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पूर्वांचल का यादव सिंह है अपर निदेशक रामानंद
ब्यूरो अमर उजाला/ देवरिया
Updated Wed, 25 May 2016 12:01 AM IST
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आजमगढ़ में अपर निदेशक कोषागार पद पर तैनात रामानंद नौकरी के तीन दशकों में अरबों की संपत्ति तैयार कर ली। प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर सफेदपोशों में उसकी ऊंची रसूक है। यंू कहे तो पूर्वांचल में इसका रुतबा यादव सिंह से कम नहीं आंका जा सकता है। अकूत संपत्ति की जानकारी होने के बाद पुलिस महकमे में खलबली मची हुई है। मजदूर परिवार में पैदा हुए रामानंद के पास अरबों की संपत्ति कहां से आई, इस बात को लेकर इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म है। चालक संजय पटेल की हत्या में नाम प्रकाश में आने के बाद रामानंद के लिए कई सफेदपोशों और प्राशासनिक अधिकारियों ने एसपी प्रभाकर चौधरी पर दबाव बनाया लेकिन किसी की दाल नहीं गली।
रामपुर कारखाना, बेलवाबाजार सेमरहिया निवासी श्रीपति पासवान के चार पुत्रों में अपर निदेशक रामानंद सबसे छोटा था। गरीबी होने के बाद भी पिता ने रामानंद की पढाई जारी रखी, वह काफी होनहार था। रामानंद का बड़ा भाई अपराध की दुनिया में आ गया। बाकी दो भाइयों को नौकरी मिल गई। अस्सी के दशक में रामानंद ने नौकरी की शुरुआत डीआईओएस कार्यालय देवरिया से की। गोरखपुर, बलिया तक पहुंचते ही उसने जमीन का कारोबार शुरू कर दिया। आजमगढ़ में तैनाती के दौरान उसके कई रसूकदार लोगों से संपर्क हुआ।
सूत्रों की माने तो यूपी के साथ प्रदेश के कई बड़े महानगरों में रामानंद ने जमीन का कारोबार शुरू किया। अपने काले कारोबार को राजनीतिक संरक्षण देने के लिए वह एक पार्टी फंड में चंदा भी देने लगा और पूर्व मुख्यमंत्री के संपर्क में आया। नौकरी के दौरान उसने कई लोगों को नौकरी भी दिलाई और रुपये भी लिए।गोरखपुर के देवरिया बाइक पास पर कई एकड़ जमीन को लेकर रामानंद का स्थानीय भू माफियाओं से विवाद हो गया। ऋषिमुनी के नाम से पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के बाद अपर निदेशक रामानंद सुर्खियों में आया।
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एसपी की पूछताछ में उसने करोड़ो की संपत्ति, जमीन होने की बात स्वीकार की। संजय पटेल हत्याकांड का खुलासा करने वाली पुलिस टीम का दावा है कि रामानंद की सफेदपोशों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच अच्छी पैठ है। उसकी गिरफ्तारी होते ही उनके बीच खलबली मच गई थी। सूत्रों की माने तो जुगाड़ के साथ, करोड़ो रुपये का आफर देकर रामानंद को बचाने की कोशिश की गई। लेकिन एसपी प्रभाकर चौधरी के आगे किसी की नहीं चली। चर्चा है कि रामानंद की मुखबिरी करने वाला राधेश्याम यादव की नजर भी उसके करोड़ो की प्रापर्टी पर थी। वह लंबा हाथ मारने के लिए बदमाशों की एक टीम बनाई। जिसमें बिहार का बर्खास्त सिपाही भी शामिल हुआ।
महुआडीह चौराहे पर राधेश्याम के लिए करीब बीस लाख रुपये की जमीन रामानंद ने खरीद रखी थी। इसके अलावे लाइसेंस भी उसके नाम से जारी करा रखा था। रामानंद के पास तीन दशकों में अरबों की संपत्ति कहा से आई यह बात किसी को गले नहीं उतर रही है। प्रेसवार्ता के दौरान एसपी ने साफ कर दिया था कि रामानंद के बारे में शासन को अवगत कराया जाएगा। जबकि सूत्रों की मानने तो रामानंद की रसूक ऊपर तक है जबतक इस मामले में शासन गंभीर नहीं होगा तब तक पूर्वांचल के यादव सिंह के काले साम्राज्य से पर्दा नहीं हटा जाएगा।
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रामपुर कारखाना, बेलवाबाजार सेमरहिया निवासी श्रीपति पासवान के चार पुत्रों में अपर निदेशक रामानंद सबसे छोटा था। गरीबी होने के बाद भी पिता ने रामानंद की पढाई जारी रखी, वह काफी होनहार था। रामानंद का बड़ा भाई अपराध की दुनिया में आ गया। बाकी दो भाइयों को नौकरी मिल गई। अस्सी के दशक में रामानंद ने नौकरी की शुरुआत डीआईओएस कार्यालय देवरिया से की। गोरखपुर, बलिया तक पहुंचते ही उसने जमीन का कारोबार शुरू कर दिया। आजमगढ़ में तैनाती के दौरान उसके कई रसूकदार लोगों से संपर्क हुआ।
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सूत्रों की माने तो यूपी के साथ प्रदेश के कई बड़े महानगरों में रामानंद ने जमीन का कारोबार शुरू किया। अपने काले कारोबार को राजनीतिक संरक्षण देने के लिए वह एक पार्टी फंड में चंदा भी देने लगा और पूर्व मुख्यमंत्री के संपर्क में आया। नौकरी के दौरान उसने कई लोगों को नौकरी भी दिलाई और रुपये भी लिए।गोरखपुर के देवरिया बाइक पास पर कई एकड़ जमीन को लेकर रामानंद का स्थानीय भू माफियाओं से विवाद हो गया। ऋषिमुनी के नाम से पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के बाद अपर निदेशक रामानंद सुर्खियों में आया।
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एसपी की पूछताछ में उसने करोड़ो की संपत्ति, जमीन होने की बात स्वीकार की। संजय पटेल हत्याकांड का खुलासा करने वाली पुलिस टीम का दावा है कि रामानंद की सफेदपोशों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच अच्छी पैठ है। उसकी गिरफ्तारी होते ही उनके बीच खलबली मच गई थी। सूत्रों की माने तो जुगाड़ के साथ, करोड़ो रुपये का आफर देकर रामानंद को बचाने की कोशिश की गई। लेकिन एसपी प्रभाकर चौधरी के आगे किसी की नहीं चली। चर्चा है कि रामानंद की मुखबिरी करने वाला राधेश्याम यादव की नजर भी उसके करोड़ो की प्रापर्टी पर थी। वह लंबा हाथ मारने के लिए बदमाशों की एक टीम बनाई। जिसमें बिहार का बर्खास्त सिपाही भी शामिल हुआ।
महुआडीह चौराहे पर राधेश्याम के लिए करीब बीस लाख रुपये की जमीन रामानंद ने खरीद रखी थी। इसके अलावे लाइसेंस भी उसके नाम से जारी करा रखा था। रामानंद के पास तीन दशकों में अरबों की संपत्ति कहा से आई यह बात किसी को गले नहीं उतर रही है। प्रेसवार्ता के दौरान एसपी ने साफ कर दिया था कि रामानंद के बारे में शासन को अवगत कराया जाएगा। जबकि सूत्रों की मानने तो रामानंद की रसूक ऊपर तक है जबतक इस मामले में शासन गंभीर नहीं होगा तब तक पूर्वांचल के यादव सिंह के काले साम्राज्य से पर्दा नहीं हटा जाएगा।