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कुनबे पर टूटा आग का कहर
ब्यूरो अमर उजाला/ देवरिया
Updated Sat, 23 Apr 2016 11:58 PM IST
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फत्तेपुर के भटौली टोले पर लगी आग में जलकर राख हुआ गृहस्थी का सामान और जले घर में बैठा पीड़ित परिवार
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मदनपुर के फत्तेपुर के भटौली टोले पर शनिवार की रात आग ने एक तंगहाल परिवार को लाचार बना दिया। खाना बनाते समय भड़की चिंगारी ने ऊषा देवी की पाई-पाई जोड़कर बनाई गई गृहस्थी को एक बार फिर बर्बाद कर दिया। आग में घर गृहस्थी के सामान, अनाज के साथ वह दस हजार रुपये भी जल गए जो उसने एक दिन पहले अपनी बहन से उधार लेकर बंधक पड़ी जमीन को छुड़ाने के लिए रखा था।
भटौली टोले के रहने वाली ऊषा देवी अपने तीन नाबालिग बच्चों को मेहनत मजदूरी कर पिछले दस साल से पाल रहीं हैं। कमाने गए पति ने दस साल से परिवार की कोई सुधि नहीं ली। पति के वेवफा हो जाने का ऊषा को कोई मलाल नहीं रहा। उसने बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी संभाल ली। मेहनत मजदूरी कर गांव के बाहर छप्पर का घर बना लिया। जिंदगी को सवारने में कुछ जमीने गिरवी रखनी पड़ीं।
पति के उसके हाल पर छोड़ने बाद भी अपने दम पर परिवार चला रही महिला ने बहन से कर्जा लेकर बंधक पड़ी जमीन को छुड़ाना चाहती थी। लेकिन आग ने उसे फिर उसी मुहाने पर ला दिया जहां वह दस साल पहले खड़ी थी। चूल्हें से निकली आग इतनी भयावह हो गई कि उसके आंख के सामने पूरी मकान जल गया। आंख के सामने अरमानों को राख होता देख वह अपनी किस्मत को कोसती रह गई।
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ऊषा ने कहा कि पति के साथ नहीं देने के बाद अब जिंदगी पटरी पर लौट रही थी। बहन से कर्ज लेकर अपनी जमीन छुड़ाना चाहती थी। उसने अपनी जमीन पर खेती करने को सोचा था। लेकिन नियति ने अभी उसकी किस्मत में सघर्ष लिखा है। इस घटना के बाद पूरा गांव उसके दरवाजे पर पहुंच कर संवेदना प्रकट करने पहुंचा। उसके तीन नाबालिग बच्चे जले मकान को देखकर कर बिलख रहे थे।
आग ने इस परिवार के सर के उपर से छत और मुंह का निवाला एक साथ छीन लिया। जिला पंचायत सदस्य प्रेम यादव ने महिला को आर्थिक सहयोग देकर घर मकान बनाने में सहयोग देने का भरोसा दिलाया।
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भटौली टोले के रहने वाली ऊषा देवी अपने तीन नाबालिग बच्चों को मेहनत मजदूरी कर पिछले दस साल से पाल रहीं हैं। कमाने गए पति ने दस साल से परिवार की कोई सुधि नहीं ली। पति के वेवफा हो जाने का ऊषा को कोई मलाल नहीं रहा। उसने बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी संभाल ली। मेहनत मजदूरी कर गांव के बाहर छप्पर का घर बना लिया। जिंदगी को सवारने में कुछ जमीने गिरवी रखनी पड़ीं।
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पति के उसके हाल पर छोड़ने बाद भी अपने दम पर परिवार चला रही महिला ने बहन से कर्जा लेकर बंधक पड़ी जमीन को छुड़ाना चाहती थी। लेकिन आग ने उसे फिर उसी मुहाने पर ला दिया जहां वह दस साल पहले खड़ी थी। चूल्हें से निकली आग इतनी भयावह हो गई कि उसके आंख के सामने पूरी मकान जल गया। आंख के सामने अरमानों को राख होता देख वह अपनी किस्मत को कोसती रह गई।
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ऊषा ने कहा कि पति के साथ नहीं देने के बाद अब जिंदगी पटरी पर लौट रही थी। बहन से कर्ज लेकर अपनी जमीन छुड़ाना चाहती थी। उसने अपनी जमीन पर खेती करने को सोचा था। लेकिन नियति ने अभी उसकी किस्मत में सघर्ष लिखा है। इस घटना के बाद पूरा गांव उसके दरवाजे पर पहुंच कर संवेदना प्रकट करने पहुंचा। उसके तीन नाबालिग बच्चे जले मकान को देखकर कर बिलख रहे थे।
आग ने इस परिवार के सर के उपर से छत और मुंह का निवाला एक साथ छीन लिया। जिला पंचायत सदस्य प्रेम यादव ने महिला को आर्थिक सहयोग देकर घर मकान बनाने में सहयोग देने का भरोसा दिलाया।