{"_id":"58a340c44f1c1ba340d84e9d","slug":"immersed-in-a-sea-of-sorrow-batparrani","type":"story","status":"publish","title_hn":"गम के सैलाब में डूबा भाटपाररानी","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
गम के सैलाब में डूबा भाटपाररानी
देवरिया
Updated Tue, 14 Feb 2017 11:09 PM IST
विज्ञापन
भाटपाररानी में रोते-बिलखते परिवार के लोग।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डॉ. मोतीलाल
भाटपाररानी (देवरिया)। एक ही परिवार के छह सदस्यों की मौत ने सबको हिला दिया। गम के सैलाब में पूरा कस्बा डूब गया। हृदय विदारक हादसे के बाद हार आंख से आंसू छलक रहे थे। सन्नाटा और उदासी यह बताने के लिए काफी था कि कोई बड़ी अनहोनी हुई है। दिनभर रामचंद्र बरनवाल के दरवाजे पर भीड़ जुटी रही। हर तरफ रोने की आवाज सुनाई दे रही थी।
गमगीन परिवार को लोग ढांढस बंधा रहे थे लेकिन अपनों को खोने वालों के हर चेहरे उदास थे। कस्बे के बापू रोड निवासी रामचंद्र बरनवाल, भाई सुशील बरनवाल, मनोज बरनवाल, बहन श्वेता बरनवाल, दामाद कमलनाथ और मामा भीम बरनवाल के मौत की खबर पूरे कस्बे और आसपास के क्षेत्रों में फैल गई। रामचंद्र के दरवाजे पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। स्व. आद्या प्रसाद बरनवाल के सात बेटे सत्यदेव, रामचंद्र, सुशील, प्रद्युम्न, अनिल, मनोज और पवन हैं। कुछ दिनों से रामचंद्र बीमार थे।
गुरु गोरखनाथ अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। हालत गंभीर देखकर डॉक्टरों ने उन्हें रेफर कर दिया था। परिवार के लोग उन्हे लेकर प्राइवेट एंबुलेंस से लखनऊ जा रहे थे। साथ में भाई सुशील और मनोज थे। बेटी श्वेता पिता रामचंद्र से बेहद स्नेह रखती थी, लिहाजा हादसे की रात लखनऊ जाते समय मां मीरा देवी को भाटपाररानी भेजकर साथ जा रही थी।
विज्ञापन
रामचंद्र के बड़े दामाद कमलनाथ और रिश्तेदार भीम भी साथ थे। संतकबीरनगर में हुए हादसे में सभी की मौत हो गई। परिवार के अन्य सदस्य संतकबीरनगर चले गए थे। हादसे की खबर सुनकर दूरदराज से रिश्तेदार भी आ गए थे। बापू रोड पर रामचंद्र के घर के आसपास रहने वालों के घरों में भी चूल्हे नहीं जले। सभी के शव भाटपाररानी पहुंच गए। आज छोटी गंडक पर अंतिम संस्कार होगा।
विज्ञापन
भाटपाररानी (देवरिया)। एक ही परिवार के छह सदस्यों की मौत ने सबको हिला दिया। गम के सैलाब में पूरा कस्बा डूब गया। हृदय विदारक हादसे के बाद हार आंख से आंसू छलक रहे थे। सन्नाटा और उदासी यह बताने के लिए काफी था कि कोई बड़ी अनहोनी हुई है। दिनभर रामचंद्र बरनवाल के दरवाजे पर भीड़ जुटी रही। हर तरफ रोने की आवाज सुनाई दे रही थी।
गमगीन परिवार को लोग ढांढस बंधा रहे थे लेकिन अपनों को खोने वालों के हर चेहरे उदास थे। कस्बे के बापू रोड निवासी रामचंद्र बरनवाल, भाई सुशील बरनवाल, मनोज बरनवाल, बहन श्वेता बरनवाल, दामाद कमलनाथ और मामा भीम बरनवाल के मौत की खबर पूरे कस्बे और आसपास के क्षेत्रों में फैल गई। रामचंद्र के दरवाजे पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। स्व. आद्या प्रसाद बरनवाल के सात बेटे सत्यदेव, रामचंद्र, सुशील, प्रद्युम्न, अनिल, मनोज और पवन हैं। कुछ दिनों से रामचंद्र बीमार थे।
विज्ञापन
गुरु गोरखनाथ अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। हालत गंभीर देखकर डॉक्टरों ने उन्हें रेफर कर दिया था। परिवार के लोग उन्हे लेकर प्राइवेट एंबुलेंस से लखनऊ जा रहे थे। साथ में भाई सुशील और मनोज थे। बेटी श्वेता पिता रामचंद्र से बेहद स्नेह रखती थी, लिहाजा हादसे की रात लखनऊ जाते समय मां मीरा देवी को भाटपाररानी भेजकर साथ जा रही थी।
विज्ञापन
रामचंद्र के बड़े दामाद कमलनाथ और रिश्तेदार भीम भी साथ थे। संतकबीरनगर में हुए हादसे में सभी की मौत हो गई। परिवार के अन्य सदस्य संतकबीरनगर चले गए थे। हादसे की खबर सुनकर दूरदराज से रिश्तेदार भी आ गए थे। बापू रोड पर रामचंद्र के घर के आसपास रहने वालों के घरों में भी चूल्हे नहीं जले। सभी के शव भाटपाररानी पहुंच गए। आज छोटी गंडक पर अंतिम संस्कार होगा।