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Deoria News: 40 साल के सूखे को खत्म करने लिए कांग्रेस ने अखिलेश सिंह पर लगाया दांव
Sun, 24 Mar 2024 11:10 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 24 Mar 2024 11:10 PM IST
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कांग्रेस ने देवरिया सदर से प्रत्याशी बनाकर भेजा
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। देवरिया सदर लोकसभा सीट पर इंडिया गठबंधन से कांग्रेस के अखिलेश प्रताप सिंह को अपना उम्मीदवार बनाकर चुनावी मैदान में उतार दिया है। रुद्रपुर क्षेत्र के कन्हौली गांव के रहने वाले अखिलेश प्रताप सिंह इस सीट पर कांग्रेस के 40 साल के सूखे को खत्म करने के लिए चुनाव मैदान में हैं।
देवरिया लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस ने शनिवार की रात इंडिया गठबंधन के तहत अखिलेश प्रताप सिंह पर दांव लगाया है। देवरिया सदर की लड़ाई अखिलेश प्रताप सिंह के चुनाव मैदान में उतरने के बाद दिलचस्प होगी। वर्ष 2012 में रुद्रपुर की जनता ने दो बार के विधानसभा चुनाव में इनपर भरोसा नहीं जताया था। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अखिलेश प्रताप सिंह जिलेवासियों का भरोसा जीतते हुए भाजपा के विजयी रथ को रोक पाते हैं कि नहीं।
वर्ष 2012 में अखिलेश प्रताप सिंह कांग्रेस से रुद्रपुर के विधायक चुने गए थे। 2017 में सपा-कांग्रेस के गठबंधन के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। 2022 में भी उन्हें भाजपा के जयप्रकाश निषाद से लगातार दूसरी बार शिकस्त खानी पड़ी थी।
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इस बार लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन में देवरिया लोकसभा की सीट कांग्रेस के खाते में गई तो पार्टी ने एक बार फिर अखिलेश प्रताप सिंह पर अपना दांव लगाया है।
38 साल पहले कांग्रेस से शुरू किया था राजनीतिक सफर
अखिलेश प्रताप सिंह कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में शुमार करते हैं। वह वर्तमान में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। उन्होंने 38 साल पहले अपना राजनीतिक सफर कांग्रेस से शुरू किया था। वह 1986 में यूपी यूथ कांग्रेस के प्रवक्ता बने और उसके बाद उन्होंने यूथ कांग्रेस में सेक्रेटरी, जनरल सेक्रेटरी, वाइस प्रेसिडेंट और कार्यकारी अध्यक्ष की भी जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद वह 1995 में उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता बने। 2012 में कांग्रेस ने उन्हें देवरिया जिले के रुद्रपुर विधानसभा से प्रत्याशी बनाया था और वह वहां विजय दर्ज कर विधायक बने थे।
1977 से 1984 के बीच छह बार कांग्रेस का दबदबा, 1984 के बाद से जीत का इंतजार
देवरिया। देवरिया लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस को आखिरी बार 1984 में जीत मिली थी। उसके बाद से पार्टी को इस सीट पर जीत का इंतजार है। इससे पहले इस सीट पर 1957 व 1977 को छोड़ वर्ष 1952 से लेकर 1984 तक देवरिया लोकसभा सीट पर कांग्रेसियों का कब्जा रहा। वर्ष 1957 में रामजी वर्मा ने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से तो वर्ष 1977 भारतीय लोकदल ने कांग्रेस के विजय रथ को रोका था। अब गठबंधन में 40 साल बाद पार्टी को यह सीट जीतने का मौका मिला है।
विश्वनाथ राय के बाद से अब तक किसी ने नहीं लगाई हैट्रिक
देवरिया सदर लोकसभा सीट पर लोकसभा का पहला चुनाव वर्ष 1952 में हुआ था। इस चुनाव में कांग्रेस के सरयू प्रसाद विजयी हुए थे। इसके बाद वर्ष 1962 में विश्वनाथ राय को जीत मिली। उन्होंने वर्ष 1967 व वर्ष 1971 में भी इस सीट से जीतते हुए हैट्रिक लगाई थी। वह अकेले ऐसे नेता हैं, जिन्होंने लगातार तीन बार देवरिया लोकसभा सीट से प्रतिनिधित्व किया है। वर्ष 1980 में रामायण राय तो वर्ष 1984 में राजमंगल पांडेय देवरिया सीट से जीतकर सांसद बने थे। इसके अगले चुनाव में यानी वर्ष 1989 में राजमंगल पांडेय कांग्रेस छोड़कर जनता दल से चुनाव लड़े और कांग्रेस के विजय रथ को रोकते हुए दोबारा सांसद बने। इसके बाद आज तक इस सीट से कोई कांग्रेसी सांसद नहीं बन पाया है।
मोहन सिंह तीन बार बने सांसद, दो बार सपा से तो एक बार जनता दल से
