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Deoria News: संविदा अवधि समाप्त होने के बाद भी ड्यूटी कर रहा था नेत्र परीक्षक
Wed, 29 Jul 2026 12:19 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Wed, 29 Jul 2026 12:19 AM IST
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तरकुलवा। स्थानीय सीएचसी में संविदा पर नियुक्त एक नेत्र परीक्षक का महिला मरीज से 100 रुपये रिश्वत लेने का वीडियो वायरल हुआ था। इस प्रकरण के सामने आने के बाद चौंकाने वाला पर्दाफाश हुआ है। दरअसल, इस कर्मी की संविदा पांच साल पहले ही खत्म हो गई थी। इसके बावजूद वह अस्पताल में काम कर रहा था। इससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। इस दौरान सीएचसी में तीन अधीक्षक आए और चले गए।
जानकारी के अनुसार, सीएचसी में वर्ष 2018 में एक एजेंसी के माध्यम से संविदा पर मनोज मद्धेशिया की नेत्र परीक्षक के पद पर तीन वर्ष के लिए तैनाती हुई थी। उसका कार्यकाल वर्ष 2021 में समाप्त हो गया। इसके बाद भी वह सीएचसी में काम करता रहा। कुछ दिन पहले वह सीएचसी पर अपने कक्ष में बैठकर कुछ महिलाओं का नेत्र परीक्षण कर रहा था। इसके बाद उसका एक महिला से 100 रुपये रिश्वत लेते वीडियो वायरल हो गया।
खबर प्रकाशित होने के बाद सीएचसी प्रभारी डॉ. बीएन भारती ने उसे तत्काल हटा दिया और उसके कक्ष में ताला लगवा दिया। इसके बाद से ही क्षेत्रीय लोगों में इस बात की चर्चा हो रही है कि संविदा समाप्त होने के बाद भी नेत्र परीक्षक किसकी सरपरस्ती में सीएचसी पर काम कर रहा था।
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सीएचसी प्रभारी डॉ. डीएन भारती ने बताया कि उन्होंने दो महीने पहले ही चार्ज लिया है। नेत्र परीक्षक मनोज मद्धेशिया का अस्पताल की उपस्थिति पंजिका पर नाम अंकित नहीं है। किसके आदेश पर वह अस्पताल में कार्य करता था, इसकी जांच कराई जा रही है।
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जांच के लिए बनाई गई तीन सदस्यीय कमेटी
प्रकरण चर्चा में आने के बाद सीएमओ डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है। सीएमओ ने बताया कि कमेट की जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
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जानकारी के अनुसार, सीएचसी में वर्ष 2018 में एक एजेंसी के माध्यम से संविदा पर मनोज मद्धेशिया की नेत्र परीक्षक के पद पर तीन वर्ष के लिए तैनाती हुई थी। उसका कार्यकाल वर्ष 2021 में समाप्त हो गया। इसके बाद भी वह सीएचसी में काम करता रहा। कुछ दिन पहले वह सीएचसी पर अपने कक्ष में बैठकर कुछ महिलाओं का नेत्र परीक्षण कर रहा था। इसके बाद उसका एक महिला से 100 रुपये रिश्वत लेते वीडियो वायरल हो गया।
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खबर प्रकाशित होने के बाद सीएचसी प्रभारी डॉ. बीएन भारती ने उसे तत्काल हटा दिया और उसके कक्ष में ताला लगवा दिया। इसके बाद से ही क्षेत्रीय लोगों में इस बात की चर्चा हो रही है कि संविदा समाप्त होने के बाद भी नेत्र परीक्षक किसकी सरपरस्ती में सीएचसी पर काम कर रहा था।
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सीएचसी प्रभारी डॉ. डीएन भारती ने बताया कि उन्होंने दो महीने पहले ही चार्ज लिया है। नेत्र परीक्षक मनोज मद्धेशिया का अस्पताल की उपस्थिति पंजिका पर नाम अंकित नहीं है। किसके आदेश पर वह अस्पताल में कार्य करता था, इसकी जांच कराई जा रही है।
जांच के लिए बनाई गई तीन सदस्यीय कमेटी
प्रकरण चर्चा में आने के बाद सीएमओ डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है। सीएमओ ने बताया कि कमेट की जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।