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ठेकेदार पर सीएमओ मेहरबान,नहीं हो रहा टेंडर
Updated Fri, 18 Aug 2017 11:04 PM IST
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देवरिया। पिछली सरकार में नेताओं के करीबी रहने वाले ठेकेदार पर विभागीय अफसरों की मेहरबानी कम नहीं हो रही है। सत्ता की हनक में एक ही फर्म मालिक को तीन जिलों में स्वास्थ्य विभाग को वाहन उपलब्ध कराने का टेंडर दे दिया गया। सत्ता बदलने के बाद शासन से नया टेंडर कराने के लिए कई बार पत्र आया, लेकिन अभी तक तीनों जिलों में टेंडर सीएमओ की ओर से नहीं किया गया है।
एनआरएचएम के तहत जिले के सभी सीएचसी और जरूरत के हिसाब से पीएचसी पर बोलेरो रखा गया है। इसके लिए करीब दो साल पहले टेंडर हुआ। सौरभ ट्रेडर्स एवं ट्रैवेल्स एजेंसी को टेंडर दिया गया। इस फर्म को सिर्फ देवरिया में नहीं, बल्कि बस्ती और पडरौना जिले में भी टेंडर मिला है। तीनों जिलों में 130 से अधिक बोलेरो चल रही हैं। ठेकेदार मानक को दरकिनार कर लोगों का बोलेरो चलवा रहा है। इसमें कई ऐसे बोलेरो मालिक हैं जिन्होंने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि समय से किसी गाड़ी मालिक को भुगतान नहीं दिया जाता है। विरोध करने पर गाड़ी हटाने की धमकी दी जाती है। जिले के एक सपा नेता का करीबी रहने वाले फर्म मालिक पर स्वास्थ्य महकमा इस कदर मेहरबान है कि नए सिरे से टेंडर करने से कतरा रहा है। यह टेंडर सिर्फ एक साल के लिए होता है। शासन ने इसके लिए कई बार संबंधित जिले के सीएमओ को पत्र भेजकर टेंडर कराने का निर्देश दिया। सूत्रों की मानें तो जिले में कई ऐसे अस्पताल हैं, जहां वाहन चलने के बजाए सिर्फ खड़ी रहती हैं। इस बाबत सीएमओ डॉ. रामनिवास ने बताया कि टेंडर कराने के लिए कागजी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। ई-टेंडरिंग के जरिए जल्द ही टेंडर कराया जाएगा।
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एनआरएचएम के तहत जिले के सभी सीएचसी और जरूरत के हिसाब से पीएचसी पर बोलेरो रखा गया है। इसके लिए करीब दो साल पहले टेंडर हुआ। सौरभ ट्रेडर्स एवं ट्रैवेल्स एजेंसी को टेंडर दिया गया। इस फर्म को सिर्फ देवरिया में नहीं, बल्कि बस्ती और पडरौना जिले में भी टेंडर मिला है। तीनों जिलों में 130 से अधिक बोलेरो चल रही हैं। ठेकेदार मानक को दरकिनार कर लोगों का बोलेरो चलवा रहा है। इसमें कई ऐसे बोलेरो मालिक हैं जिन्होंने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि समय से किसी गाड़ी मालिक को भुगतान नहीं दिया जाता है। विरोध करने पर गाड़ी हटाने की धमकी दी जाती है। जिले के एक सपा नेता का करीबी रहने वाले फर्म मालिक पर स्वास्थ्य महकमा इस कदर मेहरबान है कि नए सिरे से टेंडर करने से कतरा रहा है। यह टेंडर सिर्फ एक साल के लिए होता है। शासन ने इसके लिए कई बार संबंधित जिले के सीएमओ को पत्र भेजकर टेंडर कराने का निर्देश दिया। सूत्रों की मानें तो जिले में कई ऐसे अस्पताल हैं, जहां वाहन चलने के बजाए सिर्फ खड़ी रहती हैं। इस बाबत सीएमओ डॉ. रामनिवास ने बताया कि टेंडर कराने के लिए कागजी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। ई-टेंडरिंग के जरिए जल्द ही टेंडर कराया जाएगा।
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