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एसआईटी के सवालों में उलझ गए पूर्व डीपीओ

Wed, 05 Sep 2018 11:26 PM IST
Updated Wed, 05 Sep 2018 11:26 PM IST
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एसआईटी के सवालों में उलझ गए पूर्व डीपीओ
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देवरिया। बस्ती मंडल के उप मुख्य परिवीक्षा अधिकारी (डीसीपीओ) व देवरिया के पूर्व प्रोबेशन अफसर एनपी सिंह से एसआईटी ने बुधवार को पूछताछ की। शिशु गृह और विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण इकाई की मान्यता से जुड़े कई सवालों का जवाब देने में अफसर उलझ गए। इनके ही कार्यकाल में मानक को दरकिनार कर मान्यता दी गई थी।
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जिले में लंबे समय तक प्रोबेशन अधिकारी रहे एनपी सिंह इन दिनों बस्ती मंडल में उप मुख्य परिवीक्षा अधिकारी के पद पर तैनात हैं। देवरिया में अपने कार्यकाल के दौरान जिस भवन में बालिका गृह चल रहा था, उसी भवन में शिशु गृह और विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण इकाई की मान्यता मानक वर्ष 2016-17 में दी गई थी। इसके लिए न तो विज्ञापन निकाला गया और न ही जिला बाल संरक्षण गृह की बैठक में प्रस्ताव पास हुआ था। जिससे मामले की जांच कर रही एसआईटी ने नोटिस देकर बुधवार को उन्हें बुलाया और बयान दर्ज किया।
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एसआईटी ने उनसे पूछा कि बालगृह बालिका के खिलाफ कार्रवाई के लिए क्या कदम उठाए और एक ही भवन मेें कैसे शिशु गृह व विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण इकाई की मान्यता दे दी गई। इस पर उन्होंने बालगृह बालिका के खिलाफ कार्रवाई के लिए डीएम और एसपी से पत्राचार करने की बात कही, जबकि एसआईटी के पास मौजूद अभिलेखों में उनकी तरफ से किए गए पत्राचार की कॉपी नहीं थी। एनपी सिंह ने बाद में बताया कि एसआईटी को लिखित रूप से बयान दिया है।
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वहीं शनिवार और रविवार को वर्तमान प्रोबेशन अधिकारी प्रभात कुमार ने जुलाई में बालिका गृह का निरीक्षण कर एसपी को भेजे गए पत्र में मानव तस्करी करने का आरोप संचालिका पर लगाते हुए मार्गदर्शन मांगने की बात कही थी। इस पर एसआईटी ने उनसे मानव तस्करी से जुड़े साक्ष्य मांगे थे, जिसे तीन दिन बाद भी उन्होंने जांच टीम को उपलब्ध नहीं कराए हैं।


जिले से कार्यमुक्त होना चाह रहे हैं डीपीओ
बालगृह बालिका का मामला उजागर होने के बाद जिला प्रोबेशन अधिकारी प्रभात कुमार जिले से कार्यमुक्त होने के लिए परेशान हैं। बार-बार डीएम दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन शासन मामले की पूरी जांच होने तक उन्हें किसी भी हाल में रिलीव करने के मूड में नहीं हैं। मई में प्रभात कुमार जिले में आए थे। जून में उनका स्थानांतरण श्रावस्ती के लिए हो गया, मगर वह नई तैनाती स्थल पर नहीं गए। इस बीच बालिका गृह कांड उजागर होने के बाद वह यहां से कार्यमुक्त होने के लिए काफी प्रयास कर रहे हैं। डीएम अमित किशोर ने बताया कि जांच टीम जिले में जमी है। कब क्या जरूरत पड़ जाए, ऐसी स्थिति में रिलीव करना संभव नहीं है।
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