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मुलाकात के लिए बस 30 मिनट तो तीन घंटे जेल में कैसे था मोहित
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मुलाकात के लिए बस 30 मिनट तो तीन घंटे जेल में कैसे था मोहित
रिकार्ड में तीन घंटे उपस्थिति के बाद जेल प्रशासन सवालों के घेरे में
समय सीमा बीतने के बाद भी जेल के अफसरों ने न बाहर किया और न कारण जाना
मनीष जायसवाल
देवरिया। माफिया अतीक अहमद के आगे जेल प्रशासन पूरी तरह नतमस्तक रहा है। जेल के रिकार्ड और सीसीटीवी फुटेज खुद इसकी गवाही कर रहे हैं। आम मुलाकातियों को महज आधे घंटे में ही जेल के बाहर कर देने वाले अफसर अतीक के मामले में चुप्पी साध लेते थे। जेल मेें इंट्री होने के बाद मुलाकाती तभी बाहर जाते थे, जब अतीक की मर्जी होती थी। फिर चाहे घंटों ही क्यों न बीत जाएं। 26 दिसंबर को मोहित भी तीन घंटे तक जेल के अंदर रहा। मुलाकात की अधिकतम समय सीमा बीतने के बाद भी जेल प्रशासन ने न उसे बाहर करने की जरूरत समझी और न ही इतने समय तक अंदर रहने पर कोई पूछताछ या जानकारी ली। प्रभारी डीआईजी और गोरखपुर के वरिष्ठ जेल अधीक्षक रामधनी की जांच में भी यह बात सामने आ चुकी है। अब मामला सुर्खियों में आने के बाद अफसर मुंह खोलने से कतरा रहे हैं।
लखनऊ के गोमतीनगर के रियल एस्टेट कारोबारी मोहित जायसवाल ने 29 दिसंबर को कृष्णानगर थाने में दर्ज कराई एफआईआर में कहा है कि 26 दिसंबर को अतीक के गुर्गे उसे अगवा कर देवरिया जेल ले गए। यहां उसकी पिटाई की गई और फिर प्रापर्टी के कागजात पर जबरन दस्तखत कराए गए। जेल प्रशासन भी मोहित के जेल में दाखिल होने की पुष्टि कर चुका है। सूत्रों के अनुसार मोहित करीब तीन घंटे तक जिला जेल में रहा है। जेल नियमों की मानें तो कोई भी मुलाकाती अधिकतम आधे घंटे तक ही बंदी या कैदी से मिल सकता है। विशेष परिस्थिति में उसे कुछ अतिरिक्त समय के लिए छूट दी जा सकती है, पर अतीक के मामले में सारे नियम ताक पर रख दिए गए थे। अव्वल तो कई मुलाकातियों की जेल के रजिस्टर में इंट्री भी नहीं की जाती थी और अगर इंट्री हुई भी तो उसके बाहर निकलने की कोई तय सीमा नहीं होती थी। भेंट पूरी होने और पूर्व सांसद की सहमति के बाद ही वह जेल से बाहर आता था। इस दौरान जेल प्रशासन के लोग यह पूछने की जहमत भी नहीं उठाते थे कि आखिर इतनी देर तक जेल में वह क्या कर रहा था। इस बाबत जेल अधीक्षक दिलीप कुमार पांडेय का कहना था कि मुलाकात के लिए आधे घंटे की समय सीमा नियत है। इसके बाद मुलाकातियों को बाहर कर दिया जाता है। विशेष परिस्थिति में ही उसे अतिरिक्त समय दिया जाता है। हालांकि वह नहीं बता सके कि मोहित के मामले में ऐसी कौन सी परिस्थिति थी, जो उसे तीन घंटे तक अतीक से मिलने की अनुमति दे दी गई।
जिले में थे सीएम, फिर भी हो गई घटना
26 दिसंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राजकीय मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास करने जिले में आए थे। इस दौरान उनकी सुरक्षा को लेकर पूरे जिले में अलर्ट था। चप्पे-चप्पे पर फोर्स मुस्तैद थी। पुलिस प्रशासन का पूरा ध्यान सीएम की सुरक्षा में था। ऐसे वक्त में लखनऊ से रियल एस्टेट कारोबारी का अपहरण कर देवरिया जेल लाया जाना और फिर पिटाई कर छोड़ देना, बड़ी लापरवाही को दर्शा रहा है। लोगों का कहना है कि जब सीएम के जिले में रहने के दौरान हाई अलर्ट समय में ऐसी घटना हो सकती है तो फिर सामान्य दिनों में क्या होगा।
