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Deoria News: अटहर और कियारे की मां भगवती सांप्रदायिक सौहार्द की हैं प्रतीक

Fri, 20 Oct 2023 11:30 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Updated Fri, 20 Oct 2023 11:30 PM IST
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Athar and Kiare's mother Bhagwati is a symbol of communal harmony.
खुखुंदू। क्षेत्र में अटहर और कियारे की मां भगवती सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक मानी जाती है। दोनों मंदिरों में हिंदुओं के साथ मुस्लिम समुदाय के लोग भी अपना शीष नवाने में पीछे नहीं रहते हैं। मां के दरबार में चंदे की बात हो या फिर भंडारा, हर कार्यों में हिंदू भाइयों के साथ मुस्लिम समुदाय के लोग भी बराबर की भागीदारी करते हैं। उधर, यहां का हिंदू परिवार भी मुस्लिम समुदाय के त्योहारों में अपनी सहभागिता निभाने में पीछे नहीं हटता हैं। खुखुंदू के पईलहां की कियारे मां भगवती के मंदिर निर्माण से लेकर वहां कोई भी छोटा से बड़ा कार्यक्रम होता है। गांव के मुस्लिम समुदाय के लोगों की पूरी सहभागिता रहती है। मां भगवती के प्रति हिंदू श्रद्धालुओं की अपेक्षा इनकी भी आस्था कम नहीं रहती है। ठीक यही स्थिति अटहर मां भगवती मंदिर की भी है। यह मंदिर जैतपुरा ग्राम पंचायत अंतर्गत आता है। जबकि जैतपुरा गांव मुस्लिम बाहुल्य है। फिर भी अटहर मां भगवती के प्रति समुदाय के लोगों की आस्था कम नहीं रहती है। मंदिर परिसर में चाहे मेले का आयोजन हो या फिर भंडारे का समुदाय के लोग उसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते है। हिंदू वर्ग के लोग भी उनके त्योहारों में हिस्सा लेने में पीछे नहीं रहते है। वर्तमान में भी यहां पर आपसी-भाईचारा कायम है।
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इनसेट..
ऐसे है मां अटहर भगवती मंदिर का इतिहास
खुखुंदू। अटहर मां भगवती के मंदिर के बारे में अनेकों मान्यताएं है। स्थानीय विद्वानों और मंदिर के तीसरी पीढ़ी के पुजारी पंडित दुर्गेश तिवारी ने बताया कि गांव के जमींदार बाबू काशी प्रसाद राय को पुत्र नहीं हो रहा था। मां के दरबार में माथा टेक मन्नतें मांगी गई। जिसके बाद उनके घर में बच्चों की किलकारियां गूंजी। उनके दो पुत्र हुए। एक का नाम रविनंदन राय और दूसरे का विजय कुमार राय पड़ा। तभी से अटहर मां भगवती के चमत्कार की प्रसिद्धी चहुंओर बढ़ गई। 80 वर्षीय विजय कुमार राय ने बताया कि हमारे जन्म के साल से ही पिता स्वर्गीय काशी प्रसाद राय चैत्र रामनवमी पर मां भगवती के स्थान पर तीन दिवसीय मेला का शुभारंभ कराया। वर्तमान में भी चैत्र रामनवमी के अवसर पर दो दिवसीय मेला लगता है।
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इनसेट....
मुरादें पूरी होने पर कड़ाही चढ़ाने की है पुरानी परंपरा
खुखुंदू। मां भगवती के यहां मुरादें पूरी होने पर मां के भक्त भजन-कीर्तन और कड़ाही चढ़ाते हैं। मंदिर पर स्थानीय कस्बे सहित आस-पास के चालीस से पचास गांवों के श्रद्धालुओं का मां के दर्शन के लिए आना-जाना होता है। मुरादें पूरी होने पर मां के दरबार में दूर दराज सहित बिहार प्रांत से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। प्राचीन समय से ही यहां मन्नतें पूरी होने पर कढ़ाई चढ़ाने की परंपरा है। संवाद
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