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व्यापारी से 1.20 लाख की ठगी, ठग सामान लेकर भागा

Fri, 04 Jan 2019 10:47 PM IST
Harishankar Tiwari हरिशंकर तिवारी
Updated Fri, 04 Jan 2019 10:47 PM IST
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व्यापारी से 1.20 लाख की ठगी, ठग सामान लेकर भागा
यूपी पुलिस - फोटो : प्रतीकात्मक चित्र
देवरिया। शहर के व्यापारी से एक जालसाज 1.20 लाख रुपये का सामान लेकर चंपत हो गया। फर्जी चेक मिलने के बाद जब बैंक से भुगतान नहीं हुआ तो व्यापारी ने जालसाज के दिए नंबर पर संपर्क साधा तो वह बंद मिला। व्यापारी ने पुलिस को मोबाइल नंबर और वीडियो फुटेज के साथ तहरीर दी है।
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शहर के इंदिरानगर निवासी व अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के कोषाध्यक्ष शरद अग्रवाल अपने मकान में अंबे एसोसिएट्स के नाम से फर्म चलाते हैं। पुलिस को दी गई तहरीर में उन्होंने कहा कि 23 दिसंबर को कृष्णा गोयल नाम का व्यक्ति उनके पास आया और करीब 1.20 लाख रुपये का माल लिया। इस माल को नवीन फलमंडी के पास भेजने को कहा और वहीं पर नकद भुगतान करने की भी बात कही। माल लेकर जब उनका स्टॉफ वहां पहुंचा तो उसने बैंक में हड़ताल व बंदी की दिक्कत बताकर चेक से भुगतान लेने को कहा। यह भी कहा कि कल नकद भुगतान कर चेक मंगा लेंगे। अगले दिन सोमवार को जब उसके मोबाइल पर लगातार संपर्क किया गया तो उससे संपर्क नहीं हो पाया। इसके बाद चेकबुक जारी करने वाले शाखा प्रबंधक और गोदाम मालिक से संपर्क करने पर पता चला कि उस व्यक्ति ने उनके साथ धोखाधड़ी की है। इस बाबत कोतवाल विजय नारायण ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।
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बैंक ने बिना वेरीफाई किए दे दिया चेक
मामले में भटवलिया स्थित एक्सिस बैंक की भी लापरवाही सामने आई हैं। जालसाज ने बसियवां निवासी अंडा विक्रेता कृष्णा चौहान को नौकरी दिलाने का लालच देकर उसका खाता यहां खुलवा दिया था। बैंक ने उसके प्रमाण पत्रों को बिना वेरीफाई किए ही उसे वेलकम किट के जरिए एटीएम, चेक बुक दे दिया। खाते का संचालन शुरू हुए बिना ही जालसाज ने अंडे वाले से चेकबुक लेकर उसे ही काटकर सामान देने वाले व्यापारी को दे दिया। बैंक के शाखा प्रबंधक राजीव रंजन ने बताया कि नए खाता खोलने वाले को इंस्टा किट के जरिए एटीएम व चेकबुक उपलब्ध कराया जाता है। डाक्यूमेंट्स जांच करने और फील्ड वेरीफिकेशन के बाद ही एटीएम और चेक को एक्टिवेट किया जाता है। ऐसा नहीं होने पर यह दोनों बेकार हो जाते हैं। इस मामले में भी बैंक ने जिसके नाम से खाता है, उसके पते पर जाकर जांच की। वहां पर संबंधित व्यक्ति किराए पर रहता है। इसके बाद उस खाते को निगेटिव लिस्ट में डाल दिया गया और खाते के संचालन पर रोक लगा दी गई।
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