{"_id":"5b6c77734f1c1b096a8b610b","slug":"41533835123-deoria-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"लड़कियों को बालगृह में छोडने वाले पुलिस अफसरों की तैयार हो रही सूची","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
लड़कियों को बालगृह में छोडने वाले पुलिस अफसरों की तैयार हो रही सूची
Updated Thu, 09 Aug 2018 10:48 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रजिस्टर में दर्ज पुलिस अफसरों की तैयार हो रही सूची
सितंबर में डीएम की हिदायत के बाद रखी गई थीं 77 लड़कियां
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। संस्था की मान्यता खत्म होने के बाद भी लड़कियों को वहां रखना पुलिस अफसरों को भारी पड़ सकता है। शासन के निर्देश के बाद ऐसे पुलिसकर्मियों की सूची तैयार होने लगी है, जिनके नाम संस्था के रजिस्टर में दर्ज हैं। फिलहाल एडीजी की निगरानी में इसकी जांच चल रही है। सीबीआई की जांच में भी यह अहम कड़ी होगी। सूची में कई थानाध्यक्षों के नाम शामिल हैं तो संबंधित मुकदमों के विवेचक भी चिह्नित किए जा रहे हैं।
जून 2017 में संस्था की मान्यता स्थगित होने के बाद शासन के निर्देश पर तत्कालीन डीएम सुजीत कुमार ने 19 सितंबर 2017 को एसपी को पत्र लिखकर स्पष्ट निर्देश दिए थे कि किसी थाने में पकड़ी गई लड़की को इस संस्था में न रखा जाए। इस आदेश के बावजूद विभिन्न थानाक्षेत्रों से पकड़ी गई गुमशुदा और घर से भागी 77 लड़कियों को इसी बालगृह बालिका में शरण दिलाई गई थी। आगंतुक रजिस्टर में इन पुलिसकर्मियों के नाम, पदनाम, बैच नंबर सब अंकित हैं। छह अगस्त को बालगृह के निरीक्षण में यह सभी रजिस्टर सील किए गए हैं। बता दें कि ‘अमर उजाला’ ने सात अगस्त के अंक में ‘जब पुलिस जानती थी तो क्यों भेजती थी लड़कियां’ शीर्षक के साथ प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद से शासन ने इसी बिंदु पर जांच कराने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने भी इसे संज्ञान में लिया है। सीबीआई जांच में इस तथ्य को बेहद अहम माना जा रहा है। इसी आधार पर ही सभी पुलिसकर्मियों की सूची तैयार होने लगी है। माना जा रहा है कि पुलिस विभाग के दर्जनों अफसरों व कर्मियों पर शिकंजा कसेगा। इसमेें कई मौजूदा और पूर्व थानाध्यक्ष भी शामिल हैं।
विज्ञापन
सितंबर में डीएम की हिदायत के बाद रखी गई थीं 77 लड़कियां
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। संस्था की मान्यता खत्म होने के बाद भी लड़कियों को वहां रखना पुलिस अफसरों को भारी पड़ सकता है। शासन के निर्देश के बाद ऐसे पुलिसकर्मियों की सूची तैयार होने लगी है, जिनके नाम संस्था के रजिस्टर में दर्ज हैं। फिलहाल एडीजी की निगरानी में इसकी जांच चल रही है। सीबीआई की जांच में भी यह अहम कड़ी होगी। सूची में कई थानाध्यक्षों के नाम शामिल हैं तो संबंधित मुकदमों के विवेचक भी चिह्नित किए जा रहे हैं।
जून 2017 में संस्था की मान्यता स्थगित होने के बाद शासन के निर्देश पर तत्कालीन डीएम सुजीत कुमार ने 19 सितंबर 2017 को एसपी को पत्र लिखकर स्पष्ट निर्देश दिए थे कि किसी थाने में पकड़ी गई लड़की को इस संस्था में न रखा जाए। इस आदेश के बावजूद विभिन्न थानाक्षेत्रों से पकड़ी गई गुमशुदा और घर से भागी 77 लड़कियों को इसी बालगृह बालिका में शरण दिलाई गई थी। आगंतुक रजिस्टर में इन पुलिसकर्मियों के नाम, पदनाम, बैच नंबर सब अंकित हैं। छह अगस्त को बालगृह के निरीक्षण में यह सभी रजिस्टर सील किए गए हैं। बता दें कि ‘अमर उजाला’ ने सात अगस्त के अंक में ‘जब पुलिस जानती थी तो क्यों भेजती थी लड़कियां’ शीर्षक के साथ प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद से शासन ने इसी बिंदु पर जांच कराने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने भी इसे संज्ञान में लिया है। सीबीआई जांच में इस तथ्य को बेहद अहम माना जा रहा है। इसी आधार पर ही सभी पुलिसकर्मियों की सूची तैयार होने लगी है। माना जा रहा है कि पुलिस विभाग के दर्जनों अफसरों व कर्मियों पर शिकंजा कसेगा। इसमेें कई मौजूदा और पूर्व थानाध्यक्ष भी शामिल हैं।
विज्ञापन