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बदनीयती नहीं थी, गाड़ी चोरी की तुरंत दर्ज कराई थी रपट
Updated Tue, 27 Jun 2017 10:31 PM IST
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देवरिया। सरकारी गाड़ी के निजी उपयोग के दौरान चोरी होने के मुद्दे पर एसपी ने कहा कि बदनीयती नहीं थी। गाड़ी चोरी होने की सूचना तत्काल लखनऊ के हजरतगंज थाने में दर्ज कराई गई। गाड़ी बरामद कराने में भी अहम भूमिका रही। अलबत्ता सरकारी गाड़ी के निजी उपयोग के सवाल पर वह कुछ भी बोलने से बचते रहे।
देवरिया के एसपी राजीव मल्होत्रा जब हरदोई के एसपी हुआ करते थे तो पुलिस लाइंस से सरकारी गाड़ी लखनऊ के अपने निजी आवास शालीमार इंपीरियल अपार्टमेंट भेजा था। इसी दौरान गाड़ी चोरी हो गई। आरोप तो यह भी है कि बिना वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दिए हुए सरकारी गाड़ी को लखनऊ भेजा गया था। मामले की जांच तत्कालीन डीआईजी प्रवीण कुमार ने एडीजी कानून व्यवस्था के निर्देश पर की थी। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही से सरकारी गाड़ी चोरी हुई है। अब सवाल यह उठता है कि बेदाग अधिकारियों को जिले में तैनात करने का दावा करने वाली भाजपा सरकार में देवरिया में पुलिस के उच्च पद पर एक ऐसे अधिकारी को क्यों भेजा गया, जिसके ऊपर पहले से दाग लगे हैं। एसपी राजीव मल्होत्रा का कहना है कि सरकारी गाड़ी में खराबी थी। बनने के लिए लखनऊ जा रही थी। लिहाजा बेटे को उस गाड़ी से भेज दिया, कोई बदनीयती नहीं रही। सूचना मिलते ही तत्काल लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली में रपट दर्ज कराई गई। एसओजी प्रभारी जटाशंकर सिंह और उनकी टीम ने गाड़ी को बरामद किया था। चोरी करने वाले को भी पकड़ लिए गए थे। हालांकि जांच अधिकारी प्रवीण कुमार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि तत्कालीन एसपी हरदोई को गाड़ी चोरी होने की सूचना थी, लेकिन उन्होंने उच्चाधिकारियों को पहले नहीं बताया और न ही पहले कोई एफआईआर दर्ज कराई। यह लापरवाही नहीं होती तो गाड़ी को दूसरे प्रदेश में जाने से रोका जा सकता था।
सरकार सही ढंग से काम नहीं कर रही है। अधिकारियों का ट्रांसफर और पोस्टिंग करना सरकार काम है। वह जिसे चाहे पोस्ट कर देगी। यदि दागी को पोस्टिंग देगी तो आने वाले समय में जनता उनको बताएगी।
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रामइकबाल यादव, जिलाध्यक्ष, सपा।
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देवरिया के एसपी राजीव मल्होत्रा जब हरदोई के एसपी हुआ करते थे तो पुलिस लाइंस से सरकारी गाड़ी लखनऊ के अपने निजी आवास शालीमार इंपीरियल अपार्टमेंट भेजा था। इसी दौरान गाड़ी चोरी हो गई। आरोप तो यह भी है कि बिना वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दिए हुए सरकारी गाड़ी को लखनऊ भेजा गया था। मामले की जांच तत्कालीन डीआईजी प्रवीण कुमार ने एडीजी कानून व्यवस्था के निर्देश पर की थी। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही से सरकारी गाड़ी चोरी हुई है। अब सवाल यह उठता है कि बेदाग अधिकारियों को जिले में तैनात करने का दावा करने वाली भाजपा सरकार में देवरिया में पुलिस के उच्च पद पर एक ऐसे अधिकारी को क्यों भेजा गया, जिसके ऊपर पहले से दाग लगे हैं। एसपी राजीव मल्होत्रा का कहना है कि सरकारी गाड़ी में खराबी थी। बनने के लिए लखनऊ जा रही थी। लिहाजा बेटे को उस गाड़ी से भेज दिया, कोई बदनीयती नहीं रही। सूचना मिलते ही तत्काल लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली में रपट दर्ज कराई गई। एसओजी प्रभारी जटाशंकर सिंह और उनकी टीम ने गाड़ी को बरामद किया था। चोरी करने वाले को भी पकड़ लिए गए थे। हालांकि जांच अधिकारी प्रवीण कुमार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि तत्कालीन एसपी हरदोई को गाड़ी चोरी होने की सूचना थी, लेकिन उन्होंने उच्चाधिकारियों को पहले नहीं बताया और न ही पहले कोई एफआईआर दर्ज कराई। यह लापरवाही नहीं होती तो गाड़ी को दूसरे प्रदेश में जाने से रोका जा सकता था।
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सरकार सही ढंग से काम नहीं कर रही है। अधिकारियों का ट्रांसफर और पोस्टिंग करना सरकार काम है। वह जिसे चाहे पोस्ट कर देगी। यदि दागी को पोस्टिंग देगी तो आने वाले समय में जनता उनको बताएगी।
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रामइकबाल यादव, जिलाध्यक्ष, सपा।