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Deoria News: मध्यस्थता से 30 साल से लंबित वादों का निपटारा
Fri, 10 Oct 2025 01:46 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Fri, 10 Oct 2025 01:46 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने एक जुलाई से 30 सितंबर तक 30 वर्ष से अधिक पुराने मामलों को मध्यस्थता के जरिए सुलझाया गया।
जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देवरिया के मार्गदर्शन व सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, देवरिया मनोज कुमार तिवारी के नेतृत्व में प्राप्त 974 वादों में से 30 साल पुराना एक वाद, 25 साल पुराना नाै वाद, 20 साल पुराना 10 वाद तथा सन् 2006 से अब तक प्राप्त वादों में से 91 वादों का निस्तारण कराया गया।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी द्वारा सर्वाधिक 38 वादों तथा अन्य मध्यस्थ द्वारा 73 वादों का निस्तारण कराया गया। निपटाए गए मागलों में वैवाहिक विवाद, दुर्घटना दावा, घरेलू हिंसा, आपराधिक समझौता योग्य मामले, उपभोक्ता विवाद, बेदखली, भूमि अधिग्रहण और अन्य संबंधित दीवानी मामले शामिल थे।
अभियान के दौरान कुल 974 लंबित मामले मध्यस्थता के लिए प्राप्त हुए। 111 मामलों का निस्तारण किया गया। कि ये परिणाम इस तथ्य को पुष्ट करते हैं कि मध्यस्थता को अब एक प्रभावी और विश्वसनीय न्याय वितरण तंत्र के रूप में स्वीकार किया जा रहा है।
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देवरिया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने एक जुलाई से 30 सितंबर तक 30 वर्ष से अधिक पुराने मामलों को मध्यस्थता के जरिए सुलझाया गया।
जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देवरिया के मार्गदर्शन व सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, देवरिया मनोज कुमार तिवारी के नेतृत्व में प्राप्त 974 वादों में से 30 साल पुराना एक वाद, 25 साल पुराना नाै वाद, 20 साल पुराना 10 वाद तथा सन् 2006 से अब तक प्राप्त वादों में से 91 वादों का निस्तारण कराया गया।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी द्वारा सर्वाधिक 38 वादों तथा अन्य मध्यस्थ द्वारा 73 वादों का निस्तारण कराया गया। निपटाए गए मागलों में वैवाहिक विवाद, दुर्घटना दावा, घरेलू हिंसा, आपराधिक समझौता योग्य मामले, उपभोक्ता विवाद, बेदखली, भूमि अधिग्रहण और अन्य संबंधित दीवानी मामले शामिल थे।
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अभियान के दौरान कुल 974 लंबित मामले मध्यस्थता के लिए प्राप्त हुए। 111 मामलों का निस्तारण किया गया। कि ये परिणाम इस तथ्य को पुष्ट करते हैं कि मध्यस्थता को अब एक प्रभावी और विश्वसनीय न्याय वितरण तंत्र के रूप में स्वीकार किया जा रहा है।
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