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Deoria News: मारपीट और हत्या की कोशिश की आपराधिक कार्रवाई हाईकोर्ट से निरस्त
Sun, 25 Oct 2026 12:35 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 25 Oct 2026 12:35 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। भाटपाररानी थाने में वर्ष 2019 में दर्ज मारपीट और हत्या की कोशिश से जुड़ी आपराधिक कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निरस्त कर दी है। हाईकोर्ट के नौ अक्तूबर के आदेश का अनुपालन करते हुए अपर सत्र न्यायालय ने संबंधित पत्रावली दाखिल दफ्तर करने का आदेश दिया। भाटपाररानी थाने में दर्ज अपराध संख्या 29/2019 की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट नरेंद्र नाथ त्रिपाठी की अदालत में चल रही थी। सत्र परीक्षण संख्या 232/2026 में अभय कुमार उर्फ गांधी समेत छह आरोपी थे।
सुनवाई के दौरान आरोपी अभय कुमार उर्फ गांधी, रोहित यादव, रितेश प्रताप यादव, मृत्युंजय यादव, अश्वनी उर्फ सनी और शैलेश उर्फ गोल्डन अदालत में उपस्थित हुए। आरोपियों की ओर से प्रार्थनापत्र और शपथपत्र के साथ हाईकोर्ट के नौ अक्तूबर 2026 के आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत की गई।
अदालत ने कंप्यूटर अनुभाग से आदेश का सत्यापन कराया। हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर आदेश सही पाया गया।
इसके बाद अदालत ने माना कि आपराधिक कार्रवाई निरस्त होने से सुनवाई जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है। न्यायालय ने पत्रावली नियमानुसार दाखिल दफ्तर करने का आदेश दिया।
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देवरिया। भाटपाररानी थाने में वर्ष 2019 में दर्ज मारपीट और हत्या की कोशिश से जुड़ी आपराधिक कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निरस्त कर दी है। हाईकोर्ट के नौ अक्तूबर के आदेश का अनुपालन करते हुए अपर सत्र न्यायालय ने संबंधित पत्रावली दाखिल दफ्तर करने का आदेश दिया। भाटपाररानी थाने में दर्ज अपराध संख्या 29/2019 की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट नरेंद्र नाथ त्रिपाठी की अदालत में चल रही थी। सत्र परीक्षण संख्या 232/2026 में अभय कुमार उर्फ गांधी समेत छह आरोपी थे।
सुनवाई के दौरान आरोपी अभय कुमार उर्फ गांधी, रोहित यादव, रितेश प्रताप यादव, मृत्युंजय यादव, अश्वनी उर्फ सनी और शैलेश उर्फ गोल्डन अदालत में उपस्थित हुए। आरोपियों की ओर से प्रार्थनापत्र और शपथपत्र के साथ हाईकोर्ट के नौ अक्तूबर 2026 के आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत की गई।
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अदालत ने कंप्यूटर अनुभाग से आदेश का सत्यापन कराया। हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर आदेश सही पाया गया।
इसके बाद अदालत ने माना कि आपराधिक कार्रवाई निरस्त होने से सुनवाई जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है। न्यायालय ने पत्रावली नियमानुसार दाखिल दफ्तर करने का आदेश दिया।
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