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Deoria News: जमीन बेदखली मामले में अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा
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वाद स्वीकार होगा या निरस्त फैसला मंगलवार को कर सकती है अदालत
फतेहपुर सामूहिक हत्याकांड : प्रेमचंद यादव के मकान के सरकारी जमीन पर बने होने का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। फतेहपुर गांव के लेड़हा टोला में सामूहिक हत्याकांड के बाद सरकारी जमीन से बेदखली मामले में दायर निगरानी वाद पर शनिवार को जिला मजिस्ट्रेट की अदालत सुनवाई हुई। दोनों पक्षों के वकीलों की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। वाद स्वीकार होगा या निरस्त होगा, इस पर फैसला अदालत मंगलवार को कर सकती है।
रुद्रपुर कोतवाली के फतेहपुर गांव के लेड़हा टोला में दो अक्तूबर को भूमि विवाद में छह लोगों की हत्या हो गई थी। एक पक्ष के पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रेमचंद यादव की हत्या के बाद भीड़ ने सत्यप्रकाश दुबे के परिवार पर हमला करके पांच लोगों को मार डाला था। इसके बाद सामने आया था कि प्रेमचंद यादव और अन्य आरोपियों के मकान सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बने हैं।
चार अक्तूबर को रुद्रपुर तहसील के न्यायिक एसडीएम के नेतृत्व में राजस्व टीम ने प्रेमचंद यादव के मकान समेत आसपास की जमीनों की पैमाइश की। इसमें तीन आरोपियों का कब्जा खलिहान की जमीन पर पाया गया। इसके बाद रूद्रपुर तहसीलदार कोर्ट में सरकारी जमीन से बेदखली के लिए वाद दाखिल किया गया। छह अक्तूबर को प्रेमचंद के पिता रामभवन यादव के साथ ही गोरख यादव, परमहंस यादव को नोटिस जारी करके पक्ष रखने का आदेश दिया गया।
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प्रेमचंद के पिता के वकील ने पहली बार हुई पैमाइश पर सवाल खड़ा करते हुए गलत बताया था। नौ अक्तूबर को रूद्रपुर तहसीलदार कोर्ट के आदेश पर 15 सदस्यीय राजस्व विभाग की टीम ने दूसरी बार भूमि की पैमाइश की। इस बार भी प्रेमचंद के पिता रामभवन, गोरख यादव और परमहंस का मकान खलिहान की जमीन पर बना पाया गया।
राजस्व विभाग की टीम ने अपनी रिपोर्ट रुद्रपुर के तहसीलदार कोर्ट में पेश कर दी। 16 अक्तूबर को रुद्रपुर के तहसीलदार अरुण कुमार ने सरकारी जमीन से बेदखली का आदेश दिया। तहसीलदार के आदेश के विरोध में प्रेमचंद यादव के पिता समेत तीनों लोग हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट ने बेदखली की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए जिला मजिस्ट्रेट को तय समय में सुनवाई का निर्देश दिया था।
इसके बाद प्रेमचंद के पिता रामभवन के अधिवक्ता गोपी यादव ने जिला मजिस्ट्रेट कोर्ट में अपील दाखिल की। शनिवार को जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व नवनीत मालवीय और दूसरे पक्ष के अधिवक्ता गोपी यादव के तर्कों को सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित कर लिया है।
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फतेहपुर सामूहिक हत्याकांड : प्रेमचंद यादव के मकान के सरकारी जमीन पर बने होने का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। फतेहपुर गांव के लेड़हा टोला में सामूहिक हत्याकांड के बाद सरकारी जमीन से बेदखली मामले में दायर निगरानी वाद पर शनिवार को जिला मजिस्ट्रेट की अदालत सुनवाई हुई। दोनों पक्षों के वकीलों की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। वाद स्वीकार होगा या निरस्त होगा, इस पर फैसला अदालत मंगलवार को कर सकती है।
रुद्रपुर कोतवाली के फतेहपुर गांव के लेड़हा टोला में दो अक्तूबर को भूमि विवाद में छह लोगों की हत्या हो गई थी। एक पक्ष के पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रेमचंद यादव की हत्या के बाद भीड़ ने सत्यप्रकाश दुबे के परिवार पर हमला करके पांच लोगों को मार डाला था। इसके बाद सामने आया था कि प्रेमचंद यादव और अन्य आरोपियों के मकान सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बने हैं।
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चार अक्तूबर को रुद्रपुर तहसील के न्यायिक एसडीएम के नेतृत्व में राजस्व टीम ने प्रेमचंद यादव के मकान समेत आसपास की जमीनों की पैमाइश की। इसमें तीन आरोपियों का कब्जा खलिहान की जमीन पर पाया गया। इसके बाद रूद्रपुर तहसीलदार कोर्ट में सरकारी जमीन से बेदखली के लिए वाद दाखिल किया गया। छह अक्तूबर को प्रेमचंद के पिता रामभवन यादव के साथ ही गोरख यादव, परमहंस यादव को नोटिस जारी करके पक्ष रखने का आदेश दिया गया।
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प्रेमचंद के पिता के वकील ने पहली बार हुई पैमाइश पर सवाल खड़ा करते हुए गलत बताया था। नौ अक्तूबर को रूद्रपुर तहसीलदार कोर्ट के आदेश पर 15 सदस्यीय राजस्व विभाग की टीम ने दूसरी बार भूमि की पैमाइश की। इस बार भी प्रेमचंद के पिता रामभवन, गोरख यादव और परमहंस का मकान खलिहान की जमीन पर बना पाया गया।
राजस्व विभाग की टीम ने अपनी रिपोर्ट रुद्रपुर के तहसीलदार कोर्ट में पेश कर दी। 16 अक्तूबर को रुद्रपुर के तहसीलदार अरुण कुमार ने सरकारी जमीन से बेदखली का आदेश दिया। तहसीलदार के आदेश के विरोध में प्रेमचंद यादव के पिता समेत तीनों लोग हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट ने बेदखली की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए जिला मजिस्ट्रेट को तय समय में सुनवाई का निर्देश दिया था।
इसके बाद प्रेमचंद के पिता रामभवन के अधिवक्ता गोपी यादव ने जिला मजिस्ट्रेट कोर्ट में अपील दाखिल की। शनिवार को जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व नवनीत मालवीय और दूसरे पक्ष के अधिवक्ता गोपी यादव के तर्कों को सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित कर लिया है।