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पूर्व बीएसए ने अनुदानित स्कूलों की नियुक्तियों में की थी खूब मनमानी
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फर्जी शिक्षक भर्ती मामला
पूर्व बीएसए ने अनुदानित स्कूलों की नियुक्तियों में की थी मनमानी
फर्जी शिक्षकों की तैनाती के ही मामले में एडी बेसिक और बीएसए हुए थे निलंबित
शासन तक पहुंच और उच्चाधिकारियों की मेहरबानी से जिले में काफी दिनों तक जमे रहे
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। बेसिक विभाग से जिले के अनुदानित स्कूलों में शिक्षक भर्ती के मामले में जिले में लंबे समय तक रहे एक पूर्व बीएसए के कार्यकाल को आज भी खूब याद किया जाता है। उनकी मेहरबानी से ऐसे-ऐसे लोगों को शिक्षक पद पर भर्ती हुए हैं, जो वास्तव में इसके लायक नहीं थे और किसी अन्य कामकाज में लगकर अपना गुजारा कर रहे थे। लेकिन पैसे एवं प्रबंधकीय समिति और तत्कालीन अधिकारियों की कृपा पर कूटरचित प्रमाण पत्रों के आधार पर वर्तमान में भी इन स्कूलों में जमे हुए हैं। इन स्कूलों में 15 से 20 साल के दौरान तैनात हुए शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेखों का पुन: सत्यापन हो तो कई बड़े लोगों की गर्दन फंस सकती है।
एसटीएफ ने 17 फरवरी को गोरखपुर से भटनी के पुरनाछापर निवासी एवं लघु माध्यमिक विद्यालय शाहपुर पुरैनी, पथरदेवा के शिक्षक सतीश चंद्र मिश्र उर्फ राजू को हिरासत में लिया है। जिले के 72 अनुदानित स्कूलों में फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी पाए लोगों के होश उड़े हुए हैं। नौकरी पर संकट आते देखकर वह अब इसे बचाने को हर तिकड़म भिड़ाने में लग गए हैं। करीब आठ साल तक देवरिया में बीएसए रहे एक अधिकारी ने अपने कार्यकाल के दौरान अनुदानित स्कूलों में शिक्षक पदों पर हुई नियुक्तियों में जमकर खेल किया। कुछ जगहों पर तो प्रबंधकों ने निर्धारित संख्या से ज्यादा पदों पर भर्तियां कर लीं। इस अधिकारी की कृपा से इन शिक्षकों के वेतन भी जल्द ही जारी कर दिए गए। बाद में तत्कालीन मंडलायुक्त रहे पीके मोहंती की जांच रिपोर्ट के बाद शासन ने इन्हें और उस दौरान एडी बेसिक रहीं मृदुला आनंद को निलंबित भी कर दिया था। उस दौरान इन पर 17 शिक्षकों की कूटरचित ढंग से तैयार प्रमाण पत्रों पर नियुक्ति और करोड़ों रुपये के एरियर भुगतान का आरोप लगा था।
शैक्षिक अभिलेख गायब कराने को लगा रहे बीएसए दफ्तर का चक्कर
अनुदानित स्कूलों में कार्यरत फर्जी शिक्षक बीएसए कार्यालय और लेखा अनुभाग का इधर खूब चक्कर लगा रहे हैं। मकसद यह है कि कर्मचारियों की मिलीभगत से उनके संबंध में जो रिकॉर्ड यहां हैं, उसे किसी तरह से गायब करा दिया जाए, या आग के हवाले कर सबकुछ राख कर दिया जाए, ताकि जांच एजेंसी जब आए तो उसे फर्जीवाड़े के संबंध में कुछ रिकॉर्ड ही न हासिल हो।
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उपस्थिति पंजिका के साथ अन्य रिकॉर्डों को सहेज रहे हैं प्रबंधक
