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अफसर रहे मेहरबान, गिरिजा को कई सम्मान

Mon, 06 Aug 2018 11:55 PM IST
Updated Mon, 06 Aug 2018 11:55 PM IST
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अफसर रहे मेहरबान, गिरिजा को कई सम्मान
पति के साथ्ा गििरिजा - फोटो : अमर उजाला
देवरिया। संस्था संचालिका गिरिजा त्रिपाठी हमेशा से अफसरों की करीबी रही। जिले में पदस्थ कई अफसरों से नजदीकी जगजाहिर है। कई डीएम-एसपी तो संस्था पर इस कदर मेहरबान हुए कि नारी संरक्षण के क्षेत्र में काम करने के बदले कई अहम सम्मान भी दिलाए। अब इसे इन संबंधों का लाभ ही कहा जा रहा कि चंद वर्षों में ही गिरिजा त्रिपाठी की संपत्ति कई गुना बढ़ गई। गिरिजा के संबंधों का पुलिस को भली-भांति आभास था। यही कारण रहा कि छापामारी के तत्काल बाद देर रात ही आनन-फानन में एसपी को प्रेस कांफ्रेंस बुलानी पड़ी। एसपी ने संपत्ति की भी जांच कराने की बात कही है।
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मूल रूप से नूनखार गांव निवासी मोहन त्रिपाठी भटनी चीनी मिल में काम करते थे। करीब ढाई दशक पूर्व इनकी पत्नी गिरजा त्रिपाठी ने मां विंध्यवासिनी संस्था की स्थापना की, जिसके अंतर्गत बाद में बालगृह बालिका, बाल शिशु गृह सहित अन्य आश्रय गृह खुले। रविवार की कार्रवाई से पहले लोग उन्हें बच्चों के संरक्षण और नारी अधिकारों के लिए संघर्ष के रूप में ही पहचानते रहे, मगर अब नया चेहरा उजागर होने से लोग भौचक हैं। बालिका गृह संचालिका के नाते गिरिजा त्रिपाठी को विभिन्न कार्यक्रमों में अफसरों ने सम्मानित किया।
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पुलिस लाइन में तत्कालीन एसपी व बस्ती के डीआईजी राकेश शंकर के कार्यकाल में महिला ऐच्छिक ब्यूरो में गिरिजा त्रिपाठी को बड़ी भूमिका दी गई, लेकिन रोहन पी कनय के एसपी बनने के बाद उनकी दखलअंदाजी कम हो गई। बीते चार-पांच वर्षों में गिरिजा व मोहन त्रिपाठी जमीन खरीदकर भवन का निर्माण कराया है। गिरिजा का बेटा परिषदीय स्कूल में शिक्षक है और इनकी बेटी नारी संरक्षण गृह में ही काम करती है। देह व्यापार का भंडाफोड़ होने के बाद गिरिजा की बेटी फरार है।
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