथित प्रापर्टी डीलरों के डर से लोग शहर की कई मकानों पर ऐसा भी लिखवा रहे हैं कि मकान व जमीन बिकाऊ नहीं है। इसका बोर्ड लगाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। ऐसे ही करीब 80 मामले की सूचना निबंधन कार्यालय को भी लोगों ने उपलब्ध कराई है। यहां तक कि जालसाजों के डर से लोग न्यायालय में मामला विवादित होने का हवाला देकर प्रापर्टी बचाने की जुगत में लगे हुए हैं।
-- -- -- -- -- -
ये बरतें सावधानी
- किसी जमीन को खरीदने से पहले उसके खसरा-खतौनी की जांच कराएं। जमीन का 12 साल का रिकार्ड जरूर चेक करा लें। कोई जमीन कहां पर है, उसका भू उपयोग क्या है, इसके बारे में भी जानकारी लें। कई बार कृषि जमीन का उपयोग बदलकर गैर कृषि कर दिया जाता है। जो जमीन आप ले रहे हैं व्यवसायिक और इंडस्ट्रीयल जोन में नहीं होनी चाहिए। नहीं तो रिहायशी मकान बनवाने में अवरोध पैदा होगा।
-- -- -- -- --
जमीन के रिकाॅर्ड की लें पूरी जानकारी
अधिवक्ता प्रदीप श्रीवास्तव ने बताया कि जमीन खरीदने से पहले पूरी छानबीन करना जरूरी है। भू-राजस्व विभाग के रिकाॅर्ड में दस्तावेज मौजूद रहते हैं। खसरा-खतौनी का बस्ता बनाकर रखा जाता है। तहसील में आवेदन करके जमीन का मुआयना कराया जाता है। इससे पता चल जाता है कि भूमि किसके-किसके नाम रही है। इसका 12 साल का रिकाॅर्ड निकल जाता है। खतौनी का मुआयना कराने के लिए सरकारी शुल्क 12.50 रुपये जमा होता है। 12 साल के रिकार्ड के लिए 120 रुपये की रसीद कटती है। फोटोकाॅपी सहित अन्य खर्चों को मिलाकर खर्चे पर करीब ढाई हजार रुपये की रकम आती है। इससे पता चल जाता है कि भूमि व्यावसायिक है या बंधक रखी गई है। जानकारी होने से मोटी रकम डूबने से बच जाती है।
-- -- -- -- -- -- -- - कोट:
जमीन लेने से पहले विक्रेता के बारे में भी पूरी जानकारी जरूर लेनी चाहिए, जो जमीन आप लेने जा रहे हैं, उसका खुद मुआयना करें। अगर संभव हो तो पहले उस पर कुछ निर्माण के लिए ईंट गिरा दें। इससे पता चल जाएगा कि विवादित है कि नहीं। दलालों के चक्कर में फंस कर लोग मामूली फीस बचाने के चक्कर में फंस जाते हैं। निबंधन कार्यालय में यह पता नहीं चल पाता है कि भूमि का मामला किसी न्यायालय में लंबित तो नहीं है। -अभिषेक कुमार सिंह, सब रजिस्ट्रार निबंधन
विज्ञापन
- दलालों के झांसे में आकर कागजातों की नहीं करा रहे हैं जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। अगर आप कोई जमीन खरीदने जा रहे हैं तो जानकारों से दस्तावेज की जांच जरूर करा लें। कहीं ऐसा न हो कि जांच-पड़ताल की ढाई से दो हजार रुपये फीस बचाने के चक्कर में लाखों की जमीन डूब जाए। दलालों के चक्कर में फंसकर जमीन तो लिखवा ली पर कहीं ऐसा न हो कि वह पहले ही किसी को बेच दी गई हो। इस कारण खारिज दाखिल भी नहीं होगा और कोर्ट कचहरी के फेर में फंसना पड़ जाएगा।
शहर में फर्जीवाड़े के कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिससे जमीन खरीदने वाले लोगों को सबक लेने की जरूरत है। तथाकथित प्रापर्टी डीलरों के झांसे में आकर प्रापर्टी खरीद ली और बैनामा के बाद जब वह कब्जा करने के लिए पहुंचे तो पता चला कि किसी को जमीन पहले ही बेच दी गई है। उन्हें थाने से लगायत कोर्ट तक का चक्कर लगाना पड़ा। शहर के कोतवाली रोड स्थित निबंधन कार्यालय में हर रोज 50 से 70 रजिस्ट्री होती है। भूमि की रजिस्ट्री होने के बाद तहसील स्तर से खारिज-दाखिल और नामांतरण की प्रक्रिया होती है। अधिवक्ताओं की सलाह यह है कि इस खतरे से बचने के लिए जमीन की बारीकी से पड़ताल कर लें।