अनुदानित स्कूलों में फर्जीवाड़े का पर्दाफाश होने पर आजकल यहां के प्रबंधक अपने रिकॉर्डों को सहेजने में लगे हैं। कुछ जगहों पर तो स्टांप पर शिक्षकों से यह तक लिखवाया जा रहा है कि उनके प्रमाण पत्रों के संबंध में प्रबंधक दोषी नहीं हैं। इससे संबंधित कोई भी गलती पाई गई तो इसके लिए सीधे जिम्मेदार वह शिक्षक ही होगा, जिसके वह प्रमाण पत्र होंगे।
कभी स्कूल न जाने वाले शिक्षकों से बनवा रहे हाजिरी
अनुदानित स्कूलों में कार्यरत अधिकांश शिक्षक स्कूल जाना मुनासिब नहीं समझते। चौक-चौराहों पर यह हमेशा दिखते हैं। प्रबंधकीय कोटे से नियुक्ति पाने वाले ऐसे शिक्षकों को नौकरी देने के एवज में मोटी रकम कमाने वाला प्रबंध तंत्र भी मेहरबान दिखता है। इन शिक्षकों के घर तक सीधे उपस्थिति पंजिका पहुंच जाती है। वहीं, पर इनसे हस्ताक्षर बनवा लिए जाते हैं। इसे ही लेखा विभाग में दिखाकर हर माह वेतन भी जारी करा लिया जाता है।
बृहस्पतिवार की शाम बीएसए कार्यालय पहुंची थी एसटीएफ
फर्जीवाड़े की जांच को बृहस्पतिवार की शाम भी एसटीएफ के कुछ सदस्य बीएसए कार्यालय पहुंचे थे। सदस्यों ने बीएसए, लेखा सहित अनुदानित स्कूल पटल देखने वाले लिपिकों से पूछताछ की और कुछ शिक्षकों के रिकॉर्ड भी तलब किए। बीएसए पीएन श्रीवास्तव ने बताया कि जो भी सूचना या रिकॉर्ड जांच एजेंसी मांगेंगी, उसे उपलब्ध कराया जाएगा। उधर, एजेंसी के इंस्पेक्टर एसपी सिंह ने बताया कि अनुदानित स्कूलों के कुछ शिक्षकों के रिकॉर्ड लिए गए हैं। जल्द ही यहां हुए फजीवाड़े का पर्दाफाश किया जाएगा।
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पूर्व बीएसए ने अनुदानित स्कूलों की नियुक्तियों में की थी मनमानी
फर्जी शिक्षकों की तैनाती के ही मामले में एडी बेसिक और बीएसए हुए थे निलंबित
शासन तक पहुंच और उच्चाधिकारियों की मेहरबानी से जिले में काफी दिनों तक जमे रहे
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। बेसिक विभाग से जिले के अनुदानित स्कूलों में शिक्षक भर्ती के मामले में जिले में लंबे समय तक रहे एक पूर्व बीएसए के कार्यकाल को आज भी खूब याद किया जाता है। उनकी मेहरबानी से ऐसे-ऐसे लोगों को शिक्षक पद पर भर्ती हुए हैं, जो वास्तव में इसके लायक नहीं थे और किसी अन्य कामकाज में लगकर अपना गुजारा कर रहे थे। लेकिन पैसे एवं प्रबंधकीय समिति और तत्कालीन अधिकारियों की कृपा पर कूटरचित प्रमाण पत्रों के आधार पर वर्तमान में भी इन स्कूलों में जमे हुए हैं। इन स्कूलों में 15 से 20 साल के दौरान तैनात हुए शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेखों का पुन: सत्यापन हो तो कई बड़े लोगों की गर्दन फंस सकती है।
