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जिला जेल में बनेगा गौशाला, बंदी करेंगे देखभाल
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जिला जेल में बनेगी गोशाला, बंदी करेंगे देखभाल
पांच एकड़ जमीन में बनाने की है योजना
शासन ने पिछले दिनों जेल प्रशासन से मांगा था प्रस्ताव
सुनील कुमार सिंह
देवरिया। जिला जेल में गोशाला बनाने की कवायद शुरू हो गई। जेल में रह रहे बंदी गायों की देखभाल करेंगे। जेल में गोशाला होने से जहां दूध-दही आसानी से उपलब्ध होगा, वहीं बंदियों को भी गोसेवा का पुण्य हासिल हो सकेगा। पांच एकड़ भूमि में गौशाला बनाने के लिए जेल प्रशासन ने शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। अब मंजूरी मिलने का इंतजार है।
पिछले दिनों शासन की ओर से प्रदेश की सभी जेलों में गोशाला बनाने के लिए प्रस्ताव मांगा गया था। गोशाला बनाने के लिए सबसे जरूरी यह था कि जिला जेल में कम से कम पांच एकड़ खाली जमीन उपलब्ध हो। जेल अधीक्षक दिलीप कुमार पांडेय ने जेल में पांच एकड़ जमीन की उपलब्धता बताते हुए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया है। अब यदि शासन से स्वीकृति मिली तो जिला जेल में गोशाला बन जाएगा। यहां रखे जाने वाले जानवरों की देखभाल बंदियों को ही करना है।
इनसेट में-
जेल में खर्च होगा गोशाला का दूध
देवरिया। गोशाला बनने के बाद जेल प्रशासन को बाहर से दूध नहीं खरीदना पड़ेगा। गोशाला में जितना भी दूध होगा, वह जेल के बंदियों के ही काम आएगा। महिलाओं के साथ बंद उनके बच्चों को भी यही दूध दिया जाएगा। इसके बाद यदि दूध अधिक होगा तो उसे बाजार में बेचा जाएगा।
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इनसेट में-
जैविक खाद के रूप में प्रयोग होगा गोबर
देवरिया। गोशाला में रखे जाने वाले जानवरों से होने वाला गोबर जेल के खेतों में जैविक खाद का काम करेगा। गोबर को इकट्ठा रखा जाएगा। इसे आलू, प्याज, गेहूं और धान के खेत में डाला जाएगा। इसके चलते बाहर से खरीदी जाने वाली खाद पर खर्च नहीं करना पड़ेगा।
कोट्
जिला जेल में गोशाला बनाने के लिए शासन ने प्रस्ताव मांगा था। जेल में पांच एकड़ जमीन उपलब्ध है। प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया गया है। वहां से अनुमति मिलने पर गोशाला बनेगी। इससे बंदियों और जेल को लाभ होगा।
-दिलीप कुमार पांडेय, जेल अधीक्षक।
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पांच एकड़ जमीन में बनाने की है योजना
शासन ने पिछले दिनों जेल प्रशासन से मांगा था प्रस्ताव
सुनील कुमार सिंह
देवरिया। जिला जेल में गोशाला बनाने की कवायद शुरू हो गई। जेल में रह रहे बंदी गायों की देखभाल करेंगे। जेल में गोशाला होने से जहां दूध-दही आसानी से उपलब्ध होगा, वहीं बंदियों को भी गोसेवा का पुण्य हासिल हो सकेगा। पांच एकड़ भूमि में गौशाला बनाने के लिए जेल प्रशासन ने शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। अब मंजूरी मिलने का इंतजार है।
पिछले दिनों शासन की ओर से प्रदेश की सभी जेलों में गोशाला बनाने के लिए प्रस्ताव मांगा गया था। गोशाला बनाने के लिए सबसे जरूरी यह था कि जिला जेल में कम से कम पांच एकड़ खाली जमीन उपलब्ध हो। जेल अधीक्षक दिलीप कुमार पांडेय ने जेल में पांच एकड़ जमीन की उपलब्धता बताते हुए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया है। अब यदि शासन से स्वीकृति मिली तो जिला जेल में गोशाला बन जाएगा। यहां रखे जाने वाले जानवरों की देखभाल बंदियों को ही करना है।
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जेल में खर्च होगा गोशाला का दूध
देवरिया। गोशाला बनने के बाद जेल प्रशासन को बाहर से दूध नहीं खरीदना पड़ेगा। गोशाला में जितना भी दूध होगा, वह जेल के बंदियों के ही काम आएगा। महिलाओं के साथ बंद उनके बच्चों को भी यही दूध दिया जाएगा। इसके बाद यदि दूध अधिक होगा तो उसे बाजार में बेचा जाएगा।
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जैविक खाद के रूप में प्रयोग होगा गोबर
देवरिया। गोशाला में रखे जाने वाले जानवरों से होने वाला गोबर जेल के खेतों में जैविक खाद का काम करेगा। गोबर को इकट्ठा रखा जाएगा। इसे आलू, प्याज, गेहूं और धान के खेत में डाला जाएगा। इसके चलते बाहर से खरीदी जाने वाली खाद पर खर्च नहीं करना पड़ेगा।
कोट्
जिला जेल में गोशाला बनाने के लिए शासन ने प्रस्ताव मांगा था। जेल में पांच एकड़ जमीन उपलब्ध है। प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया गया है। वहां से अनुमति मिलने पर गोशाला बनेगी। इससे बंदियों और जेल को लाभ होगा।
-दिलीप कुमार पांडेय, जेल अधीक्षक।