{"_id":"5b50c9d84f1c1b45748b5de8","slug":"91532021208-deoria-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेहतर होगी स्वास्थ्य सेवाएं,फौरन मिलेगा इलाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेहतर होगी स्वास्थ्य सेवाएं,फौरन मिलेगा इलाज
Updated Thu, 19 Jul 2018 10:56 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिहार और बलिया की भी स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करेगा मेडिकल कॉलेज
केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद जिले में छाई खुशी
कई वर्षों से उठ रही थी मांग, योगी सरकार में आई तेजी
इलाज के इंतजार में टूटती थी सांसे, मरीजों के बोझ तले दबा था जिला अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। बहुप्रतीक्षित मेडिकल कॉलेज को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद जिले के लोग खुशी से झूम उठे हैं। करीब 250 करोड़ की लागत से बनने वाले इस मेडिकल कॉलेज से देवरिया समेत सीमावर्ती बिहार और पड़ोसी बलिया, कुशीनगर की स्वास्थ्य सेवा भी सुदृढ़ होगी। जेई-एईएस के उपचार के लिए गोरखपुर मेडिकल कॉलेज का दबाव कम होगा तो रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे। लोगों ने इसे जिले के विकास में बड़ी सौगात करार दी है। अब उन्हें शिलान्यास और उद्घाटन का इंतजार है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगस्त में शिलान्यास भी होगा।
वर्ष 1952 में स्थापित जिला अस्पताल में भवन, संसाधन और स्टॉफ की व्यवस्था पुरानी ही है। लगातार बढ़ते मरीजों के दबाव के सापेक्ष डॉक्टर-कर्मचारियों और बेड की कमी से स्वास्थ्य सेवा बदहाल है। बेहतर उपचार के लिए लोगों को गोरखपुर, वाराणसी या शहर के महंगे निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है। दूरी अधिक होने और इलाज में देरी पर अधिकांश लोग बीच रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। उन मरीजों को अधिक परेशानी होती है, जो भाटपाररानी, सलेमपुर, पथरदेवा आदि क्षेत्रों से जिला अस्पताल आते हैं और फिर उन्हें मेडिकल कॉलेज भेज दिया जाता है। जिले में मेडिकल कॉलेज होने से न सिर्फ यह दुश्वारियां दूर होंगी, बल्कि डॉक्टरों की नई पौध तैयार होने से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा में भी सुधार होना तय है। कुशीनगर, बलिया के सीमावर्ती क्षेत्रों के अलावा बिहार के गोपालगंज, सीवान सहित अन्य जिलों के मरीज भी इससे लाभ उठाएंगे।
योगी और कलराज की पहल ने दिलाई मंजूरी
मेडिकल कॉलेज को मंजूरी दिलाने में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूर्व केंद्रीय मंत्री व सदर सांसद कलराज मिश्र की अहम भूमिका मानी जा रही है। मेडिकल कॉलेज के लिए वैसे तो 14 माह पूर्व ही 10 एकड़ जमीन का प्रस्ताव मांगा गया था। जिला प्रशासन ने उसरा बाजार में औद्योगिक क्षेत्र की भूमि का प्रस्ताव प्रेषित भी कर दिया। इस बीच कई पत्राचार हुआ, मगर इसमें तेजी तीन अप्रैल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा के बाद आई। जिला अस्पताल परिसर की 27 एकड़ जमीन में मेडिकल कॉलेज के प्रस्ताव को सीएम ने मंजूरी देकर केंद्र के पास भेजा तो सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र ने केंद्रीय कैबिनेट से स्वीकृति दिलाने के लिए पुरजोर पैरवी की।
विज्ञापन
कब-क्या हुआ...
