{"_id":"67e98da32b0f48353f011337","slug":"adulteration-in-fruits-and-puja-material-selling-adulterated-sesame-oil-deoria-news-c-208-1-sgkp1008-150493-2025-03-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Deoria News: फलाहार व पूजा सामग्री में मिलावट, बेच रहे मिलावटी तिल का तेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Deoria News: फलाहार व पूजा सामग्री में मिलावट, बेच रहे मिलावटी तिल का तेल
Sun, 30 Mar 2025 11:59 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 30 Mar 2025 11:59 PM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। चैत्र नवरात्र में मांग को देखते हुए मिलावटखोर खेल करने में लग गए हैं। बाजार में मिलावटी तिल का तेल बिना डर व भय के बेचा जा रहा है। सफेद वाला तिल 180 रुपये किलो व काला वाला 250 रुपये किलो बिक है।
जबकि धंधेबाज मिलावटी तिल का तेल 130 से 150 रुपये लीटर में बेच रहे हैं। सस्ता होने के कारण लोग इसे खरीद भी रहे हैं। ऐसे में शुद्धता की परवाह न करते हुए लोगों की आस्था के साथ जमकर खिलवाड़ किया जा रहा है।
इधर खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावटखोरी और एक्सपायरी डेट के खाद्य व पेय पदार्थों की बिक्री के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है।
चैत्र नवरात्र को देखते हुए जिले में 50 लाख से अधिक का मिलावटी तिल का तेल खपाने की योजना धंधेबाजों ने बनाई है। सफेद ऑयल में रंग मिलाकर पूजा का तेल तैयार कर बेचा जा रहा है।
विज्ञापन
खास बात यह है कि इस तिल के तेल में तिल का एक दाना नहीं पड़ा है। शहर के मोहन रोड, छहमुखी चौराहा, तिलक रोड, सब्जी मंडी, गल्ला मंडी, हनुमान मंदिर रोड की दुकानों पर छोटे और बड़े बोतल में बिक रहा तिल का तेल व इसका कलर देख के ही इसकी शुद्धता पर संदेह होने लगा रहा है। सुर्तीहट्टा रोड स्थित एक व्यापारी ने रविवार को इसे स्वीकार भी किया कि बोतल या खुले में बिक रहा तिल का तेल शुद्ध नहीं है। शुद्ध तिल का तेल जहां 250-300 रुपये किलो बिक रहा है। वहीं धंधेबाज इसे 130 से लेकर 150 रुपये ही उपलब्ध करा दे रहे हैं। इससे व्रत रखने वाले लोगों की सेहत को खतरा हो सकता है। बाजार में बिक रहे मिलावटी फलाहार भी व्रतियों की सेहत को खराब कर सकते हैं। ऐसे में खुद की जागरूकता से सेहत को बचाया जा सकता है।
मिलावटी फलाहार भी बना सकता है बीमार : वासंतिक नवरात्र में उपासक सबसे ज्यादा सिंघाड़े और कुटटू का आटा, तिन्नी का चावल, मूंगफली का दाना, रामदाना आदि खरीद रहे हैं।
धंधेबाज सिंघाड़े और कुटटू के आटे में खेल कर रहे हैं। सेहत का ध्यान न रख अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में मिलावटखोर सिंघाड़े व कुट्टू के आटे में आरारोट और चावल को पीस कर इसमें मिलाकर बेच रहे हैं। शुद्ध सिंघाड़ा और कुटट् का आटा 140 रुपये किलो बिक रहा है। इसकी आड़ में मिलावटखोर आरारोट और पिसा चावल मिलाकर किराने की दुकानों पर जुटे ग्राहकों को बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। साबूदाना, मूंगफली, तिल का तेल, देसी घी जैसे सामग्री की भी मांग बढ़ी हुई है। मूंगफली बाजार में तीन तरह की बिक रही है। इसमें थोड़ा काला कलर लिए 100 रुपये, उससे साफ 120 तो सफेद रंग में 140 रुपये किलो है।
