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Deoria News: नक्सली सांठगांठ और जालसाजी के मामले में बृजेश की थी तलाश
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खुखुंदू (देवरिया)। क्षेत्र के रारबड़ी गांव में बुधवार को नक्सली संबंधों के संदेह में किसान नेता बृजेश कुशवाहा को एटीएस लखनऊ की टीम गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई है। टीम बृजेश के खिलाफ लखनऊ में दर्ज जालसाजी के केस में गैर जमानती वारंट जारी होने पर उसे गिरफ्तार करने पहुंची थी।
गांव में पहुंचने के बाद एटीएस ने खुखुंदू इंस्पेक्टर संतोष कुमार सिंह को भी मयफोर्स मौके पर बुलाया। स्थानीय पुलिस के पहुंचने के बाद एटीएस ने बृजेश को हिरासत में लेकर उसके कमरे में आधे घंटे तक पूछताछ की। इसके बाद कमरे में रखी कुछ किताबों, डायरी, मोबाइल और लैपटाॅप को कब्जे में लिया।
बताया जाता है कि बृजेश कुशवाहा के खिलाफ लखनऊ में 2019 में जालसाजी का एक केस दर्ज किया गया। इसमें न्यायालय से गैर जमानती वारंट जारी हुआ। इसके अलावा बृजेश आजमगढ़ जिले के खिरिया बाग सहित विभिन्न किसान आंदोलनों में हिस्सा ले चुका है। ऐसे में एटीएस की टीम नक्सली कनेक्शन के तार जोड़ने में जुटी है।
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इंस्पेक्टर संतोष कुमार सिंह ने बताया कि एटीएस की टीम बुधवार में तकरीबन साढ़े ग्यारह बजे रारबड़ी गांव पहुंची। बृजेश कुशवाहा को हिरासत में लेकर तकरीबन आधे घंटे तक उससे पूछताछ की गई। टीम ने उसके कमरे में रखीं कुछ साहित्यिक किताबें भी कब्जे में ले ली। इसके बाद एटीएस ने उनके बड़े भाई और भाभी से भी पूछताछ की। उधर, एटीएस और पुलिस के गांव से निकलते ही लोगों ने तरह-तरह की चर्चाएं शुरू कर दीं। सीओ श्रीयश त्रिपाठी ने बताया कि एटीएस की टीम आई थी। बृजेश कुशवाहा को गिरफ्तार कर साथ लेकर लखनऊ चली गई है। एटीएस नक्सली कनेक्शन के बारे में जांच पड़ताल कर रही है।
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इनसेट...
चार साल पहले भी बृजेश और उसकी पत्नी को एटीएस ले गई थी साथ
खुखुंदू। एटीएस ने चार साल पहले भी बृजेश कुशवाहा और उसकी पत्नी को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। उस बार भी एटीएस तकरीबन तीन घंटे तक गांव में जमी रही। बृजेश से पूछताछ करने के बाद उन्हें हिरासत में लेकर लैपटॉप सहित अन्य कागजात भी कब्जे में लिया गया था। गांव के पूर्व प्रधान रविंद्र यादव का कहना है कि चार साल पहले भी एटीएस बृजेश कुशवाहा को हिरासत में लेकर गई थी। फिर रात में लाकर छोड़ गई। इसके बाद पूछताछ के लिए एटीएस ने पत्नी को लेकर तीन बार लखनऊ भी बुलाया।
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एटीएस के पहुंचने पर मची रही खलबली
खुखुंदू। एटीएस के पहुंचने पर बड़ी रार गांव में खलबली मच गई। चार साल बाद फिर बृजेश कुशवाहा के घर एटीएस पहुंची तो गांव वाले तरह-तरह की चर्चाएं करने लगे। हालांकि किसी ने भी बृजेश के दरवाजे पर जाकर यह जानने का प्रयास नहीं किया कि इस बार एटीएस क्यों आई है। जब एटीएस बृजेश कुशवाहा को लेकर चली गई। उसके बाद गांव वाले आपस में तरह-तरह की बात करने लगे। संवाद
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रारबड़ी गांव में अक्सर होती थीं बैठकें, कई संगठन के लोगों का था आना-जाना
- पकड़े गए किसान नेता ने दो-तीन माह से भलुअनी कस्बे में खोली थी बैग की दुकान
संवाद न्यूज एजेंसी
बरहज। बृजेश कुशवाहा को लेकर क्षेत्र के लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। वह दो-तीन माह से भलुअनी कस्बे में बैग मरम्मत की दुकान खोले हुए था। लोग बता रहे हैं कि बृजेश के घर अक्सर कई संगठनों के लोगों का आना-जाना था। जबकि भगत सिंह के नाम पर बैठक होती रहती थी। बृजेश करीब 10-12 वर्ष पूर्व कमाने बाहर गया था। वह छत्तीसगढ़ की एक प्राइवेट कंपनी में कार्य करता था। 2014-15 में पिता की मौत के बाद वह गांव आ गया था।
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छत्तीसगढ़ में ही बृजेश ने कर ली थी शादी