विज्ञापन
केस नंबर- 1- महुआडीह थाना क्षेत्र के चैनपुर निवासी चंदा देवी के नाम पर दूसरी महिला खड़ा कर उसकी जमीन बेच दी गई। क्रेता जब जमीन पर कब्जा करने गया तो पता चला कि असली मालिक कोई दूसरा है। इस मामले में कोतवाली पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
विज्ञापन
केस नंबर-2
- शहर के गरूलपार मोहल्ला निवासी बकरीदन की भूमि जालसाजी कर कुछ लोगों ने अपने नाम करा ली। जांच-पड़ताल में पता चला कि कूटरचना कर भूमि बैनामा कराई गई है। इस मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है।
दलालों के डर से मकान पर भी लिखा रहे हैं बिकाऊ नहीं है जमीन
देवरिया। तथाकथित प्रापर्टी डीलरों के डर से लोग शहर की कई मकानों पर ऐसा भी लिखवा रहे हैं कि मकान व जमीन बिकाऊ नहीं है। इसका बोर्ड लगाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। ऐसे ही करीब 80 मामले की सूचना निबंधन कार्यालय को भी लोगों ने उपलब्ध कराई है। यहां तक कि जालसाजों के डर से लोग न्यायालय में मामला विवादित होने का हवाला देकर प्रापर्टी बचाने की जुगत में लगे हुए हैं।
ये बरतें सावधानी
- किसी जमीन को खरीदने से पहले उसके खसरा-खतौनी की जांच कराएं। जमीन का 12 साल का रिकार्ड जरूर चेक करा लें। कोई जमीन कहां पर है, उसका भू उपयोग क्या है, इसके बारे में भी जानकारी लें। कई बार कृषि जमीन का उपयोग बदलकर गैर कृषि कर दिया जाता है। जो जमीन आप ले रहे हैं व्यवसायिक और इंडस्ट्रीयल जोन में नहीं होनी चाहिए। नहीं तो रिहायशी मकान बनवाने में अवरोध पैदा होगा।
जमीन के रिकाॅर्ड की लें पूरी जानकारी
अधिवक्ता प्रदीप श्रीवास्तव ने बताया कि जमीन खरीदने से पहले पूरी छानबीन करना जरूरी है। भू-राजस्व विभाग के रिकाॅर्ड में दस्तावेज मौजूद रहते हैं। खसरा-खतौनी का बस्ता बनाकर रखा जाता है। तहसील में आवेदन करके जमीन का मुआयना कराया जाता है। इससे पता चल जाता है कि भूमि किसके-किसके नाम रही है। इसका 12 साल का रिकाॅर्ड निकल जाता है। खतौनी का मुआयना कराने के लिए सरकारी शुल्क 12.50 रुपये जमा होता है। 12 साल के रिकार्ड के लिए 120 रुपये की रसीद कटती है। फोटोकाॅपी सहित अन्य खर्चों को मिलाकर खर्चे पर करीब ढाई हजार रुपये की रकम आती है। इससे पता चल जाता है कि भूमि व्यावसायिक है या बंधक रखी गई है। जानकारी होने से मोटी रकम डूबने से बच जाती है।
जमीन लेने से पहले विक्रेता के बारे में भी पूरी जानकारी जरूर लेनी चाहिए, जो जमीन आप लेने जा रहे हैं, उसका खुद मुआयना करें। अगर संभव हो तो पहले उस पर कुछ निर्माण के लिए ईंट गिरा दें। इससे पता चल जाएगा कि विवादित है कि नहीं। दलालों के चक्कर में फंस कर लोग मामूली फीस बचाने के चक्कर में फंस जाते हैं। निबंधन कार्यालय में यह पता नहीं चल पाता है कि भूमि का मामला किसी न्यायालय में लंबित तो नहीं है। -अभिषेक कुमार सिंह, सब रजिस्ट्रार निबंधन