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Deoria News: एसडीएम के निलंबन के बाद सचिव, लेखपाल, कानूनगो पर लटकी तलवार

Sun, 12 Apr 2026 12:10 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 12 Apr 2026 12:10 AM IST
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After the suspension of SDM, the sword hangs over the secretary, accountant and law officer.
बरहज। क्षेत्र के लक्ष्मीपुर गांव में रविवार को चकनाली पर सड़क बनाने के विवाद में अधिकारियों के जाने के बाद हुई धक्का-मुक्की में तहसील बार संघ के पूर्व अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह की मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने पांच नामजद और सात-आठ अज्ञात पर हत्या समेत अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की थी। क्षेत्रीय विधायक दीपक मिश्र शाका अधिवक्ता के पुत्र प्रशांत के साथ मुख्यमंत्री से मिलकर घटना से अवगत कराया था। जांच में लापरवाही मिलने पर एसडीएम विपिन कुमार द्विवेदी को शासन ने निलंबित कर दिया गया है। वहीं लेखपाल और कानूनगो पर कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है। उधर, अधिवक्ता की मौत के आठ दिन बाद भी आरोपियों के पकड़े न जाने पर परिजनों में गहरी नाराजगी है।
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लक्ष्मीपुर गांव में चकनाली पर ग्राम पंचायत की ओर से सड़क बनाया जा रहा था। इसका अधिवक्ता बिजेंद्र सिंह विरोध कर रहे थे। मामले में रविवार को एसडीएम के नेतृत्व में राजस्व टीम ने दोनों पक्षों को मौके पर बुलाया था। लोगों के अनुसार, एसडीएम के जाने के बाद दोनों पक्षाें में धक्का-मुक्की हो गई। इसमें अधिवक्ता की मौके पर ही जमीन पर गिरकर मौत हो गई। नाराज ग्रामीण तहसील में अधिवक्ता का शव रखकर विरोध-प्रदर्शन करते हुए कार्रवाई की मांग की थी।
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क्षेत्रीय विधायक और पीड़ित परिवार के मुख्यमंत्री से मिलने के बाद शुक्रवार को गोरखपुर की तीन सदस्यीय टीम ने मौके का जायजा लिया था। जांच में एसडीएम की लापरवाही सामने आने पर उन्हें निलंबित कर दिया गया है। जबकि सचिव मनोहर लाल, लेखपाल रोशन और कानूनगो सुनील कुमार पर भी कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है। लोगों का कहना है कि राजस्व कर्मियों ने चकनाली पर सड़क बनाने के लिए वोटिंग कराया था। इसके बाद से मामला तूल पकड़ लिया।
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तहसील बार संघ के अध्यक्ष चंद्रगुप्त यादव ने कहा कि अधिवक्ता बिजेन्द्र सिंह की मौत के मामले में जांच के बाद एसडीएम विपिन कुमार द्विवेदी का निलंबन बार एसोसिएशन के जीत की पहली कड़ी है। अन्य सहयोगी कर्मियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। सोमवार को आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी। जबकि तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष युगुल किशोर तिवारी ने कहा कि बरहज तहसील के एसडीएम को निलंबित करते हुए लखनऊ राजस्व परिषद में अटैच किया गया। यह सराहनीय है।



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इंसेट में-
घटनास्थल पर जिले के उच्चाधिकारियों के न पहुंचने का है मलाल, परिजन कर रहे शिकायत
बरहज। लक्ष्मीपुर गांव में सरकारी अभिलेख में दर्ज ट्यूवबेल के चकनाली पर सड़क बनाये जाने का विरोध करने पर अधिवक्ता बिजेंद्र सिंह की मौत हो गई। घटना के बाद भी डीएम दिव्या मित्तल और एसपी संजीव सुमन के न पहुंचने और आठ दिन बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी न होने का परिजनों को मलाल है। दरवाजे पर आने-जाने वाले जनप्रतिनिधियों और अधिकारियाें से परिजन आपबीती बयां करते हुए इसकी शिकायत कर रहे हैं। शनिवार को दरवाजे पर पहुंचे भाजपा जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह से मृतक अधिवक्ता के पुत्र सिद्धार्थ और प्रशांत सहित परिवार के अन्य सदस्यों ने कहा कि वकील के मौत में कहीं न कहीं राजस्व के लोग भी कसूरवार हैं। अधिवक्ता के मौत के बाद जिम्मेदार कार्रवाई की जगह दोषियों को बचाने में जुटे हुए हैं। परिवार के लोगों का कहना है कि केंद्रीय राज्यमंत्री कमेश पासवान के आश्वासन और क्षेत्रीय विधायक दीपक मिश्र शाका के साथ मुख्यमंत्री से मुलाकात के उपरांत कार्रवाई में कुछ हद तक तेजी आई है। वकील की बेवा पत्नी सत्यावती सिंह ने हत्यारोपियों को फांसी की सजा दिलाने की मांग कर रही थीं। उनका कहना है कि राजस्व विभाग के दोहरे फैसले के कारण चकनाली पर सड़क बनाये जाने का विरोध कर रहे पति को गांव के मनबढ़ों ने मरने पर मजबूर कर दिया। जिन्हें ईश्वर माफ नहीं करेंगे। मौके पर राजेश मिश्र, मुन्ना सिंह आदि मौजूद रहे।



इंसेट में-
तहसील बार संघ अध्यक्ष के जान को खतरा, सुरक्षा मुहैया कराने और परिसर की चौकसी बढ़ाने की मांग
बरहज। क्षेत्र के लक्ष्मीपुर गांव निवासी और बार संघ के पूर्व अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह की बीते रविवार को चकनाली पर बनाये जा रहे रास्ते के विवाद को लेकर हत्या कर दिया गया। मामले में पुलिस ने ग्राम प्रधान राजेश यादव, दुबौली के प्रधान गामा यादव सहित पांच नामजद और सात-आठ अज्ञात के विरूद्ध केस दर्ज किया है। साथी वकील के हत्या मामले में अधिवक्ता पिछले छह दिनों से न्याय को लेकर धरना-प्रदर्शन करते हुए विरोध जता रहे हैं। पूर्व अध्यक्ष नागेंद्र सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अधिकारियों और हत्यारोपियों के विरूद्ध जारी आंदोलन के चलते बार संघ अध्यक्ष के जान का खतरा बढ़ गया है। परिसर में विचित्र डील-डौल के लोग भी देखे जा रहे हैं। कोई भी हालात का लाभ उठा सकता है। अधिवक्ताओं ने अध्यक्ष को सुरक्षा मुहैया कराने के साथ परिसर में चौकसी बढ़ाने की मांग किया है।
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