सपा नेता मोहन सिंह भी तीन बार देवरिया लोकसभा सीट से जीत कर सांसद बने। दो बार उन्होंने सपा के टिकट पर तो एक बार जनता दल के टिकट पर। मोहन सिंह वर्ष 1991 में जनता दल से, 1998 व 2004 में सपा के टिकट पर सांसद रहे थे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। देवरिया सदर लोकसभा सीट पर इंडिया गठबंधन से कांग्रेस के अखिलेश प्रताप सिंह को अपना उम्मीदवार बनाकर चुनावी मैदान में उतार दिया है। रुद्रपुर क्षेत्र के कन्हौली गांव के रहने वाले अखिलेश प्रताप सिंह इस सीट पर कांग्रेस के 40 साल के सूखे को खत्म करने के लिए चुनाव मैदान में हैं।
देवरिया लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस ने शनिवार की रात इंडिया गठबंधन के तहत अखिलेश प्रताप सिंह पर दांव लगाया है। देवरिया सदर की लड़ाई अखिलेश प्रताप सिंह के चुनाव मैदान में उतरने के बाद दिलचस्प होगी। वर्ष 2012 में रुद्रपुर की जनता ने दो बार के विधानसभा चुनाव में इनपर भरोसा नहीं जताया था। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अखिलेश प्रताप सिंह जिलेवासियों का भरोसा जीतते हुए भाजपा के विजयी रथ को रोक पाते हैं कि नहीं।
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वर्ष 2012 में अखिलेश प्रताप सिंह कांग्रेस से रुद्रपुर के विधायक चुने गए थे। 2017 में सपा-कांग्रेस के गठबंधन के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। 2022 में भी उन्हें भाजपा के जयप्रकाश निषाद से लगातार दूसरी बार शिकस्त खानी पड़ी थी।
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इस बार लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन में देवरिया लोकसभा की सीट कांग्रेस के खाते में गई तो पार्टी ने एक बार फिर अखिलेश प्रताप सिंह पर अपना दांव लगाया है।
38 साल पहले कांग्रेस से शुरू किया था राजनीतिक सफर
अखिलेश प्रताप सिंह कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में शुमार करते हैं। वह वर्तमान में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। उन्होंने 38 साल पहले अपना राजनीतिक सफर कांग्रेस से शुरू किया था। वह 1986 में यूपी यूथ कांग्रेस के प्रवक्ता बने और उसके बाद उन्होंने यूथ कांग्रेस में सेक्रेटरी, जनरल सेक्रेटरी, वाइस प्रेसिडेंट और कार्यकारी अध्यक्ष की भी जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद वह 1995 में उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता बने। 2012 में कांग्रेस ने उन्हें देवरिया जिले के रुद्रपुर विधानसभा से प्रत्याशी बनाया था और वह वहां विजय दर्ज कर विधायक बने थे।
1977 से 1984 के बीच छह बार कांग्रेस का दबदबा, 1984 के बाद से जीत का इंतजार
देवरिया। देवरिया लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस को आखिरी बार 1984 में जीत मिली थी। उसके बाद से पार्टी को इस सीट पर जीत का इंतजार है। इससे पहले इस सीट पर 1957 व 1977 को छोड़ वर्ष 1952 से लेकर 1984 तक देवरिया लोकसभा सीट पर कांग्रेसियों का कब्जा रहा। वर्ष 1957 में रामजी वर्मा ने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से तो वर्ष 1977 भारतीय लोकदल ने कांग्रेस के विजय रथ को रोका था। अब गठबंधन में 40 साल बाद पार्टी को यह सीट जीतने का मौका मिला है।
विश्वनाथ राय के बाद से अब तक किसी ने नहीं लगाई हैट्रिक
देवरिया सदर लोकसभा सीट पर लोकसभा का पहला चुनाव वर्ष 1952 में हुआ था। इस चुनाव में कांग्रेस के सरयू प्रसाद विजयी हुए थे। इसके बाद वर्ष 1962 में विश्वनाथ राय को जीत मिली। उन्होंने वर्ष 1967 व वर्ष 1971 में भी इस सीट से जीतते हुए हैट्रिक लगाई थी। वह अकेले ऐसे नेता हैं, जिन्होंने लगातार तीन बार देवरिया लोकसभा सीट से प्रतिनिधित्व किया है। वर्ष 1980 में रामायण राय तो वर्ष 1984 में राजमंगल पांडेय देवरिया सीट से जीतकर सांसद बने थे। इसके अगले चुनाव में यानी वर्ष 1989 में राजमंगल पांडेय कांग्रेस छोड़कर जनता दल से चुनाव लड़े और कांग्रेस के विजय रथ को रोकते हुए दोबारा सांसद बने। इसके बाद आज तक इस सीट से कोई कांग्रेसी सांसद नहीं बन पाया है।
मोहन सिंह तीन बार बने सांसद, दो बार सपा से तो एक बार जनता दल से
सपा नेता मोहन सिंह भी तीन बार देवरिया लोकसभा सीट से जीत कर सांसद बने। दो बार उन्होंने सपा के टिकट पर तो एक बार जनता दल के टिकट पर। मोहन सिंह वर्ष 1991 में जनता दल से, 1998 व 2004 में सपा के टिकट पर सांसद रहे थे।