{"_id":"695c0495201157a2910d25dc","slug":"animals-are-being-transported-to-bihar-via-kharwania-bridge-deoria-news-c-208-1-deo1016-171839-2026-01-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Deoria News: खरवनिया पुल के रास्ते बिहार पहुंचाए जा रहे पशु","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Deoria News: खरवनिया पुल के रास्ते बिहार पहुंचाए जा रहे पशु
Tue, 06 Jan 2026 12:06 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Tue, 06 Jan 2026 12:06 AM IST
विज्ञापन
बिहार बार्डर स्थित खरवनिया नवीन पुल,इसी पुल के रास्ते तस्कर बिहार निकल जाते हैं
लार। मुख्य सड़क पर निगरानी बढ़ी तो गोतस्करों ने रास्ता बदल दिया है। अब वे सरयू नदी के महाल मंझरिया दियारा का रुख कर लिए हैं। कभी पैदल तो कभी पिकअप में एक-एक पशु को लादकर तस्कर बाॅर्डर पार करा रहे हैं।
बिहार के गुठनी इलाके में पशुओं को इकट्ठा कर बड़े वाहनों से आगे पश्चिमी बंगाल भेज रहे हैं। पुलिस इसी नेटवर्क को तोड़ने के लिए नदी क्षेत्र में अपना जाल फैला रही है।
लार, भारपाररानी, खामपार, बनकटा और श्रीरामपुर थाना क्षेत्र बिहार बॉर्डर के नजदीक है। इनके क्षेत्र में कई गांव ऐसे हैं जहां एक अगला कदम बिहार प्रांत का हिस्सा है। हर तीसरे गांव का रास्ता बिहार से जुड़ता है।
विज्ञापन
बिहार में पशुओं की तस्करी पर सख्ती नहीं होने का फायदा तस्कर उठाते हैं और जैसे-तैसे पशुओं को बॉर्डर पार करा देते हैं। इस धंधे में इस वक्त सबसे अधिक सक्रिय रास्ता सरयू नदी का दियारा बन गया है।
महाल मंझरिया का यह इलाका एक तरफ बलिया जिले के मनियर से जुड़ता है तो दूसरी तरफ बिहार के सिवान जिले का गुठनी थाना क्षेत्र है। बीच में सरयू और गंडक नदी का क्षेत्र है, जहां निगरानी बड़ा कठिन है।
तस्कर इस इलाके से एक-एक कर गोवंश को पार करा रहे हैं। ग्रामीण बताते हैं कि इस धंधे में सक्रिय लोग गांव-गांव घूमकर पशुपालकों के दरवाजे पर जाकर पहले पशुओं का मोल भाव करते हैं। सबसे पहले उन पशुओं को देखते हैं जो अब बेकार हो चुके हैं।
पशुओं को चिन्हित कर मालिक को रुपये देकर चले जाते हैं।इसके बाद धंधे में शामिल दूसरे लोग पशुपालक बनकर एक-एक पशु को पिकअप से या पैदल दियारा क्षेत्र में लेकर चले जाते हैं। एक पशु होने के चलते कोई रोकटोक नहीं होती। पूछताछ करने पर स्थानीय नाम व पता होने की वजह से पुलिस भी पशुपालक मान लेती है।
विज्ञापन
बिहार के गुठनी इलाके में पशुओं को इकट्ठा कर बड़े वाहनों से आगे पश्चिमी बंगाल भेज रहे हैं। पुलिस इसी नेटवर्क को तोड़ने के लिए नदी क्षेत्र में अपना जाल फैला रही है।
विज्ञापन
लार, भारपाररानी, खामपार, बनकटा और श्रीरामपुर थाना क्षेत्र बिहार बॉर्डर के नजदीक है। इनके क्षेत्र में कई गांव ऐसे हैं जहां एक अगला कदम बिहार प्रांत का हिस्सा है। हर तीसरे गांव का रास्ता बिहार से जुड़ता है।
विज्ञापन
बिहार में पशुओं की तस्करी पर सख्ती नहीं होने का फायदा तस्कर उठाते हैं और जैसे-तैसे पशुओं को बॉर्डर पार करा देते हैं। इस धंधे में इस वक्त सबसे अधिक सक्रिय रास्ता सरयू नदी का दियारा बन गया है।
महाल मंझरिया का यह इलाका एक तरफ बलिया जिले के मनियर से जुड़ता है तो दूसरी तरफ बिहार के सिवान जिले का गुठनी थाना क्षेत्र है। बीच में सरयू और गंडक नदी का क्षेत्र है, जहां निगरानी बड़ा कठिन है।
तस्कर इस इलाके से एक-एक कर गोवंश को पार करा रहे हैं। ग्रामीण बताते हैं कि इस धंधे में सक्रिय लोग गांव-गांव घूमकर पशुपालकों के दरवाजे पर जाकर पहले पशुओं का मोल भाव करते हैं। सबसे पहले उन पशुओं को देखते हैं जो अब बेकार हो चुके हैं।
पशुओं को चिन्हित कर मालिक को रुपये देकर चले जाते हैं।इसके बाद धंधे में शामिल दूसरे लोग पशुपालक बनकर एक-एक पशु को पिकअप से या पैदल दियारा क्षेत्र में लेकर चले जाते हैं। एक पशु होने के चलते कोई रोकटोक नहीं होती। पूछताछ करने पर स्थानीय नाम व पता होने की वजह से पुलिस भी पशुपालक मान लेती है।