{"_id":"5ad78ce34f1c1b320a8b5481","slug":"61524075747-deoria-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिख धर्म की खूबियों का संदेश दे रहे ‘लाल’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सिख धर्म की खूबियों का संदेश दे रहे ‘लाल’
Updated Thu, 19 Apr 2018 12:13 AM IST
विज्ञापन
अमृत सर के लाल सिंह अपने पुरे कुनबे के साथ देवरिया से पटना साहिब के लिए बुधवार को दोपहर पैदल रवाना हुए।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देवरिया। पांच तख्तों का दर्शन करने के उद्देश्य अमृतसर से निकले लाल सिंह एवं उनका परिवार बुधवार को अपने अंतिम पड़ाव पटना साहिब के दर्शन के लिए रवाना हुआ। मंगलवार की रात देवरिया पहुंचे इस परिवार का शहर के सिख संगत ने स्वागत किया। न्यू कॉलोनी स्थित गुरुद्वारे में उन्होंने रात बीताकर अगले दिन पटना के लिए पैदल यात्रा की शुरुआत की। यात्रा में मिलने वालों को वह सिख धर्म की खूबियों को बता रहे हैं।
वर्ष 2014 में अपने पैदल यात्रा की शुरुआत करने वाले लाल सिंह ने बुधवार को बताया कि वह अब तक श्रीअकाल तख्त अमृतसर, तख्त श्रीदमदमा साहिब तलबंडी साबू भटिंडा, केशवगढ़ साहिब अनंत प्रसाद और नादेड़ साहिब (महाराष्ट्र) का पैदल ही दर्शन कर चुके हैं। अब अंतिम यात्रा पांचवां तख्त श्री पटना साहिब हरमिंदर साहिब बचा हुआ है। उनके साथ पत्नी सर्वजीत कौर, बेटा सुखमंजीत सिंह, हरप्रीत सिंह और बेटियां दलजीत कौर व साहब कौर भी हैं। अपने धर्म के प्रति आस्था व विश्वास के चलते वह पैदल यात्रा कर रहे हैं, ताकि अन्य लोगों को भी सिख धर्म की खूबियों के बारे में पता चले। सुबह में गुरुद्वारे में अरदास के बाद इन सभी पैदल यात्रियों को रवाना किया गया। ज्ञानी दामोदर सिंह ने बताया कि लाल सिंह इस कठिन यात्रा से साबित कर रहे हैं कि पंजाब की भूमि में आज भी सच्चे और मजबूत सिख हैं। जो गुरु गोविंद सिंह के बताए मार्ग पर चलने के लिए अपने परिवार को भी न्यौछावर कर सकते हैं।
विज्ञापन
वर्ष 2014 में अपने पैदल यात्रा की शुरुआत करने वाले लाल सिंह ने बुधवार को बताया कि वह अब तक श्रीअकाल तख्त अमृतसर, तख्त श्रीदमदमा साहिब तलबंडी साबू भटिंडा, केशवगढ़ साहिब अनंत प्रसाद और नादेड़ साहिब (महाराष्ट्र) का पैदल ही दर्शन कर चुके हैं। अब अंतिम यात्रा पांचवां तख्त श्री पटना साहिब हरमिंदर साहिब बचा हुआ है। उनके साथ पत्नी सर्वजीत कौर, बेटा सुखमंजीत सिंह, हरप्रीत सिंह और बेटियां दलजीत कौर व साहब कौर भी हैं। अपने धर्म के प्रति आस्था व विश्वास के चलते वह पैदल यात्रा कर रहे हैं, ताकि अन्य लोगों को भी सिख धर्म की खूबियों के बारे में पता चले। सुबह में गुरुद्वारे में अरदास के बाद इन सभी पैदल यात्रियों को रवाना किया गया। ज्ञानी दामोदर सिंह ने बताया कि लाल सिंह इस कठिन यात्रा से साबित कर रहे हैं कि पंजाब की भूमि में आज भी सच्चे और मजबूत सिख हैं। जो गुरु गोविंद सिंह के बताए मार्ग पर चलने के लिए अपने परिवार को भी न्यौछावर कर सकते हैं।
विज्ञापन