एसटीएफ ने 17 फरवरी को गोरखपुर से भटनी के पुरनाछापर निवासी एवं लघु माध्यमिक विद्यालय शाहपुर पुरैनी, पथरदेवा के शिक्षक सतीश चंद्र मिश्र उर्फ राजू को हिरासत में लिया है। जिले के 72 अनुदानित स्कूलों में फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी पाए लोगों के होश उड़े हुए हैं। नौकरी पर संकट आते देखकर वह अब इसे बचाने को हर तिकड़म भिड़ाने में लग गए हैं। करीब आठ साल तक देवरिया में बीएसए रहे एक अधिकारी ने अपने कार्यकाल के दौरान अनुदानित स्कूलों में शिक्षक पदों पर हुई नियुक्तियों में जमकर खेल किया। कुछ जगहों पर तो प्रबंधकों ने निर्धारित संख्या से ज्यादा पदों पर भर्तियां कर लीं। इस अधिकारी की कृपा से इन शिक्षकों के वेतन भी जल्द ही जारी कर दिए गए। बाद में तत्कालीन मंडलायुक्त रहे पीके मोहंती की जांच रिपोर्ट के बाद शासन ने इन्हें और उस दौरान एडी बेसिक रहीं मृदुला आनंद को निलंबित भी कर दिया था। उस दौरान इन पर 17 शिक्षकों की कूटरचित ढंग से तैयार प्रमाण पत्रों पर नियुक्ति और करोड़ों रुपये के एरियर भुगतान का आरोप लगा था।
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शैक्षिक अभिलेख गायब कराने को लगा रहे बीएसए दफ्तर का चक्कर
अनुदानित स्कूलों में कार्यरत फर्जी शिक्षक बीएसए कार्यालय और लेखा अनुभाग का इधर खूब चक्कर लगा रहे हैं। मकसद यह है कि कर्मचारियों की मिलीभगत से उनके संबंध में जो रिकॉर्ड यहां हैं, उसे किसी तरह से गायब करा दिया जाए, या आग के हवाले कर सबकुछ राख कर दिया जाए, ताकि जांच एजेंसी जब आए तो उसे फर्जीवाड़े के संबंध में कुछ रिकॉर्ड ही न हासिल हो।
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उपस्थिति पंजिका के साथ अन्य रिकॉर्डों को सहेज रहे हैं प्रबंधक
अनुदानित स्कूलों में फर्जीवाड़े का पर्दाफाश होने पर आजकल यहां के प्रबंधक अपने रिकॉर्डों को सहेजने में लगे हैं। कुछ जगहों पर तो स्टांप पर शिक्षकों से यह तक लिखवाया जा रहा है कि उनके प्रमाण पत्रों के संबंध में प्रबंधक दोषी नहीं हैं। इससे संबंधित कोई भी गलती पाई गई तो इसके लिए सीधे जिम्मेदार वह शिक्षक ही होगा, जिसके वह प्रमाण पत्र होंगे।
कभी स्कूल न जाने वाले शिक्षकों से बनवा रहे हाजिरी
अनुदानित स्कूलों में कार्यरत अधिकांश शिक्षक स्कूल जाना मुनासिब नहीं समझते। चौक-चौराहों पर यह हमेशा दिखते हैं। प्रबंधकीय कोटे से नियुक्ति पाने वाले ऐसे शिक्षकों को नौकरी देने के एवज में मोटी रकम कमाने वाला प्रबंध तंत्र भी मेहरबान दिखता है। इन शिक्षकों के घर तक सीधे उपस्थिति पंजिका पहुंच जाती है। वहीं, पर इनसे हस्ताक्षर बनवा लिए जाते हैं। इसे ही लेखा विभाग में दिखाकर हर माह वेतन भी जारी करा लिया जाता है।
बृहस्पतिवार की शाम बीएसए कार्यालय पहुंची थी एसटीएफ
फर्जीवाड़े की जांच को बृहस्पतिवार की शाम भी एसटीएफ के कुछ सदस्य बीएसए कार्यालय पहुंचे थे। सदस्यों ने बीएसए, लेखा सहित अनुदानित स्कूल पटल देखने वाले लिपिकों से पूछताछ की और कुछ शिक्षकों के रिकॉर्ड भी तलब किए। बीएसए पीएन श्रीवास्तव ने बताया कि जो भी सूचना या रिकॉर्ड जांच एजेंसी मांगेंगी, उसे उपलब्ध कराया जाएगा। उधर, एजेंसी के इंस्पेक्टर एसपी सिंह ने बताया कि अनुदानित स्कूलों के कुछ शिक्षकों के रिकॉर्ड लिए गए हैं। जल्द ही यहां हुए फजीवाड़े का पर्दाफाश किया जाएगा।