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हथुआ-भटनी रेल परियोजना: किसानों से सीधे वार्ता करे रेल प्रशासन
Updated Mon, 05 Mar 2018 11:06 PM IST
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देवरिया। पूर्व रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट किसानों के विरोध की वजह से अब तक परवान नहीं चढ़ सका है। तमाम प्रयासों के बाद अब जिला प्रशासन ने भी इससे अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं। जिलाधिकारी ने पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य इंजीनियर को किसानों से सीधे वार्ता करने के लिए पत्र लिखा है। साथ ही, इसके लिए किसी सक्षम अधिकारी को नामित करने और किसानों की सहमति के बाद भूमि दर निर्धारण समिति की बैठक कराने को कहा है।
हथुआ-भटनी 79.74 किलोमीटर की नई रेल लाइन परियोजना को वर्ष 2005 में स्वीकृति मिली। इसके लिए जिले के सलेमपुर तहसील के तीन और भाटपाररानी तहसील के 11 गांवों की 41.902 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत कर ली गई। प्रस्तावित रेलवे लाइन पूर्व रेलमंत्री के ससुराल और उनके कई रिश्तेदारों के गांवों को जोड़ती है। इस परियोजना के लिए रेलवे की ओर से जिला प्रशासन को 9.24 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। इसमें से 86 लाख रुपये खर्च भी हो चुके हैं। मुआवजे के संबंध में पूर्व में किसानों और जिला प्रशासन तथा रेल प्रशासन के बीच कई दौर की वार्ता हुई लेकिन बात 13 साल बाद भी नहीं बनी।
प्रशासनिक अफसरों के मुताबिक रेलवे के अफसर खुद बात करने के बजाए जिला प्रशासन पर किसानों से वार्ता करने और मुआवजे का रेट निर्धारित करने के लिए दबाव डाल रहे हैं। किसानों के विरोध की वजह से जिला प्रशासन वार्ता करने से कतरा रहा है। डीएम सुजीत कुमार ने बताया कि रेल प्रशासन को किसानों से वार्ता करने में खुद रुचि लेनी चाहिए। इसके लिए एक सप्ताह पूर्व पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य इंजीनियर (निर्माण) को पत्र भेजा गया है।
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किसान विरोधी है रेल परियोजना : संघर्ष समिति
भटनी-हथुआ परियोजना का प्रभावित गांवों के किसान वर्ष 2008 से विरोध कर रहे हैं। किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष टीएन मिश्रा का कहना है कि यह रेल परियोजना किसान विरोधी है। पूर्व रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ससुराल और रिश्तेदारों को रेल लाइन से जोड़ने के लिए अपने कार्यकाल में इस परियोजना को स्वीकृत किया। किसान अंत तक इस परियोजना का विरोध करेंगे।
देवरिया के इन गांवों के किसानों की पड़ रही जमीन
भटनी-हथुआ रेल परियोजना में हतवा, नकहनी, तेनुआ, जिगिना मिश्र, रायबारी, पिपरा बिठ्ठल, घांटी, मायापुर, घांटी खास, चौरिया बनकटा तिवारी, अमवां, सिंहपुर, धर्मखोर बाबू, इमिलिया गांवों के किसानों की जमीन शामिल है। फिलहाल करार नियमावली के तहत प्रतिकार तय करने के लिए किसानों से वार्ता का पेंच फंसा है।
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हथुआ-भटनी 79.74 किलोमीटर की नई रेल लाइन परियोजना को वर्ष 2005 में स्वीकृति मिली। इसके लिए जिले के सलेमपुर तहसील के तीन और भाटपाररानी तहसील के 11 गांवों की 41.902 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत कर ली गई। प्रस्तावित रेलवे लाइन पूर्व रेलमंत्री के ससुराल और उनके कई रिश्तेदारों के गांवों को जोड़ती है। इस परियोजना के लिए रेलवे की ओर से जिला प्रशासन को 9.24 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। इसमें से 86 लाख रुपये खर्च भी हो चुके हैं। मुआवजे के संबंध में पूर्व में किसानों और जिला प्रशासन तथा रेल प्रशासन के बीच कई दौर की वार्ता हुई लेकिन बात 13 साल बाद भी नहीं बनी।
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प्रशासनिक अफसरों के मुताबिक रेलवे के अफसर खुद बात करने के बजाए जिला प्रशासन पर किसानों से वार्ता करने और मुआवजे का रेट निर्धारित करने के लिए दबाव डाल रहे हैं। किसानों के विरोध की वजह से जिला प्रशासन वार्ता करने से कतरा रहा है। डीएम सुजीत कुमार ने बताया कि रेल प्रशासन को किसानों से वार्ता करने में खुद रुचि लेनी चाहिए। इसके लिए एक सप्ताह पूर्व पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य इंजीनियर (निर्माण) को पत्र भेजा गया है।
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किसान विरोधी है रेल परियोजना : संघर्ष समिति
भटनी-हथुआ परियोजना का प्रभावित गांवों के किसान वर्ष 2008 से विरोध कर रहे हैं। किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष टीएन मिश्रा का कहना है कि यह रेल परियोजना किसान विरोधी है। पूर्व रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ससुराल और रिश्तेदारों को रेल लाइन से जोड़ने के लिए अपने कार्यकाल में इस परियोजना को स्वीकृत किया। किसान अंत तक इस परियोजना का विरोध करेंगे।
देवरिया के इन गांवों के किसानों की पड़ रही जमीन
भटनी-हथुआ रेल परियोजना में हतवा, नकहनी, तेनुआ, जिगिना मिश्र, रायबारी, पिपरा बिठ्ठल, घांटी, मायापुर, घांटी खास, चौरिया बनकटा तिवारी, अमवां, सिंहपुर, धर्मखोर बाबू, इमिलिया गांवों के किसानों की जमीन शामिल है। फिलहाल करार नियमावली के तहत प्रतिकार तय करने के लिए किसानों से वार्ता का पेंच फंसा है।