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Deoria News: भागवत कथा श्रवण से नष्ट हो जाते हैं सारे पाप
Sun, 08 Mar 2026 11:42 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 08 Mar 2026 11:42 PM IST
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मईल। चंदेश्वर महादेव धाम देवढ़ी में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा में वृंदावन से आए कथावाचक भागवत भास्कर श्री कृष्ण चंद्र शास्त्री ठाकुर जी महाराज ने रविवार को कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल श्रवण के लिए नहीं, बल्कि जीवन में उतारने के लिए होती है। इससे मनुष्य के कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।
कथावाचक ने कहा कि वामन रूप में भगवान विष्णु ने राजा बलि को यह सिखाया कि अहंकार, दंभ और लोभ से जीवन में कुछ भी स्थायी नहीं होता है। धन-संपत्ति क्षणिक होती है। परोपकार ही सच्चा धर्म है। राजा बलि ने वामन को तीन पग भूमि दान देने का वचन दिया, जिसमें भगवान ने दो पग में पूरा ब्रह्मांड नाप लिया और तीसरे पग के लिए राजा बलि ने अपना शीश अर्पण कर दिया।
इसी विनम्रता और समर्पण के कारण भगवान ने उन्हें पाताल लोक का स्वामी बना दिया। उन्होंने बताया कि जो व्यक्ति अहंकार, घृणा और ईर्ष्या से मुक्त होता है, वही ईश्वर की सच्ची कृपा का पात्र बनता है। जैसे सूर्य, वायु, नदियां, बादल और वृक्ष बिना भेदभाव के सबके लिए कार्य करते हैं, वैसे ही मनुष्य को भी निस्वार्थ सेवा और परोपकार में जीवन लगाना चाहिए। इस दौरान विवेकानंद मिश्र ,रविंद्र सिंह, उग्रसेन सिंह, संजय सिंहस तारापति सिंह, उदय प्रताप सिंह, प्रमोद मिश्रा, देवेंद्र मिश्र, अशोक सिंह ससूर्य प्रताप सिंह, श्रीनारायण मिश्रा,शूभम चौधरी,रामईश्वर सिंह, भूपेंद्र सिंह आदि उपस्थित रहे।
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कथावाचक ने कहा कि वामन रूप में भगवान विष्णु ने राजा बलि को यह सिखाया कि अहंकार, दंभ और लोभ से जीवन में कुछ भी स्थायी नहीं होता है। धन-संपत्ति क्षणिक होती है। परोपकार ही सच्चा धर्म है। राजा बलि ने वामन को तीन पग भूमि दान देने का वचन दिया, जिसमें भगवान ने दो पग में पूरा ब्रह्मांड नाप लिया और तीसरे पग के लिए राजा बलि ने अपना शीश अर्पण कर दिया।
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इसी विनम्रता और समर्पण के कारण भगवान ने उन्हें पाताल लोक का स्वामी बना दिया। उन्होंने बताया कि जो व्यक्ति अहंकार, घृणा और ईर्ष्या से मुक्त होता है, वही ईश्वर की सच्ची कृपा का पात्र बनता है। जैसे सूर्य, वायु, नदियां, बादल और वृक्ष बिना भेदभाव के सबके लिए कार्य करते हैं, वैसे ही मनुष्य को भी निस्वार्थ सेवा और परोपकार में जीवन लगाना चाहिए। इस दौरान विवेकानंद मिश्र ,रविंद्र सिंह, उग्रसेन सिंह, संजय सिंहस तारापति सिंह, उदय प्रताप सिंह, प्रमोद मिश्रा, देवेंद्र मिश्र, अशोक सिंह ससूर्य प्रताप सिंह, श्रीनारायण मिश्रा,शूभम चौधरी,रामईश्वर सिंह, भूपेंद्र सिंह आदि उपस्थित रहे।
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