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बहनों को लुभा रही रुद्राक्ष, चंदन और नग वाली राखियां
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बहनों को लुभा रही रुद्राक्ष, चंदन व नग वाली राखियां
सलेमपुर (देवरिया)। कोरोना संक्रमण को देखते हुए राखी का कारोबार इस बार आधे से भी कम हो गया है। पिछले साल की अपेक्षा इस बार नगर में दुकानें भी कम सजी हैं। चीन के साथ तनाव को देखते हुए इस बार दुकानदारों ने भी वहां की राखियों का पूरी तरह बहिष्कार किया है। स्वदेशी राखियों से बाजार का आकर्षण बरकरार है।
रक्षाबंधन का त्योहार तीन अगस्त को मनाया जाएगा। भाई-बहनों के प्यार के प्रतीक इस पर्व को लेकर शहर से लेकर देहात तक राखी की दुकानें सज गई हैं। पिछले सालों की तुलना में इस बार फुटपाथ पर अपेक्षाकृत कम ही दुकानें सजी हैं। खास बात यह है कि जो भी दुकानें लगी हैं वहां से इस बार चीन निर्मित राखियां पूरी तरह से गायब हैं। खरीदारी के वक्त ही ग्राहक भी पूछ रहे हैं कि यह चीन की बनी तो नहीं है। पाठशाला रोड, रेलवे स्टेशन रोड व बस स्टैंड के पास के दुकानदार नवीन श्रीवास्तव, सीताराम मद्घेशिया, दीनदयाल बरनवाल, संदीप गुप्ता ने बताया कि पहले जहां आधे से ज्यादा बाजार में चीन की राखियों का ही कब्जा रहता था, इस बार बाजार में लखनऊ, कानपुर से बनी राखियां ही मंगाई गई हैं। इस बार ग्राहक ही राखी खरीदते समय चाइनीज है कि मेड इन इंडिया पूछ रहे हैं। बार्डर पर के वर्तमान हालात को देखते हुए चीन निर्मित राखियों को मंगाने का सवाल ही नहीं उठता। देशहित पहले हैं, व्यवसाय बाद में। लोगों का मूड भी इस बार चीन के सामानों की खरीदारी के प्रति बिल्कुल नहीं है।
शुभ मुहूर्त में बहनें बांधेगी भाई को राखी
ज्योतिषी पं.धनंजय पांडेय ने बताया कि रक्षाबंधन के श्रवण नक्षत्र के साथ ही सवार्थ सिद्घ योग व आनंद योग रहेगा। अशुभ माना जाने वाला भ्रदाकाल का योग सुबह 9.27 बजे तक रहेगा। इसके बाद ही बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बांधे तो शुभ होगा। भद्राकाल में राखी बांधना अशुभ माना जाता है। तीन अगस्त को श्रवण नक्षत्र, सावन का अंतिम सोमवार व पूर्णिमा होने से आनंद योग रहेगा। यह योग सुबह से गोधूलि बेला तक रहेगा। शाम तक के मुहूर्त में राखी बंधवाना श्रेष्ठ रहेगा।
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सलेमपुर (देवरिया)। कोरोना संक्रमण को देखते हुए राखी का कारोबार इस बार आधे से भी कम हो गया है। पिछले साल की अपेक्षा इस बार नगर में दुकानें भी कम सजी हैं। चीन के साथ तनाव को देखते हुए इस बार दुकानदारों ने भी वहां की राखियों का पूरी तरह बहिष्कार किया है। स्वदेशी राखियों से बाजार का आकर्षण बरकरार है।
रक्षाबंधन का त्योहार तीन अगस्त को मनाया जाएगा। भाई-बहनों के प्यार के प्रतीक इस पर्व को लेकर शहर से लेकर देहात तक राखी की दुकानें सज गई हैं। पिछले सालों की तुलना में इस बार फुटपाथ पर अपेक्षाकृत कम ही दुकानें सजी हैं। खास बात यह है कि जो भी दुकानें लगी हैं वहां से इस बार चीन निर्मित राखियां पूरी तरह से गायब हैं। खरीदारी के वक्त ही ग्राहक भी पूछ रहे हैं कि यह चीन की बनी तो नहीं है। पाठशाला रोड, रेलवे स्टेशन रोड व बस स्टैंड के पास के दुकानदार नवीन श्रीवास्तव, सीताराम मद्घेशिया, दीनदयाल बरनवाल, संदीप गुप्ता ने बताया कि पहले जहां आधे से ज्यादा बाजार में चीन की राखियों का ही कब्जा रहता था, इस बार बाजार में लखनऊ, कानपुर से बनी राखियां ही मंगाई गई हैं। इस बार ग्राहक ही राखी खरीदते समय चाइनीज है कि मेड इन इंडिया पूछ रहे हैं। बार्डर पर के वर्तमान हालात को देखते हुए चीन निर्मित राखियों को मंगाने का सवाल ही नहीं उठता। देशहित पहले हैं, व्यवसाय बाद में। लोगों का मूड भी इस बार चीन के सामानों की खरीदारी के प्रति बिल्कुल नहीं है।
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शुभ मुहूर्त में बहनें बांधेगी भाई को राखी
ज्योतिषी पं.धनंजय पांडेय ने बताया कि रक्षाबंधन के श्रवण नक्षत्र के साथ ही सवार्थ सिद्घ योग व आनंद योग रहेगा। अशुभ माना जाने वाला भ्रदाकाल का योग सुबह 9.27 बजे तक रहेगा। इसके बाद ही बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बांधे तो शुभ होगा। भद्राकाल में राखी बांधना अशुभ माना जाता है। तीन अगस्त को श्रवण नक्षत्र, सावन का अंतिम सोमवार व पूर्णिमा होने से आनंद योग रहेगा। यह योग सुबह से गोधूलि बेला तक रहेगा। शाम तक के मुहूर्त में राखी बंधवाना श्रेष्ठ रहेगा।
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