देसी घी में मिलावट का खेल बड़े पैमाने पर चल रहा है। अनाम कंपनियों की पन्नी और डिब्बे में 100 से 200 ग्राम की पैकिंग में देसी घी बाजार में उपलब्ध है।
विज्ञापन
देवरिया। चैत्र नवरात्र में मांग को देखते हुए मिलावटखोर खेल करने में लग गए हैं। बाजार में मिलावटी तिल का तेल बिना डर व भय के बेचा जा रहा है। सफेद वाला तिल 180 रुपये किलो व काला वाला 250 रुपये किलो बिक है।
जबकि धंधेबाज मिलावटी तिल का तेल 130 से 150 रुपये लीटर में बेच रहे हैं। सस्ता होने के कारण लोग इसे खरीद भी रहे हैं। ऐसे में शुद्धता की परवाह न करते हुए लोगों की आस्था के साथ जमकर खिलवाड़ किया जा रहा है।
विज्ञापन
इधर खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावटखोरी और एक्सपायरी डेट के खाद्य व पेय पदार्थों की बिक्री के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है।
चैत्र नवरात्र को देखते हुए जिले में 50 लाख से अधिक का मिलावटी तिल का तेल खपाने की योजना धंधेबाजों ने बनाई है। सफेद ऑयल में रंग मिलाकर पूजा का तेल तैयार कर बेचा जा रहा है।
विज्ञापन
खास बात यह है कि इस तिल के तेल में तिल का एक दाना नहीं पड़ा है। शहर के मोहन रोड, छहमुखी चौराहा, तिलक रोड, सब्जी मंडी, गल्ला मंडी, हनुमान मंदिर रोड की दुकानों पर छोटे और बड़े बोतल में बिक रहा तिल का तेल व इसका कलर देख के ही इसकी शुद्धता पर संदेह होने लगा रहा है। सुर्तीहट्टा रोड स्थित एक व्यापारी ने रविवार को इसे स्वीकार भी किया कि बोतल या खुले में बिक रहा तिल का तेल शुद्ध नहीं है। शुद्ध तिल का तेल जहां 250-300 रुपये किलो बिक रहा है। वहीं धंधेबाज इसे 130 से लेकर 150 रुपये ही उपलब्ध करा दे रहे हैं। इससे व्रत रखने वाले लोगों की सेहत को खतरा हो सकता है। बाजार में बिक रहे मिलावटी फलाहार भी व्रतियों की सेहत को खराब कर सकते हैं। ऐसे में खुद की जागरूकता से सेहत को बचाया जा सकता है।
मिलावटी फलाहार भी बना सकता है बीमार : वासंतिक नवरात्र में उपासक सबसे ज्यादा सिंघाड़े और कुटटू का आटा, तिन्नी का चावल, मूंगफली का दाना, रामदाना आदि खरीद रहे हैं।
धंधेबाज सिंघाड़े और कुटटू के आटे में खेल कर रहे हैं। सेहत का ध्यान न रख अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में मिलावटखोर सिंघाड़े व कुट्टू के आटे में आरारोट और चावल को पीस कर इसमें मिलाकर बेच रहे हैं। शुद्ध सिंघाड़ा और कुटट् का आटा 140 रुपये किलो बिक रहा है। इसकी आड़ में मिलावटखोर आरारोट और पिसा चावल मिलाकर किराने की दुकानों पर जुटे ग्राहकों को बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। साबूदाना, मूंगफली, तिल का तेल, देसी घी जैसे सामग्री की भी मांग बढ़ी हुई है। मूंगफली बाजार में तीन तरह की बिक रही है। इसमें थोड़ा काला कलर लिए 100 रुपये, उससे साफ 120 तो सफेद रंग में 140 रुपये किलो है।
देसी घी में मिलावट का खेल बड़े पैमाने पर चल रहा है। अनाम कंपनियों की पन्नी और डिब्बे में 100 से 200 ग्राम की पैकिंग में देसी घी बाजार में उपलब्ध है।