फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Deoria News ›   अब विवेचना से दूर रहना चाहते हैं अफसर

अब विवेचना से दूर रहना चाहते हैं अफसर

Sat, 11 Aug 2018 10:51 PM IST
Updated Sat, 11 Aug 2018 10:51 PM IST
विज्ञापन
अब विवेचना से दूर रहना चाहते हैं अफसर
रेलवे स्टेशन रोड स्थित बाल गृह बालिका के बगल में स्थित एक दुकानदार से पुछताछ करती एसआईटी टीम। - फोटो : अमर उजाला
देवरिया। बालगृह कांड की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के बाद स्थानीय पुलिस में खलबली मची हुई है। भय इस कदर है कि हर पुलिसकर्मी मामले से खुद को दूर रखना चाह रहा है। यही कारण है कि विवेचना को अपने स्तर से लंबित किया जा रहा है, ताकि सीबीआई खुद मामले को हैंडल करे। कोर्ट में बयान के अवलोकन की अर्जी नहीं देने के बाद यह कयास तेज हो गए हैं।
विज्ञापन

बालगृह बालिका से मुक्त कराई गई 23 लड़कियों का पुलिस और एसडीएम ने बयान लिया है। काउंसिलिंग के बाद कोर्ट में मजिस्ट्रेट के समक्ष भी अलग से बयान दर्ज किया गया है। मुकदमे की प्रक्रिया के दौरान कोर्ट में हुआ बयान ही सबसे अहम होगा। विवेचना को दिशा देने में भी इस बयान की अहम भूमिका मानी जा रही है। लिहाजा विवेचक को इसका अवलोकन जरूरी है। बयान दर्ज होने के अगले ही दिन विवेचक के अवलोकन की चर्चा थी। इसके लिए अर्जी भी तैयार कर ली गई थी, मगर ऐन वक्त पर इसे दाखिल नहीं किया गया है। अब शनिवार और रविवार की छुट्टी के बाद सोमवार को कोर्ट खुलेगा। पूरी संभावना है कि इस बीच सीबीआई जांच का जिम्मा संभाल लेगी। सूत्रों की मानें तो कहानी उल्टी पड़ती देख पुलिस चाहती है कि वह विवेचना से दूर रहे। सीबीआई खुद इसकी पड़ताल करे, ताकि उनकी जांच अधिकारी की गर्दन बची रहे।
विज्ञापन





सीडब्ल्यूसी के रिकॉर्ड में काफी खामियां
किसी भी गुमशुदा या निराश्रित बच्चे को बालगृह में रखने से पहले बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य है। इस नियमों को दरकिनार कर पुलिस ने तमाम लड़कियों को बालगृह बालिका में शरण दिलाई थी। एसआईटी ने इससे जुड़े रिकॉर्ड तलब किए हैं। शनिवार को यह अभिलेख ढूंढने में जिम्मेदार हलकान रहे। बताते हैं कि सीडब्ल्यूसी के रजिस्टर में रिकॉर्ड ही दुरुस्त नहीं हैं। अलग-अलग स्थानों पर सूचनाएं अंकित की गई हैं। अब टीम के तलब किए जाने पर उसे दुरुस्त कर सौंपने में जिम्मेदारों को पसीना आ रहा है। डीपीओ प्रभात कुमार बार-बार सीडब्ल्यूसी के सदस्यों से मिलकर रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की दलील देते रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन



किराए के विवाद को लेकर भी हो रही जांच
भवन खाली कराने के लिए कई बार दिया गया था नोटिस
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। बालगृह बालिका कांड की जांच में भवन किराए से जुड़े विवाद के पहलू पर भी नजर रखी जा रही है। बताते हैं कि जिस भवन में बालिका गृह का संचालन हो रहा है, उसे खाली कराने के लिए ट्रस्ट काफी समय से प्रयासरत था। मगर शासन से फंड नहीं मिलने का हवाला देकर संचालिका इसे टालती रही। कई बार किराए को लेकर नोटिस भी दिया गया था।

मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं सेवा संस्थान के अंतर्गत बालगृह बालिका का संचालन स्टेशन रोड स्थित जिस भवन में होता था, वह आर्य समाज ट्रस्ट का है। ट्रस्ट ने वर्ष 2005 में भवन को आवासीय किराए और फिर वर्ष 2010 में बालगृह संचालन के लिए तीन-तीन वर्षों के अनुबंध पर दिया था। पिछले तीन वर्षों से फंड रुकने से किराए का भुगतान भी संस्था ने नहीं किया था। जिससे ट्रस्ट की ओर से संस्था को नोटिस भी दिया गया था। संचालिका ने आश्वस्त किया था कि शासन से फंड मिलते ही वह किराया दे देंगी। पिछले डेढ़ साल से सिर्फ वादा ही हो रहा था। हालांकि ट्रस्ट अध्यक्ष राजकुमार अग्रवाल ने किसी तरह के विवाद से इन्कार किया है। उन्होंने कहा कि किराया देने में जरूर देरी की जा रही थी। सवा तीन लाख बकाया था, जिसमें 50 हजार रुपये जून में दिए गए। संचालिका ने आश्वस्त किया था कि शासन से फंड मिलने पर भुगतान कर दिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed