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Deoria News: बीमारों के लिए नहीं पहुंच पाती एंबुलेंस आग लगी तो मदद पहुंचाना भी मुश्किल
Sat, 09 May 2026 11:46 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sat, 09 May 2026 11:46 PM IST
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देवरिया। कुर्ना नाला और रेलवे लाइन के बीच बसे अलीनगर मोहल्ले के शहीद नगर काॅलोनी में अगर कोई बीमार पड़ जाए तो उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस भी मोहल्ले में नहीं जा पाएगी।
यही स्थिति आग लगने जैसी आपात स्थिति में भी होगी। क्योंकि दमकल की गाड़ी ले जाने के लिए रास्ता नहीं है। आपात स्थिति में मोहल्ले के लोगों या प्रशासन के पास सिर्फ तमाशा देखने का ही विकल्प बचेगा।
अलीनगर में कुर्ना नाला पर पुल नहीं बनाए जाने से लोगों ने लकड़ी का अस्थायी पुल बनवाया है। इस पुल से बाइक या कार नहीं जा सकती है। लोग बाइक व कार रिश्तेदार के घर रखते हैं या फिर नाले के दूसरी तरफ खड़ी करते हैं।
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वहां से अपने घर तक लोग पैदल जाते हैं। मोहल्ले का दूसरा छोर बीआरडीपीजी कॉलेज के पास है। वहां कॉलेज की जमीन है, लेकिन उससे लोगों को रास्ता नहीं मिल पा रहा है। बड़ी मुश्किल से तीन-चार फिट का एक कच्चा रास्ता है। इससे लोग पैदल या बाइक से आ-जा सकते हैं। सबसे बड़ी दिक्कत इस मोहल्ले में घर बनवाने की है।
मोहल्ले के जीशान बताते हैं कि पहले जब बीआरडी पीजी की तरफ से रास्ता खुला था लोग ट्रैक्टर ट्राली से मैटेरियल मंगा लेते थे, लेकिन मेन रोड से सिर से सामान ढोकर लाना पड़ता है। इसलिए तमाम लोगों के निर्माण कार्य ठप पड़े हैं।
सस्ते के चक्कर में बसे थे, अब फंस गए : रेलवे लाइन व नाले के किनारे की यह जमीन दो दशक पहले तक रास्ते की किल्लत के चलते ही काफी सस्ती थी। इसी सस्ता के चक्कर में बीआरडी पीजी कालेज वाले रास्ते के किनारे तेजी से कई मोहल्ले बस गए।
अलीनगर की शहीद कालोनी भी इसीलिए बस गई, क्योंकि तब कॉलेज की तरफ से खुला रास्ता था। लोग रेलवे क्रॉसिंग पार करके आए और सस्ते के चक्कर में जमीन खरीदकर घर बना लिए।
लेकिन जब लोगों की आवाजाही बढ़ी तो कॉलेज प्रशासन ने अपनी जमीन से होकर गुजरने वाले रास्ते को बंद कर दिया। इससे लोगों की दुश्वारी काफी बढ़ गई। हलांकि, अभी भी कॉलेज की जमीन से होकर ही पैदल रास्ता चल रहा है। अगर यह बंद हो गया तो मोहल्ले वालों की दुश्वारी और बढ़ जाएगी।
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यही स्थिति आग लगने जैसी आपात स्थिति में भी होगी। क्योंकि दमकल की गाड़ी ले जाने के लिए रास्ता नहीं है। आपात स्थिति में मोहल्ले के लोगों या प्रशासन के पास सिर्फ तमाशा देखने का ही विकल्प बचेगा।
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अलीनगर में कुर्ना नाला पर पुल नहीं बनाए जाने से लोगों ने लकड़ी का अस्थायी पुल बनवाया है। इस पुल से बाइक या कार नहीं जा सकती है। लोग बाइक व कार रिश्तेदार के घर रखते हैं या फिर नाले के दूसरी तरफ खड़ी करते हैं।
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वहां से अपने घर तक लोग पैदल जाते हैं। मोहल्ले का दूसरा छोर बीआरडीपीजी कॉलेज के पास है। वहां कॉलेज की जमीन है, लेकिन उससे लोगों को रास्ता नहीं मिल पा रहा है। बड़ी मुश्किल से तीन-चार फिट का एक कच्चा रास्ता है। इससे लोग पैदल या बाइक से आ-जा सकते हैं। सबसे बड़ी दिक्कत इस मोहल्ले में घर बनवाने की है।
मोहल्ले के जीशान बताते हैं कि पहले जब बीआरडी पीजी की तरफ से रास्ता खुला था लोग ट्रैक्टर ट्राली से मैटेरियल मंगा लेते थे, लेकिन मेन रोड से सिर से सामान ढोकर लाना पड़ता है। इसलिए तमाम लोगों के निर्माण कार्य ठप पड़े हैं।
सस्ते के चक्कर में बसे थे, अब फंस गए : रेलवे लाइन व नाले के किनारे की यह जमीन दो दशक पहले तक रास्ते की किल्लत के चलते ही काफी सस्ती थी। इसी सस्ता के चक्कर में बीआरडी पीजी कालेज वाले रास्ते के किनारे तेजी से कई मोहल्ले बस गए।
अलीनगर की शहीद कालोनी भी इसीलिए बस गई, क्योंकि तब कॉलेज की तरफ से खुला रास्ता था। लोग रेलवे क्रॉसिंग पार करके आए और सस्ते के चक्कर में जमीन खरीदकर घर बना लिए।
लेकिन जब लोगों की आवाजाही बढ़ी तो कॉलेज प्रशासन ने अपनी जमीन से होकर गुजरने वाले रास्ते को बंद कर दिया। इससे लोगों की दुश्वारी काफी बढ़ गई। हलांकि, अभी भी कॉलेज की जमीन से होकर ही पैदल रास्ता चल रहा है। अगर यह बंद हो गया तो मोहल्ले वालों की दुश्वारी और बढ़ जाएगी।