बरहज। बृजेश कुशवाहा जीविकोपार्जन के लिए छत्तीसगढ़ गया था। जहां उसने शादी भी कर ली थी। 2014-15 उसके पिता रामसरीखा का निधन हो गया, जिससे वह परिवार के साथ गांव आ गया। बृजेश का बैग बनाने की दुकान चलाने के साथ किसी संगठन से भी जुड़ाव था। लोग जानने की कोशिश करते, लेकिन बैठक के बारे में किसी को भनक नहीं लगने देता था। हालांकि, बृजेश को 2018-19 में भी पुलिस एक मामले में पुलिस उसे लखनऊ ले गई थी। पूछताछ करने के साथ बिना सूचना दिए अन्यत्र जाने पर रोक लगाते हुए उसे छोड़ दिया गया था। संवाद
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गांव में पहुंचने के बाद एटीएस ने खुखुंदू इंस्पेक्टर संतोष कुमार सिंह को भी मयफोर्स मौके पर बुलाया। स्थानीय पुलिस के पहुंचने के बाद एटीएस ने बृजेश को हिरासत में लेकर उसके कमरे में आधे घंटे तक पूछताछ की। इसके बाद कमरे में रखी कुछ किताबों, डायरी, मोबाइल और लैपटाॅप को कब्जे में लिया।
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बताया जाता है कि बृजेश कुशवाहा के खिलाफ लखनऊ में 2019 में जालसाजी का एक केस दर्ज किया गया। इसमें न्यायालय से गैर जमानती वारंट जारी हुआ। इसके अलावा बृजेश आजमगढ़ जिले के खिरिया बाग सहित विभिन्न किसान आंदोलनों में हिस्सा ले चुका है। ऐसे में एटीएस की टीम नक्सली कनेक्शन के तार जोड़ने में जुटी है।
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इंस्पेक्टर संतोष कुमार सिंह ने बताया कि एटीएस की टीम बुधवार में तकरीबन साढ़े ग्यारह बजे रारबड़ी गांव पहुंची। बृजेश कुशवाहा को हिरासत में लेकर तकरीबन आधे घंटे तक उससे पूछताछ की गई। टीम ने उसके कमरे में रखीं कुछ साहित्यिक किताबें भी कब्जे में ले ली। इसके बाद एटीएस ने उनके बड़े भाई और भाभी से भी पूछताछ की। उधर, एटीएस और पुलिस के गांव से निकलते ही लोगों ने तरह-तरह की चर्चाएं शुरू कर दीं। सीओ श्रीयश त्रिपाठी ने बताया कि एटीएस की टीम आई थी। बृजेश कुशवाहा को गिरफ्तार कर साथ लेकर लखनऊ चली गई है। एटीएस नक्सली कनेक्शन के बारे में जांच पड़ताल कर रही है।
इनसेट...
चार साल पहले भी बृजेश और उसकी पत्नी को एटीएस ले गई थी साथ
खुखुंदू। एटीएस ने चार साल पहले भी बृजेश कुशवाहा और उसकी पत्नी को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। उस बार भी एटीएस तकरीबन तीन घंटे तक गांव में जमी रही। बृजेश से पूछताछ करने के बाद उन्हें हिरासत में लेकर लैपटॉप सहित अन्य कागजात भी कब्जे में लिया गया था। गांव के पूर्व प्रधान रविंद्र यादव का कहना है कि चार साल पहले भी एटीएस बृजेश कुशवाहा को हिरासत में लेकर गई थी। फिर रात में लाकर छोड़ गई। इसके बाद पूछताछ के लिए एटीएस ने पत्नी को लेकर तीन बार लखनऊ भी बुलाया।
एटीएस के पहुंचने पर मची रही खलबली
खुखुंदू। एटीएस के पहुंचने पर बड़ी रार गांव में खलबली मच गई। चार साल बाद फिर बृजेश कुशवाहा के घर एटीएस पहुंची तो गांव वाले तरह-तरह की चर्चाएं करने लगे। हालांकि किसी ने भी बृजेश के दरवाजे पर जाकर यह जानने का प्रयास नहीं किया कि इस बार एटीएस क्यों आई है। जब एटीएस बृजेश कुशवाहा को लेकर चली गई। उसके बाद गांव वाले आपस में तरह-तरह की बात करने लगे। संवाद
रारबड़ी गांव में अक्सर होती थीं बैठकें, कई संगठन के लोगों का था आना-जाना
- पकड़े गए किसान नेता ने दो-तीन माह से भलुअनी कस्बे में खोली थी बैग की दुकान
संवाद न्यूज एजेंसी
बरहज। बृजेश कुशवाहा को लेकर क्षेत्र के लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। वह दो-तीन माह से भलुअनी कस्बे में बैग मरम्मत की दुकान खोले हुए था। लोग बता रहे हैं कि बृजेश के घर अक्सर कई संगठनों के लोगों का आना-जाना था। जबकि भगत सिंह के नाम पर बैठक होती रहती थी। बृजेश करीब 10-12 वर्ष पूर्व कमाने बाहर गया था। वह छत्तीसगढ़ की एक प्राइवेट कंपनी में कार्य करता था। 2014-15 में पिता की मौत के बाद वह गांव आ गया था।
छत्तीसगढ़ में ही बृजेश ने कर ली थी शादी
बरहज। बृजेश कुशवाहा जीविकोपार्जन के लिए छत्तीसगढ़ गया था। जहां उसने शादी भी कर ली थी। 2014-15 उसके पिता रामसरीखा का निधन हो गया, जिससे वह परिवार के साथ गांव आ गया। बृजेश का बैग बनाने की दुकान चलाने के साथ किसी संगठन से भी जुड़ाव था। लोग जानने की कोशिश करते, लेकिन बैठक के बारे में किसी को भनक नहीं लगने देता था। हालांकि, बृजेश को 2018-19 में भी पुलिस एक मामले में पुलिस उसे लखनऊ ले गई थी। पूछताछ करने के साथ बिना सूचना दिए अन्यत्र जाने पर रोक लगाते हुए उसे छोड़ दिया गया था। संवाद