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Deoria News: अस्तित्व खो चुके कुओं को संरक्षण देगा जलदूत
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अस्तित्व खो चुके कुओं को संरक्षण देगा जलदूत
शहर से लेकर गांव तक के सूख चुके कुओं में फिर भरेगा जल, एप पर रहेगा डाटा
रोजगार सेवकों और ग्राम पंचायत अधिकारियों को दिए गए सर्वे करने के निर्देश
संवाद न्यूूज एजेंसी
देवरिया। जिलेभर के कुएं संरक्षित होंगे। ताकि भविष्य में जल की कमी को दूर करने में इनसे मदद मिल सके। जिला प्रशासन मुख्यालय से लगायत देहात तक के कुओं का हिसाब रखेगा। अपना अस्तित्व खो चुके कुओं का सर्वे कर डाटा जलदूप एप पर अपलोड किया जाएगा। इसके लिए रोजगार सेवकों और ग्राम पंचायत अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। जिन जगहों पर कुआं पाट दिया गया है, उसके बारे में भी पूरा ब्योरा जुटाया जाएगा। इसके बाद उसका निर्माण हो सकेगा।
प्राचीन समय से ही कुएं का अपना महत्व रहा है। किसी जमाने में कुएं स्वच्छ जल के बड़े स्रोत माने जाते थे। वहीं, कुओं का सामाजिक और धार्मिक महत्व भी था। यहां तक कि ग्रामीण क्षेत्रों में पहले कुएं पर विधि-विधान से शादी की रस्म पूरी की जाती थी। विभिन्न संसाधनों से पानी उपलब्ध होने के कारण लोग कुआं पाटकर उसका अस्तित्व समाप्त करने लगे हैं। इसके कारण कुओं की संख्या में तेजी से गिरावट आई है। अब शासन ने इन कुओं को फिर से सही हालत में लाने की कवायद शुरू कर दी है। शासन की तरफ से जारी किए गए जलदूत एप पर जिले के सभी कुओं का सर्वे कर अपलोड किया जाएगा।
एप में कुएं की लोकेशन और वर्तमान स्थिति का जिक्र होगा। यह भी पता लगाया जाएगा कि अगर पाट दिया गया है तो कितने साल पहले पाटा गया है। अगर कोई कुआं मिट्टी से आधा भर चुका है तो उसके बारे में भी जानकारी एप पर दी जाएगी। इतना ही नहीं इनका फोटो और वीडियो भी ए88प अपलोड किया किया जाएगा। सर्वे का काम पूरा होने के बाद फिर से कुुआं को अस्तित्व में लाने का काम शुरू किया जाएगा।
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ग्रामीण विकास मंत्रालाय करेगा निगरानी
देवरिया। जल संरक्षण अभियान के तहत अब कुआं को भी शामिल कर लिया गया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने जलदूत एप बनाया है। इसमे मनरेगा को जोड़ा गया है। इसके तहत कुओं के संरक्षण का काम किया जाएगा। नेशनल मोबाइल मॉनीटरिंग सिस्टम का यूजर आईडी एवं पासवर्ड सर्वे करने वाले कर्मचारियों के पास होगा।
कोट
शासन के निर्देश पर सभी कुओं को सर्वे कराने के निर्देश दिए गए हैं। कुओं को फिर से अस्तित्व में लाने के लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय नेे पहल की है। इसके लिए सभी रोजगार सेवकों को कहा गया है।
-रवींद्र कुमार, सीडीओ
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शहर से लेकर गांव तक के सूख चुके कुओं में फिर भरेगा जल, एप पर रहेगा डाटा
रोजगार सेवकों और ग्राम पंचायत अधिकारियों को दिए गए सर्वे करने के निर्देश
संवाद न्यूूज एजेंसी
देवरिया। जिलेभर के कुएं संरक्षित होंगे। ताकि भविष्य में जल की कमी को दूर करने में इनसे मदद मिल सके। जिला प्रशासन मुख्यालय से लगायत देहात तक के कुओं का हिसाब रखेगा। अपना अस्तित्व खो चुके कुओं का सर्वे कर डाटा जलदूप एप पर अपलोड किया जाएगा। इसके लिए रोजगार सेवकों और ग्राम पंचायत अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। जिन जगहों पर कुआं पाट दिया गया है, उसके बारे में भी पूरा ब्योरा जुटाया जाएगा। इसके बाद उसका निर्माण हो सकेगा।
प्राचीन समय से ही कुएं का अपना महत्व रहा है। किसी जमाने में कुएं स्वच्छ जल के बड़े स्रोत माने जाते थे। वहीं, कुओं का सामाजिक और धार्मिक महत्व भी था। यहां तक कि ग्रामीण क्षेत्रों में पहले कुएं पर विधि-विधान से शादी की रस्म पूरी की जाती थी। विभिन्न संसाधनों से पानी उपलब्ध होने के कारण लोग कुआं पाटकर उसका अस्तित्व समाप्त करने लगे हैं। इसके कारण कुओं की संख्या में तेजी से गिरावट आई है। अब शासन ने इन कुओं को फिर से सही हालत में लाने की कवायद शुरू कर दी है। शासन की तरफ से जारी किए गए जलदूत एप पर जिले के सभी कुओं का सर्वे कर अपलोड किया जाएगा।
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एप में कुएं की लोकेशन और वर्तमान स्थिति का जिक्र होगा। यह भी पता लगाया जाएगा कि अगर पाट दिया गया है तो कितने साल पहले पाटा गया है। अगर कोई कुआं मिट्टी से आधा भर चुका है तो उसके बारे में भी जानकारी एप पर दी जाएगी। इतना ही नहीं इनका फोटो और वीडियो भी ए88प अपलोड किया किया जाएगा। सर्वे का काम पूरा होने के बाद फिर से कुुआं को अस्तित्व में लाने का काम शुरू किया जाएगा।
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ग्रामीण विकास मंत्रालाय करेगा निगरानी
देवरिया। जल संरक्षण अभियान के तहत अब कुआं को भी शामिल कर लिया गया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने जलदूत एप बनाया है। इसमे मनरेगा को जोड़ा गया है। इसके तहत कुओं के संरक्षण का काम किया जाएगा। नेशनल मोबाइल मॉनीटरिंग सिस्टम का यूजर आईडी एवं पासवर्ड सर्वे करने वाले कर्मचारियों के पास होगा।
कोट
शासन के निर्देश पर सभी कुओं को सर्वे कराने के निर्देश दिए गए हैं। कुओं को फिर से अस्तित्व में लाने के लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय नेे पहल की है। इसके लिए सभी रोजगार सेवकों को कहा गया है।
-रवींद्र कुमार, सीडीओ