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सिक्का बने जी का जंजाल
Updated Mon, 16 Apr 2018 11:31 PM IST
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सिक्का
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। नोटबंदी के दिनों में बाजार में तेजी से दौड़ने वाला सिक्का इन दिनों लोगों के जी का जंजाल बन गया है। आलम यह है कि सिक्का देखते ही दुकानदार साफ मना कर दे रहे हैं। उनका कहना है कि बोरा भर सिक्का रखा है, इसे कहां ले जाऊं। कोई ऐसा दिन नहीं जाता जिस दिन सिक्के को लेकर ग्राहक और दुकानदारों के बीच किचकिच न होती हो। बैंक वाले भी सिक्का जमा करने से हाथ खड़ा कर दे रहे हैं। उनका कहना होता है कि स्टॉफ की कमी है, सिक्का कौन गिनेगा। ऐसे में पिस रहे हैं ग्राहक और दुकानदार।
इन दिनों फिर नोटबंदी जैसे हालात उत्पन्न हो गए हैं। शहर के अधिकांश एटीएम नोट उगल नहीं रहे हैं और बैंकों में करेंसी संकट है। सोमवार को बैंक खुले तो ग्राहकों की भीड़ उमड़ पड़ी। क्योंकि शादी-विवाह का दौर शुरू हो गया है। घरेलू खर्च के लिए सिक्का ही सहारा बचे हैं। अमूमन होता यह है कि लोग बाजार में खरीदारी करते वक्त मिलने वाले सिक्के को घर में इसलिए एकत्र कर लेते है कि गाढ़े वक्त काम आएगा। 14 अप्रैल को डॉ. आंबेडकर की जयंती और 15 को रविवार का अवकाश था। ऐसे में शहर के अधिकांश एटीएम नकदी विहीन हो गए थे। फिर सिक्के लोगों के सहारा बने लेकिन सिक्का देखते ही दुकानदारों की नाक-भौं सिकुड़ जाती है। सब्जी वाले भी मना करने लगते हैं। ऐसे में आम आदमी के लिए सिक्के जी का जंजाल बन गए हैं। बाजार का कोई भी ऐसा दुकानदार नहीं होगा जिसके यहां सिक्कों की भरमार न हो। बड़ा कारोबारी हो या छोटा, सब सिक्कों से परेशान हैं। कई ऐसे दुकानदार हैं जिनके यहां बोरों में सिक्के रखे हैं। बैंकों से सेटिंग कर वह धीरे-धीरे कर सिक्कों को जमा करते हैं। क्योंकि एक मुश्त सिक्का जमा करने पर बैंक नियमानुसार कटौती कर ली जाती है।
यूनियन बैंक मेन ब्रांच के प्रबंधक एसएन सिंह ने कहा कि सिक्के लेने से इन्कार नहीं है मगर अधिक मात्रा में ग्राहक सिक्के न लाएं। उन्होंने कहा कि एक हजार रुपये का सिक्का तुरंत जमा कर लिया जाता है। इससे अधिक के सिक्के जमा करने में परेशानी होती है। क्योंकि इसे रखने में दिक्कत होती है। सेंट्रल बैंक मुख्य शाखा के विवेक अग्रवाल का कहना है कि उनके शाखा में क्वाइन मशीन लगी है। पहले ग्राहक इसका इस्तेमाल करते थे लेकिन अब इसका इस्तेमाल नहीं के बराबर है। उन्होंने कहा कि बड़ी मात्रा में सिक्के लेना संभव नहीं है। क्योंकि धन निकालने आने वाले ग्राहक सिक्के लेने से साफ मना कर रहे हैं।
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एक का छोटा सिक्का बना खोटा
एक रुपये का छोटा सिक्का खोटा बन गया है। देवरिया जिले में इस सिक्के को कोई भी दुकानदार लेने को तैयार नहीं हैं। जबकि बैंकवालों का कहना है कि इस सिक्के के चलन पर कोई रोक नहीं है। बच्चे भी एक रुपये का छोटा सिक्का लेने से मना कर देते हैं। लोगों को घरों में एक रुपये का सिक्का शो पीस बन गया है। दुकानदार सोहन ने बताया कि जब बैंकवाले सिक्के नहीं लेते हैं तो हम क्यों एक रुपये का छोटा सिक्का लेकर दुकान में चिल्लर की भीड़ बढ़ाएं।
बैंकों में भी बड़े नोटों की कमी
बैंकों में दो हजार और पांच सौ के नोटों की कमी हो गई है। यही वजह है कि बैंक इन दिनों सौ-सौ के नोटों का भुगतान कर रहे हैं। शादी-विवाह के इस दौर में बैंकों से रकम निकासी भी बढ़ गई है। ऐसे में जिसके घर शादी-विवाह है वे बैंक से मोटी रकम घर ले जाते समय घबराते हैं। एक बैंक मैनेजर ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि इन दिनों आरबीआई से बड़े नोट कम आ रहे हैं। मौजूद बड़े नोटों को पहले एटीएम में डाला जाता है। इससे बचने पर ग्राहकों को दिया जा रहा है।
