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Deoria News: सत्याग्रही खजड़ी भगत की क्षतिग्रस्त प्रतिमा छह माह में भी नहीं बदली
Sat, 08 Aug 2026 12:17 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sat, 08 Aug 2026 12:17 AM IST
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भाटपार रानी। अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान सत्याग्रही भागवत भगत खजड़ी वाले को दो साल गोरखपुर जेल में बिताना पड़ा था। क्षेत्र में घूम-घूम कर आजादी की अलख जगाने वाले इस महान स्वतंत्रता सेनानी की प्रतिमा बंगरा बाजार चौराहे पर स्थापित है। बीते 5 फरवरी की रात में एक सिरफिरे ने प्रतिमा खंडित कर दी। जिसको लेकर अगले दिन बड़ा हंगामा हुआ। लेकिन क्षतिग्रस्त प्रतिमा आज तक नहीं बदली गई।
भटनी ब्लॉक के सठियांव गांव निवासी भागवत भगत खजड़ी बजाकर लोगों को आजादी की लड़ाई के लिए जागृत करते थे। एक बार इन्होंने गांधी जी की सभा में पहुंचकर खजड़ी बजाकर गीत भी सुनाया था। उसके बाद से पुलिस इनका पीछा कर रही थी। 21 अक्तूबर वर्ष 1942 को दमदम में इनकी गिरफ्तारी हुई थी। 02 अक्तूबर 1944 को जेल से रिहा हुए।
बीते पांच फरवरी की रात पिपरा बघेल गांव के एक व्यक्ति ने बंगरा बाजार चौराहे पर लगी इनकी प्रतिमा को खंडित कर दिया। आसपास के दुकानदारों ने रात में ही उसे पकड़ कर पुलिस को सौंप दिया था। अगली सुबह सूचना पर एसडीएम भाटपार रानी, तहसीलदार,नायब तहसीलदार, सीओ तथा कई थाने की पुलिस भी पहुंच गई थी। विधायक सभाकुवर, पूर्व विधायक डॉ आशुतोष उपाध्याय, जिला पंचायत अध्यक्ष गिरीश चंद तिवारी, पूर्व सांसद रवींद्र कुशवाहा, जयनाथ कुशवाहा सहित सभी राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पहुंचकर इसकी कड़ी आलोचना करते हुए कई घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया। तत्काल नई प्रतिमा स्थापित कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग भी की थी। एसडीम व राजनीतिक दलों के नेताओं के आश्वासन पर धरना समाप्त हुआ। परंतु 6 माह बीतने के बाद भी अभी खंडित प्रतिमा के स्थान पर नई प्रतिमा नहीं लग पाई है।
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विधायक सभाकुंवर का कहना है कि उनके प्रस्ताव पर शासन ने 9 बिंदुओं पर अख्या मांगी है। एसडीएम भाटपार रानी के यहां से आख्या शासन में जाने के बाद कार्य योजना बनाई जाएगी। इसके बाद नई प्रतिमा स्थापित होगी।
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भटनी ब्लॉक के सठियांव गांव निवासी भागवत भगत खजड़ी बजाकर लोगों को आजादी की लड़ाई के लिए जागृत करते थे। एक बार इन्होंने गांधी जी की सभा में पहुंचकर खजड़ी बजाकर गीत भी सुनाया था। उसके बाद से पुलिस इनका पीछा कर रही थी। 21 अक्तूबर वर्ष 1942 को दमदम में इनकी गिरफ्तारी हुई थी। 02 अक्तूबर 1944 को जेल से रिहा हुए।
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बीते पांच फरवरी की रात पिपरा बघेल गांव के एक व्यक्ति ने बंगरा बाजार चौराहे पर लगी इनकी प्रतिमा को खंडित कर दिया। आसपास के दुकानदारों ने रात में ही उसे पकड़ कर पुलिस को सौंप दिया था। अगली सुबह सूचना पर एसडीएम भाटपार रानी, तहसीलदार,नायब तहसीलदार, सीओ तथा कई थाने की पुलिस भी पहुंच गई थी। विधायक सभाकुवर, पूर्व विधायक डॉ आशुतोष उपाध्याय, जिला पंचायत अध्यक्ष गिरीश चंद तिवारी, पूर्व सांसद रवींद्र कुशवाहा, जयनाथ कुशवाहा सहित सभी राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पहुंचकर इसकी कड़ी आलोचना करते हुए कई घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया। तत्काल नई प्रतिमा स्थापित कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग भी की थी। एसडीम व राजनीतिक दलों के नेताओं के आश्वासन पर धरना समाप्त हुआ। परंतु 6 माह बीतने के बाद भी अभी खंडित प्रतिमा के स्थान पर नई प्रतिमा नहीं लग पाई है।
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विधायक सभाकुंवर का कहना है कि उनके प्रस्ताव पर शासन ने 9 बिंदुओं पर अख्या मांगी है। एसडीएम भाटपार रानी के यहां से आख्या शासन में जाने के बाद कार्य योजना बनाई जाएगी। इसके बाद नई प्रतिमा स्थापित होगी।