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Deoria News: गुणवत्ता की कसौटी पर पिछड़े सीएचसी पीएचसी, एक के पास भी प्रमाणपत्र नहीं
Sun, 25 Oct 2026 12:22 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 25 Oct 2026 12:22 AM IST
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देवरिया। जिले के सरकारी अस्पताल राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों की कसौटी पर पिछड़ गए हैं। किसी भी सीएचसी और पीएचसी के पास वर्तमान में राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक एनक्यूएएस का वैध प्रमाणपत्र नहीं है।
सीएचसी लार और भागलपुर को पहले यह प्रमाणपत्र मिला था मगर दोबारा आवेदन नहीं करने से इसकी वैधता समाप्त हो गई। अन्य सीएचसी-पीएचसी भी प्रमाणपत्र हासिल नहीं कर सकीं।
हालांकि, जिले के 35 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों ने यह उपलब्धि हासिल की है। इसके बावजूद 33 केंद्रों को अब तक प्रोत्साहन राशि नहीं मिल सकी है।
एनक्यूएएस के तहत सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं, इलाज, जांच, दवाओं, सफाई और अन्य व्यवस्थाओं का मूल्यांकन किया जाता है। निर्धारित मानकों पर खरा उतरने वाले अस्पतालों को राष्ट्रीय प्रमाणपत्र मिलता है।
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आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में भी प्रमाणन के प्रति उत्साह प्रभावित होने की बात सामने आ रही है। 35 केंद्रों को प्रमाणपत्र मिलने के बावजूद सिर्फ दो को प्रोत्साहन राशि मिल सकी है।
शेष 33 केंद्रों को भुगतान का इंतजार है। इनमें कई केंद्रों को प्रमाणपत्र मिले करीब एक वर्ष हो चुका है। भुगतान में देरी के पीछे बजट की कमी बताई जा रही है।
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सीएचसी लार और भागलपुर को पहले यह प्रमाणपत्र मिला था मगर दोबारा आवेदन नहीं करने से इसकी वैधता समाप्त हो गई। अन्य सीएचसी-पीएचसी भी प्रमाणपत्र हासिल नहीं कर सकीं।
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हालांकि, जिले के 35 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों ने यह उपलब्धि हासिल की है। इसके बावजूद 33 केंद्रों को अब तक प्रोत्साहन राशि नहीं मिल सकी है।
एनक्यूएएस के तहत सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं, इलाज, जांच, दवाओं, सफाई और अन्य व्यवस्थाओं का मूल्यांकन किया जाता है। निर्धारित मानकों पर खरा उतरने वाले अस्पतालों को राष्ट्रीय प्रमाणपत्र मिलता है।
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आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में भी प्रमाणन के प्रति उत्साह प्रभावित होने की बात सामने आ रही है। 35 केंद्रों को प्रमाणपत्र मिलने के बावजूद सिर्फ दो को प्रोत्साहन राशि मिल सकी है।
शेष 33 केंद्रों को भुगतान का इंतजार है। इनमें कई केंद्रों को प्रमाणपत्र मिले करीब एक वर्ष हो चुका है। भुगतान में देरी के पीछे बजट की कमी बताई जा रही है।
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