साबुन-सर्फ के थोक कारोबारी अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि उनके पास एक रुपये का छोटा सिक्का करीब 70 हजार रुपये का है। केनरा बैंक में उनका खाता है। वह बैंक में छोटा सिक्का जमा करने गए थे लेकिन बैंक ने 100 रुपये का सिक्का लेने को कहा। साथ ही यह भी कहा गया कि हर तीसरे दिन से 100 रुपये का सिक्का लेंगे। उन्होंने कहा कि फुटकर दुकानदार सबसे अधिक सिक्के लेकर आते हैं। यदि वह न ले तो उनका कारोबार चौपट हो जाएगा। किराना दुकानदार अखिलेश बरनवाल ने बताया कि उनके पास भी 20 हजार रुपये के सिक्के हैं। अब इसे खपाने में काफी परेशानी हो रही है।
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इन दिनों फिर नोटबंदी जैसे हालात उत्पन्न हो गए हैं। शहर के अधिकांश एटीएम नोट उगल नहीं रहे हैं और बैंकों में करेंसी संकट है। सोमवार को बैंक खुले तो ग्राहकों की भीड़ उमड़ पड़ी। क्योंकि शादी-विवाह का दौर शुरू हो गया है। घरेलू खर्च के लिए सिक्का ही सहारा बचे हैं। अमूमन होता यह है कि लोग बाजार में खरीदारी करते वक्त मिलने वाले सिक्के को घर में इसलिए एकत्र कर लेते है कि गाढ़े वक्त काम आएगा। 14 अप्रैल को डॉ. आंबेडकर की जयंती और 15 को रविवार का अवकाश था। ऐसे में शहर के अधिकांश एटीएम नकदी विहीन हो गए थे। फिर सिक्के लोगों के सहारा बने लेकिन सिक्का देखते ही दुकानदारों की नाक-भौं सिकुड़ जाती है। सब्जी वाले भी मना करने लगते हैं। ऐसे में आम आदमी के लिए सिक्के जी का जंजाल बन गए हैं। बाजार का कोई भी ऐसा दुकानदार नहीं होगा जिसके यहां सिक्कों की भरमार न हो। बड़ा कारोबारी हो या छोटा, सब सिक्कों से परेशान हैं। कई ऐसे दुकानदार हैं जिनके यहां बोरों में सिक्के रखे हैं। बैंकों से सेटिंग कर वह धीरे-धीरे कर सिक्कों को जमा करते हैं। क्योंकि एक मुश्त सिक्का जमा करने पर बैंक नियमानुसार कटौती कर ली जाती है।
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यूनियन बैंक मेन ब्रांच के प्रबंधक एसएन सिंह ने कहा कि सिक्के लेने से इन्कार नहीं है मगर अधिक मात्रा में ग्राहक सिक्के न लाएं। उन्होंने कहा कि एक हजार रुपये का सिक्का तुरंत जमा कर लिया जाता है। इससे अधिक के सिक्के जमा करने में परेशानी होती है। क्योंकि इसे रखने में दिक्कत होती है। सेंट्रल बैंक मुख्य शाखा के विवेक अग्रवाल का कहना है कि उनके शाखा में क्वाइन मशीन लगी है। पहले ग्राहक इसका इस्तेमाल करते थे लेकिन अब इसका इस्तेमाल नहीं के बराबर है। उन्होंने कहा कि बड़ी मात्रा में सिक्के लेना संभव नहीं है। क्योंकि धन निकालने आने वाले ग्राहक सिक्के लेने से साफ मना कर रहे हैं।
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एक का छोटा सिक्का बना खोटा
एक रुपये का छोटा सिक्का खोटा बन गया है। देवरिया जिले में इस सिक्के को कोई भी दुकानदार लेने को तैयार नहीं हैं। जबकि बैंकवालों का कहना है कि इस सिक्के के चलन पर कोई रोक नहीं है। बच्चे भी एक रुपये का छोटा सिक्का लेने से मना कर देते हैं। लोगों को घरों में एक रुपये का सिक्का शो पीस बन गया है। दुकानदार सोहन ने बताया कि जब बैंकवाले सिक्के नहीं लेते हैं तो हम क्यों एक रुपये का छोटा सिक्का लेकर दुकान में चिल्लर की भीड़ बढ़ाएं।
बैंकों में भी बड़े नोटों की कमी
बैंकों में दो हजार और पांच सौ के नोटों की कमी हो गई है। यही वजह है कि बैंक इन दिनों सौ-सौ के नोटों का भुगतान कर रहे हैं। शादी-विवाह के इस दौर में बैंकों से रकम निकासी भी बढ़ गई है। ऐसे में जिसके घर शादी-विवाह है वे बैंक से मोटी रकम घर ले जाते समय घबराते हैं। एक बैंक मैनेजर ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि इन दिनों आरबीआई से बड़े नोट कम आ रहे हैं। मौजूद बड़े नोटों को पहले एटीएम में डाला जाता है। इससे बचने पर ग्राहकों को दिया जा रहा है।
साबुन-सर्फ के थोक कारोबारी अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि उनके पास एक रुपये का छोटा सिक्का करीब 70 हजार रुपये का है। केनरा बैंक में उनका खाता है। वह बैंक में छोटा सिक्का जमा करने गए थे लेकिन बैंक ने 100 रुपये का सिक्का लेने को कहा। साथ ही यह भी कहा गया कि हर तीसरे दिन से 100 रुपये का सिक्का लेंगे। उन्होंने कहा कि फुटकर दुकानदार सबसे अधिक सिक्के लेकर आते हैं। यदि वह न ले तो उनका कारोबार चौपट हो जाएगा। किराना दुकानदार अखिलेश बरनवाल ने बताया कि उनके पास भी 20 हजार रुपये के सिक्के हैं। अब इसे खपाने में काफी परेशानी हो रही है।