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तीन घंटे पैमाइश में उलझी रही दो जिलों की टीम
Updated Fri, 11 May 2018 11:07 PM IST
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कपरवार में डीएम की चौपाल में बालू खनन की शिकायत पर जांच करने पहुंची दो जनपदों की टीम
- फोटो : अमर उजाला
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बरहज। घाघरा नदी से जिले की सीमा में अवैध खनन के मामले में गोरखपुर और देवरिया जिला प्रशासन के बीच गतिरोध उत्पन्न हो गया है। पिछले दिनों शिकायत के बाद बरहज एसडीएम अरुण सिंह ने अपनी जांच में जिले की सीमा में खनन की पुष्टि करते हुए रिपोर्ट दी थी, जिस पर डीएम ने पट्टा निरस्त करने की संस्तुति करते हुए गोरखपुर जिला प्रशासन को पत्र भेजा था। शुक्रवार को गोरखपुर की टीम पैमाइश करने पहुंची। तीन घंटे की पैमाइश के बाद टीम नदी के मध्य से सरहद तय करते हुए खनन को वैध बताकर लौट गई। इससे ग्रामीणों में असंतोष है। उधर, बरहज एसडीएम का कहना है कि रिपोर्ट नहीं मिली है। अगर ऐसा है तो वह अपनी आपत्ति दर्ज कराएंगे।
घाघरा नदी तट पर बसे दो जनपदों के गांव अक्सर बाढ़ में प्राकृतिक आपदाओं से दो-चार होते रहते हैं। कटान के कारण नदी दक्षिण से उत्तरायण हो चुकी है। लोगों की मानें तो नदी ने 2006 से 2015 तक कटान कर गोरखपुर जिले के कोलखास और कुरह परसियां गांव के अस्तित्व को खत्म कर दिया था। कटान को लेकर तत्कालीन प्रमुख सचिव ने पटना से भागलपुर तक डेंजर जोन घोषित किया था। करीब एक सप्ताह कपरवार में चौपाल में ग्रामीणों ने खनन विभाग की ओर से दिए गए पट्टा पर चिंता जताई थी। इस पर डीएम सुजीत कुमार ने प्रशासन को भेजकर खनन बंद करा दिया था। शुक्रवार को गोरखपुर जिले के तहसीलदार गोला प्रेमचंद्र मौर्य, नायब तहसीलदार भीमचंद, दिग्विजय सहित चार कानूनगो और नौ लेखपाल, जबकि बरहज कानूनगो त्रिभुवन गुप्ता, राधेश्याम, योगेंद्र तिवारी और चंद्रभूषण तिवारी सहित पांच लेखपालों की टीम करीब दस बजे मौके पर पहुंची। करीब तीन घंटे तक कड़ी मशक्कत के बाद टीम ने नदी के आधार पर सीमांकन किया, लेकिन किसी ने खनन से होने वाले खतरे पर गौर नहीं किया। इससे लोगों में नाराजगी है। इस संबंध में एसडीएम अरुण सिंह का कहना था कि नदी की धारा बदलती रहती है। इसे आधार मानकर सीमांकन नहीं किया जा सकता। गोरखपुर प्रशासन की रिपोर्ट अभी मिली नहीं है। इस पर आपत्ति दर्ज कराई जाएगी।
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घाघरा नदी तट पर बसे दो जनपदों के गांव अक्सर बाढ़ में प्राकृतिक आपदाओं से दो-चार होते रहते हैं। कटान के कारण नदी दक्षिण से उत्तरायण हो चुकी है। लोगों की मानें तो नदी ने 2006 से 2015 तक कटान कर गोरखपुर जिले के कोलखास और कुरह परसियां गांव के अस्तित्व को खत्म कर दिया था। कटान को लेकर तत्कालीन प्रमुख सचिव ने पटना से भागलपुर तक डेंजर जोन घोषित किया था। करीब एक सप्ताह कपरवार में चौपाल में ग्रामीणों ने खनन विभाग की ओर से दिए गए पट्टा पर चिंता जताई थी। इस पर डीएम सुजीत कुमार ने प्रशासन को भेजकर खनन बंद करा दिया था। शुक्रवार को गोरखपुर जिले के तहसीलदार गोला प्रेमचंद्र मौर्य, नायब तहसीलदार भीमचंद, दिग्विजय सहित चार कानूनगो और नौ लेखपाल, जबकि बरहज कानूनगो त्रिभुवन गुप्ता, राधेश्याम, योगेंद्र तिवारी और चंद्रभूषण तिवारी सहित पांच लेखपालों की टीम करीब दस बजे मौके पर पहुंची। करीब तीन घंटे तक कड़ी मशक्कत के बाद टीम ने नदी के आधार पर सीमांकन किया, लेकिन किसी ने खनन से होने वाले खतरे पर गौर नहीं किया। इससे लोगों में नाराजगी है। इस संबंध में एसडीएम अरुण सिंह का कहना था कि नदी की धारा बदलती रहती है। इसे आधार मानकर सीमांकन नहीं किया जा सकता। गोरखपुर प्रशासन की रिपोर्ट अभी मिली नहीं है। इस पर आपत्ति दर्ज कराई जाएगी।
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