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Deoria News: 80% सीएचसी में स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं...निजी अस्पतालों की चांदी

Sun, 03 Aug 2025 11:48 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Updated Sun, 03 Aug 2025 11:48 PM IST
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80% CHCs do not have gynecologists...private hospitals are making a killing
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भटनी
संवाद न्यूज एजेंसी
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देवरिया। जननी सुरक्षा योजना के तहत मातृ-शिशु मृत्यु दर कम करने की सरकार की कवायद जिले में बेमानी साबित होती नजर आ रही है। दरअसल, 16 सीएचसी में महज तीन पर ही स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ की तैनाती है जहां महिलाओं को परामर्श और इलाज मिल पाता है।
अन्य 13 सीएचसी से जुड़े यानी 80 फीसदी इलाके की महिलाओं के लिए मेडिकल कॉलेज के अलावा कहीं कोई सरकारी इंताजाम नहीं है। झोलाछाप और निजी अस्पतालों के दलाल इसका फायदा उठा रहे हैं। इसी का नतीजा है कि आए दिन प्रसूताओं को जान गंवानी पड़ती है।
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जिले की महिलाओं को परामर्श और इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज के बाद निजी अस्पताल का ही सहारा हैं। 16 सीएचसी में इस समय सलेमपुर में डॉ. योगेंद्र प्रसाद, गौरी बाजार में डॉ. अर्पणा, रुद्रपुर में डॉ. सुनीता कुशवाहा की तैनाती है। पांच अन्य अस्पतालों में तैनात रहीं विशेषज्ञ डॉक्टर इस्तीफा दे चुकीं हैं।
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ऐसे में अधिकतर इलाकों को महिलाओं को इलाज के लिए मेडिकल काॅलेज का रुख करना पड़ता है। प्रसव के लिए ऑपरेशन की जरूरत पर खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। दूर-दराज के गांव से मेडिकल कॉलेज की दूरी सोचकर ही परिजन घबरा जाते हैं और इसी का फायदा दलाल उठाते हैं। तीमारदारों को जल्द और बेहतर इलाज का झांसा देते हैं, मरीजों को निजी अस्पतालों में ले जाते हैं। ऐसे में एक तरफ जहां मरीज का आर्थिक शोषण होता है वहीं जान को भी खतरा होता है। भटनी सीएचसी पर प्रसव पूर्व जांच, स्त्री रोग संबंधी सलाह और अन्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। भटनी की रहने वाली संगीता ने बताया कि पहले एक डॉक्टर थीं, लेकिन वह चली गई। अब कई बार स्टाफ नर्स और फार्मासिस्ट से ही स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बताकर दवा लेनी पड़ती है। संगीता ने बताया कि उन्हें हर महीने जांच के लिए देवरिया जाना पड़ता है, इसमें समय और धन दोनों ज्यादा खर्च होता है। कई बार तो जांच छूट भी जाती है। देसही देवरिया विकास खंड क्षेत्र में दो पिपरा दौलाकदम और धमउर गांव में एक-एक सीएचसी स्थित है। पिपरा दौलाकदम पुराना सीएचसी है। यहां मरीजों की भीड़ होती है। दोनों जगह स्त्री रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं होने से जिला मुख्यालय जाना पड़ता है। इस सुदूर इलाके की महिला रोगियों को तबीयत खराब होने पर परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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