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रिकार्ड में तीन घंटे उपस्थिति के बाद जेल प्रशासन सवालों के घेरे में
समय सीमा बीतने के बाद भी जेल के अफसरों ने न बाहर किया और न कारण जाना
मनीष जायसवाल
देवरिया। माफिया अतीक अहमद के आगे जेल प्रशासन पूरी तरह नतमस्तक रहा है। जेल के रिकार्ड और सीसीटीवी फुटेज खुद इसकी गवाही कर रहे हैं। आम मुलाकातियों को महज आधे घंटे में ही जेल के बाहर कर देने वाले अफसर अतीक के मामले में चुप्पी साध लेते थे। जेल मेें इंट्री होने के बाद मुलाकाती तभी बाहर जाते थे, जब अतीक की मर्जी होती थी। फिर चाहे घंटों ही क्यों न बीत जाएं। 26 दिसंबर को मोहित भी तीन घंटे तक जेल के अंदर रहा। मुलाकात की अधिकतम समय सीमा बीतने के बाद भी जेल प्रशासन ने न उसे बाहर करने की जरूरत समझी और न ही इतने समय तक अंदर रहने पर कोई पूछताछ या जानकारी ली। प्रभारी डीआईजी और गोरखपुर के वरिष्ठ जेल अधीक्षक रामधनी की जांच में भी यह बात सामने आ चुकी है। अब मामला सुर्खियों में आने के बाद अफसर मुंह खोलने से कतरा रहे हैं।
लखनऊ के गोमतीनगर के रियल एस्टेट कारोबारी मोहित जायसवाल ने 29 दिसंबर को कृष्णानगर थाने में दर्ज कराई एफआईआर में कहा है कि 26 दिसंबर को अतीक के गुर्गे उसे अगवा कर देवरिया जेल ले गए। यहां उसकी पिटाई की गई और फिर प्रापर्टी के कागजात पर जबरन दस्तखत कराए गए। जेल प्रशासन भी मोहित के जेल में दाखिल होने की पुष्टि कर चुका है। सूत्रों के अनुसार मोहित करीब तीन घंटे तक जिला जेल में रहा है। जेल नियमों की मानें तो कोई भी मुलाकाती अधिकतम आधे घंटे तक ही बंदी या कैदी से मिल सकता है। विशेष परिस्थिति में उसे कुछ अतिरिक्त समय के लिए छूट दी जा सकती है, पर अतीक के मामले में सारे नियम ताक पर रख दिए गए थे। अव्वल तो कई मुलाकातियों की जेल के रजिस्टर में इंट्री भी नहीं की जाती थी और अगर इंट्री हुई भी तो उसके बाहर निकलने की कोई तय सीमा नहीं होती थी। भेंट पूरी होने और पूर्व सांसद की सहमति के बाद ही वह जेल से बाहर आता था। इस दौरान जेल प्रशासन के लोग यह पूछने की जहमत भी नहीं उठाते थे कि आखिर इतनी देर तक जेल में वह क्या कर रहा था। इस बाबत जेल अधीक्षक दिलीप कुमार पांडेय का कहना था कि मुलाकात के लिए आधे घंटे की समय सीमा नियत है। इसके बाद मुलाकातियों को बाहर कर दिया जाता है। विशेष परिस्थिति में ही उसे अतिरिक्त समय दिया जाता है। हालांकि वह नहीं बता सके कि मोहित के मामले में ऐसी कौन सी परिस्थिति थी, जो उसे तीन घंटे तक अतीक से मिलने की अनुमति दे दी गई।
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जिले में थे सीएम, फिर भी हो गई घटना
26 दिसंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राजकीय मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास करने जिले में आए थे। इस दौरान उनकी सुरक्षा को लेकर पूरे जिले में अलर्ट था। चप्पे-चप्पे पर फोर्स मुस्तैद थी। पुलिस प्रशासन का पूरा ध्यान सीएम की सुरक्षा में था। ऐसे वक्त में लखनऊ से रियल एस्टेट कारोबारी का अपहरण कर देवरिया जेल लाया जाना और फिर पिटाई कर छोड़ देना, बड़ी लापरवाही को दर्शा रहा है। लोगों का कहना है कि जब सीएम के जिले में रहने के दौरान हाई अलर्ट समय में ऐसी घटना हो सकती है तो फिर सामान्य दिनों में क्या होगा।
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