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भारतीय ज्ञान परंपरा में भाषा का महत्वपूर्ण स्थान : प्रो विनोद
Sat, 24 Feb 2024 11:12 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sat, 24 Feb 2024 11:12 PM IST
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मदन मोहन मालवीय पीजी कॉलेज में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का हुआ शुभारंभ
फोटो - गोष्ठी को संबोधित करते मुख्य वक्ता प्रो. विनोद
संवाद न्यूज एजेंसी
भाटपाररानी। नगर के मदन मोहन मालवीय पीजी कॉलेज में शनिवार को भारतीय भाषा एवं ज्ञान परंपरा विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। मुख्य वक्ता विनोद ने कहा कि भाषाएं ज्ञान परंपरा का भंडारण होती हैं। भाषा ज्ञान की परंपरा है।
कहा कि भारतीय ज्ञान में अध्यात्म से लेकर विज्ञान तक भाषाओं का महत्वपूर्ण स्थान सदैव रहा है। भारतीय ज्ञान परंपरा भारतीय भाषा में जिसमें ज्ञान विज्ञान शामिल हो दी जानी चाहिए। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर के प्रोफेसर राजेश कुमार मल्ल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा और भाषाओं का अटूट संबंध है। यह हमें वेद उपनिषद से लेकर विज्ञान तक में देखने को मिलता है।
आयोजक कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर सतीश चंद्र गौड़ ने अतिथियों का स्वागत कर आभार जताया और उन्हें अंग वस्त्र व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। गोष्ठी को डॉ. पवन राय, डॉ. संजय तिवारी, डाॅ. विनय कुमार सिंह आदि ने भी संबोधित किया।
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फोटो - गोष्ठी को संबोधित करते मुख्य वक्ता प्रो. विनोद
संवाद न्यूज एजेंसी
भाटपाररानी। नगर के मदन मोहन मालवीय पीजी कॉलेज में शनिवार को भारतीय भाषा एवं ज्ञान परंपरा विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। मुख्य वक्ता विनोद ने कहा कि भाषाएं ज्ञान परंपरा का भंडारण होती हैं। भाषा ज्ञान की परंपरा है।
कहा कि भारतीय ज्ञान में अध्यात्म से लेकर विज्ञान तक भाषाओं का महत्वपूर्ण स्थान सदैव रहा है। भारतीय ज्ञान परंपरा भारतीय भाषा में जिसमें ज्ञान विज्ञान शामिल हो दी जानी चाहिए। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर के प्रोफेसर राजेश कुमार मल्ल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा और भाषाओं का अटूट संबंध है। यह हमें वेद उपनिषद से लेकर विज्ञान तक में देखने को मिलता है।
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आयोजक कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर सतीश चंद्र गौड़ ने अतिथियों का स्वागत कर आभार जताया और उन्हें अंग वस्त्र व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। गोष्ठी को डॉ. पवन राय, डॉ. संजय तिवारी, डाॅ. विनय कुमार सिंह आदि ने भी संबोधित किया।
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