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गलत आख्या देने पर अधिकारियों पर कार्रवाई
ब्यूरो अमर उजाला/ देवरिया
Updated Sat, 26 Mar 2016 11:27 PM IST
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गलत आख्या देने पर अधिकारियों पर कार्रवाई।
- फोटो : demo
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हाईकोर्ट की अवमानना के मामले में गलत आख्या उपलब्ध कराने पर शासन ने उप निदेशक समाज कल्याण लखनऊ और जिला समाज कल्याण अधिकारी को प्रतिकूल प्रविष्टि दी है। समाज कल्याण अनुभाग के उप सचिव चारूलता ने इस आशय का आदेश जारी किया है।
उन्होंने कहा है कि सिविल मिस रिट याचिका डॉ. अंबेडकर प्राथमिक पाठशाला गौतमपुरी पथरदेवा एवं अन्य बनाम उप्र सरकार व अन्य और अवमानना वाद डॉ. अंबेडकर प्राथमिक पाठशाला गौतमपुरी पथरदेवा बनाम सुनील कुमार प्रमुख सचिव समाज कल्याण एवं दो अन्य के मामले में गलत तथ्यों के आधार पर त्रुटिपूर्ण आख्या उपलब्ध कराई गई। जिसके कारण न्यायालय के प्रकरण में अप्रत्याशित देरी हुई।
देरी और शासकीय आदेशों की अवहेलना, पद के दायित्वों के प्रति लापरवाही को देखते हुए शासन ने 19 जनवरी को उप निदेशक समाज कल्याण उप्र लखनऊ पीसी उपाध्याय और जिला समाज कल्याण अधिकारी एनएन द्विवेदी से जवाब मांगा था। दोनों अधिकारियों की ओर से जवाब भेजा गया। जिससे शासन असंतुष्ट रहा।
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शासन ने दोनों अधिकारियों को बिना परीक्षण के त्रुटिपूर्ण और गलत तथ्यों के आधार पर आख्या भेजने और समय से सही आख्या न देने के लिए पूरी तरह से उत्तरदायी पाया। शासन का कहना है कि इसके कारण उच्च न्यायालय से संबंधित महत्वपूर्ण संवेदनशील प्रकरण में अप्रत्याशित देरी हुई।
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उन्होंने कहा है कि सिविल मिस रिट याचिका डॉ. अंबेडकर प्राथमिक पाठशाला गौतमपुरी पथरदेवा एवं अन्य बनाम उप्र सरकार व अन्य और अवमानना वाद डॉ. अंबेडकर प्राथमिक पाठशाला गौतमपुरी पथरदेवा बनाम सुनील कुमार प्रमुख सचिव समाज कल्याण एवं दो अन्य के मामले में गलत तथ्यों के आधार पर त्रुटिपूर्ण आख्या उपलब्ध कराई गई। जिसके कारण न्यायालय के प्रकरण में अप्रत्याशित देरी हुई।
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देरी और शासकीय आदेशों की अवहेलना, पद के दायित्वों के प्रति लापरवाही को देखते हुए शासन ने 19 जनवरी को उप निदेशक समाज कल्याण उप्र लखनऊ पीसी उपाध्याय और जिला समाज कल्याण अधिकारी एनएन द्विवेदी से जवाब मांगा था। दोनों अधिकारियों की ओर से जवाब भेजा गया। जिससे शासन असंतुष्ट रहा।
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शासन ने दोनों अधिकारियों को बिना परीक्षण के त्रुटिपूर्ण और गलत तथ्यों के आधार पर आख्या भेजने और समय से सही आख्या न देने के लिए पूरी तरह से उत्तरदायी पाया। शासन का कहना है कि इसके कारण उच्च न्यायालय से संबंधित महत्वपूर्ण संवेदनशील प्रकरण में अप्रत्याशित देरी हुई।