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Deoria News: कभी रंग बेचकर की पढ़ाई, आज राज्यपाल पुरस्कार से होंगे सम्मानित

Thu, 05 Sep 2024 05:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Updated Thu, 05 Sep 2024 05:09 AM IST
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Deoria News: Once studied by selling colours, will be honored with Governor's Award today
बरहज। देईडीहा गांव निवासी और कंपोजिट विद्यालय के प्रधानाध्यापक डॉ. आदित्य नारायण गुप्त को राज्यपाल पुरस्कार के लिए नामित किया गया है। जिनको बृहस्पतिवार को गोरखपुर में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी सम्मानित करेंगे। शिक्षक दिवस पर मिलने वाले राज्यपाल पुरस्कार को लेकर लोगों में हर्ष है। डॉ. आदित्य नगर में रंग बेचकर उससे होने वाली कमाई से पढ़ाई कर शिक्षक बने हैं। वह छात्रों में अपने बच्चों का चेहरा देखते हैं। नौकरी में रहते हुए वह विगत वर्षों से समय का पाबंद होने के साथ-साथ खाली समय में निर्धन बच्चों की पढ़ाई में मदद करते हैं।
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शिक्षक दिवस पर राज्यपाल पुरस्कार के लिए 21 अगस्त को लखनऊ निदेशालय बेसिक शिक्षा में जिले के देईडीहा से डॉ. आदित्य नारायण और शिक्षिका सीमा को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था। उनका कहना है कि चयन समिति की ओर से करीब 30-40 मिनट में विभिन्न पहलुओं पर प्रश्न किया गया। प्रदेश के 75 में 41 लोगों का नाम पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। अधिकारियों द्वारा दूरभाष पर मिलने वाले पुरस्कार की सूचना मिलने पर वह फूले नहीं समा रहे हैं। जबकि बधाई के लिए शुभचिंतकों का तांता लगा हुआ है।
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देईडीहा गांव निवासी स्व. निरंजन साहु के चार संतान तपनारायण, हरीनारायण, मुन्ना में आदित्य नारायण सबसे छोटे पुत्र हैं। 2004 के बैच में 20 फरवरी 2007 को उनकी प्राथमिक विद्यालय लवरछी में नियुक्ति हुई। वह 2010 में देईडीहा प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक और कंपोजिट विद्यालय के प्रधानाध्यापक बनाए गए। डाॅ. आदित्य नारायण स्कूल में छात्रों की पढ़ाई के बाद मलिन और दलित बस्तियों के बच्चाें को समय देते हैं। डॉ. आदित्य की पुत्रियां अकांक्षा सरकारी स्कूल में कक्षा 10वीं, आदिमा कक्षा आठ में कंपोजिट विद्यालय और थानिमा आंगनबाड़ी में शिक्षा ग्रहण कर रही हैं।
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रेलवे प्लेटफार्म पर पढ़़ाई कर टॉप किया था यूनिवर्सिटी, आज भी साइकिल से सफर तय करते हैं आदित्य
देईडीहा गांव निवासी व शिक्षक डॉ.आदित्य नारायण ने 1998 में गोरखपुर रेलवे प्लेटफार्म पर एमए की पढ़ाई कर विश्वविद्यालय में टॉप किया था। वे विश्वविद्यालय के साथ प्लेटफार्म पर रहकर पढ़ाई करते थे, इसके लिए घर से तीन दिन का भोजन साथ लेकर आते थे। प्राइमरी, हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई उन्होंने बरहज से किया है। उनका कहना है कि आज भी सड़क के किनारे सोने वालों को देख पढ़ाई का समय याद आ जाता है। वह मुकाम हासिल करने के बाद सामाजिक कार्य में माता, पिता, भाई-बहन और पत्नी नीतू देवी को श्रेय देते हैं।
17 वर्ष में न के बराबर लिया है अवकाश, लैप्स हो जाता है सीएल
देईडीहा गांव निवासी और शिक्षक डॉ. आदित्य नारायण गुप्त 2004 बैच के हैं। वह गरीब बच्चों को शिक्षा क्षेत्र के मुख्य धारा से जोड़ने की अलख जगा रहे हैं। उनके स्कूल में करीब 11 गांवों के 250 से अधिक छात्र नामित हैं। बताया जाता है कि 2007 से 2024 तक उन्होंने नहीं के बराबर अवकाश लिया है। उनका सीएल लैप्स कर जाता है। स्कूल में उन्होंने पढ़ाई का माहौल बनाने में सरकारी संसाधनों के अलावा अपने वेतन और जनसहयोग से भौतिक संसाधनों की व्यवस्था किया है।

बीआरसी में किया गया सम्मानित
ब्लॉक संसाधन केंद्र पर बुधवार को सम्मान समारोह आयोजित किया गया। जिसमें खंड शिक्षाधिकारी राजकिशोर सिंह ने राज्यपाल पुरस्कार के लिए चयनित होने पर डॉ. आदित्य नारायण गुप्त को प्रतीक चिन्ह आदि देकर सम्मानित किया। बीईओ ने कहा कि उनके नाम का चयन होने से जनपद सहित क्षेत्र का मान बढ़ा है। मौके पर सुशील यादव, आशुतोष शाह, विजय खरवार, संजय प्रजापति, अशोक सिंह, उमेश चंद्र, आलोक गुप्त, अमीर चंद, सतेंद्र पांडेय, रीना जायसवाल, अर्चना, मदन गोंड़, रामश्रृंगार, हेमंत शुक्ल आदि मौजूद रहे।
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