* 09 मई 2017 को शासन ने पत्र भेजकर मेडिकल कॉलेज के लिए 10 एकड़ जमीन की मांग की गई।
* 16 मई को जिला प्रशासन ने उसरा बाजार में जमीन चिह्नित कर रिपोर्ट भेजी।
* 22 मई 2017 को जिला मुख्यालय से प्रस्तावित जमीन उसरा बाजार की दूरी शासन ने पूछा।
* 02 जून 2017 को डीएम सुजीत कुमार ने औद्योगिक क्षेत्र से जमीन क्रय करने के लिए रिपोर्ट भेजा।
* 6 फरवरी 2018 को जिला अस्पताल में बेड की जानकारी और 20 एकड़ जमीन के बारे में रिपोर्ट मांगी गई।
* 27 फरवरी को प्रशासन ने इसका जवाब भेजा।
* 03 अप्रैल को लबकनी में सीएम योगी आदित्यनाथ ने मेडिकल कॉलेज की घोषणा की।
* 10 मई को चिकित्सा व शिक्षा निदेशक केके गुप्ता के नेतृत्व में टीम ने सर्वे कर जिला अस्पताल में मेडिकल कॉलेज खोलने पर मुहर लगाया।
* 22 मई को इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई।
* 23 मई को प्रबंध निदेशक उप्र. राज्य औद्योगिक विकास लिमिटेड कानपुर को जमीन ने लेने के लिए डीएम ने पत्र भेजा।
विज्ञापन
केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद जिले में छाई खुशी
कई वर्षों से उठ रही थी मांग, योगी सरकार में आई तेजी
इलाज के इंतजार में टूटती थी सांसे, मरीजों के बोझ तले दबा था जिला अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। बहुप्रतीक्षित मेडिकल कॉलेज को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद जिले के लोग खुशी से झूम उठे हैं। करीब 250 करोड़ की लागत से बनने वाले इस मेडिकल कॉलेज से देवरिया समेत सीमावर्ती बिहार और पड़ोसी बलिया, कुशीनगर की स्वास्थ्य सेवा भी सुदृढ़ होगी। जेई-एईएस के उपचार के लिए गोरखपुर मेडिकल कॉलेज का दबाव कम होगा तो रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे। लोगों ने इसे जिले के विकास में बड़ी सौगात करार दी है। अब उन्हें शिलान्यास और उद्घाटन का इंतजार है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगस्त में शिलान्यास भी होगा।
वर्ष 1952 में स्थापित जिला अस्पताल में भवन, संसाधन और स्टॉफ की व्यवस्था पुरानी ही है। लगातार बढ़ते मरीजों के दबाव के सापेक्ष डॉक्टर-कर्मचारियों और बेड की कमी से स्वास्थ्य सेवा बदहाल है। बेहतर उपचार के लिए लोगों को गोरखपुर, वाराणसी या शहर के महंगे निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है। दूरी अधिक होने और इलाज में देरी पर अधिकांश लोग बीच रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। उन मरीजों को अधिक परेशानी होती है, जो भाटपाररानी, सलेमपुर, पथरदेवा आदि क्षेत्रों से जिला अस्पताल आते हैं और फिर उन्हें मेडिकल कॉलेज भेज दिया जाता है। जिले में मेडिकल कॉलेज होने से न सिर्फ यह दुश्वारियां दूर होंगी, बल्कि डॉक्टरों की नई पौध तैयार होने से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा में भी सुधार होना तय है। कुशीनगर, बलिया के सीमावर्ती क्षेत्रों के अलावा बिहार के गोपालगंज, सीवान सहित अन्य जिलों के मरीज भी इससे लाभ उठाएंगे।
विज्ञापन
योगी और कलराज की पहल ने दिलाई मंजूरी
मेडिकल कॉलेज को मंजूरी दिलाने में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूर्व केंद्रीय मंत्री व सदर सांसद कलराज मिश्र की अहम भूमिका मानी जा रही है। मेडिकल कॉलेज के लिए वैसे तो 14 माह पूर्व ही 10 एकड़ जमीन का प्रस्ताव मांगा गया था। जिला प्रशासन ने उसरा बाजार में औद्योगिक क्षेत्र की भूमि का प्रस्ताव प्रेषित भी कर दिया। इस बीच कई पत्राचार हुआ, मगर इसमें तेजी तीन अप्रैल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा के बाद आई। जिला अस्पताल परिसर की 27 एकड़ जमीन में मेडिकल कॉलेज के प्रस्ताव को सीएम ने मंजूरी देकर केंद्र के पास भेजा तो सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र ने केंद्रीय कैबिनेट से स्वीकृति दिलाने के लिए पुरजोर पैरवी की।
विज्ञापन
कब-क्या हुआ...
* 09 मई 2017 को शासन ने पत्र भेजकर मेडिकल कॉलेज के लिए 10 एकड़ जमीन की मांग की गई।
* 16 मई को जिला प्रशासन ने उसरा बाजार में जमीन चिह्नित कर रिपोर्ट भेजी।
* 22 मई 2017 को जिला मुख्यालय से प्रस्तावित जमीन उसरा बाजार की दूरी शासन ने पूछा।
* 02 जून 2017 को डीएम सुजीत कुमार ने औद्योगिक क्षेत्र से जमीन क्रय करने के लिए रिपोर्ट भेजा।
* 6 फरवरी 2018 को जिला अस्पताल में बेड की जानकारी और 20 एकड़ जमीन के बारे में रिपोर्ट मांगी गई।
* 27 फरवरी को प्रशासन ने इसका जवाब भेजा।
* 03 अप्रैल को लबकनी में सीएम योगी आदित्यनाथ ने मेडिकल कॉलेज की घोषणा की।
* 10 मई को चिकित्सा व शिक्षा निदेशक केके गुप्ता के नेतृत्व में टीम ने सर्वे कर जिला अस्पताल में मेडिकल कॉलेज खोलने पर मुहर लगाया।
* 22 मई को इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई।
* 23 मई को प्रबंध निदेशक उप्र. राज्य औद्योगिक विकास लिमिटेड कानपुर को जमीन ने लेने के लिए डीएम ने पत्र भेजा।