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रुपये के इंतजार में अधूरे पड़े शौचालय
Updated Fri, 06 Oct 2017 10:23 PM IST
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विश्वविजय त्रिपाठी
रुद्रपुर। केंद्र और प्रदेश सरकार की महत्वपूर्ण खुले में शौच मुक्त गांव बनाने की योजना धरातल पर परवान नहीं चढ़ पा रही। निर्माण धनराशि की लेटलतीफी के कारण गांव में अधूरे पड़े शौचालय उपयोग में आने के पहले ही ढहने लगे हैं। ऐसे में गांव को खुले में शौच मुक्त करना चुनौती बना है। क्षेत्र के 24 गांवों को पहले फेज में ओडीएफ करने का लक्ष्य दिया गया है। कई गांवों में शौचालय बनाने को पहली किस्त की धनराशि ही नहीं पहुंच पाई है। गांवों में शौचालय बनाने को 12 हजार रुपये अनुदान के रूप में दिए जा रहे हैं। पौहृयिा, तारासारा, पचमा, हड़हा, अवस्थी, सिलहटा, मांगा कोड़र, एकला मिश्रौलिया, बेलवा दुबौली, पचरुखा, अम्मा उर्फ अमवा, जगत माझा, माझा नरायन, सेमरौना, कुरैती, गाजीपुर भैंसही, सरांव खुर्द, खोपा, बभवली, महदहा, जंगल भुसउल, बौरडीह, पांडेय माझा, शीतल माझा और सरांव खुर्द गांव में 2940 शौचालय बनवाए जाने का लक्ष्य निर्धारित है। अब तक करीब एक हजार परिवारों को पहली किस्त में छह हजार रुपये भेजे गए हैं। गांवों में लोग आधे-अधूरे शौचालय बनवा कर दूसरी किस्त के इंतजार में बैठे हैं। ऐसे में गांव को खुले में शौच मुक्त करना मुश्किल लग रहा। बीडीओ रामबिलास राय ने कहा कि शौचालय बनवाने को दूसरी किस्त की धनराशि दिलाए जाने की मांग भेजी गई है। गांव में बन रहे शौचालयों की मानीटरिंग की जा रही है।
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रुद्रपुर। केंद्र और प्रदेश सरकार की महत्वपूर्ण खुले में शौच मुक्त गांव बनाने की योजना धरातल पर परवान नहीं चढ़ पा रही। निर्माण धनराशि की लेटलतीफी के कारण गांव में अधूरे पड़े शौचालय उपयोग में आने के पहले ही ढहने लगे हैं। ऐसे में गांव को खुले में शौच मुक्त करना चुनौती बना है। क्षेत्र के 24 गांवों को पहले फेज में ओडीएफ करने का लक्ष्य दिया गया है। कई गांवों में शौचालय बनाने को पहली किस्त की धनराशि ही नहीं पहुंच पाई है। गांवों में शौचालय बनाने को 12 हजार रुपये अनुदान के रूप में दिए जा रहे हैं। पौहृयिा, तारासारा, पचमा, हड़हा, अवस्थी, सिलहटा, मांगा कोड़र, एकला मिश्रौलिया, बेलवा दुबौली, पचरुखा, अम्मा उर्फ अमवा, जगत माझा, माझा नरायन, सेमरौना, कुरैती, गाजीपुर भैंसही, सरांव खुर्द, खोपा, बभवली, महदहा, जंगल भुसउल, बौरडीह, पांडेय माझा, शीतल माझा और सरांव खुर्द गांव में 2940 शौचालय बनवाए जाने का लक्ष्य निर्धारित है। अब तक करीब एक हजार परिवारों को पहली किस्त में छह हजार रुपये भेजे गए हैं। गांवों में लोग आधे-अधूरे शौचालय बनवा कर दूसरी किस्त के इंतजार में बैठे हैं। ऐसे में गांव को खुले में शौच मुक्त करना मुश्किल लग रहा। बीडीओ रामबिलास राय ने कहा कि शौचालय बनवाने को दूसरी किस्त की धनराशि दिलाए जाने की मांग भेजी गई है। गांव में बन रहे शौचालयों की मानीटरिंग की जा रही है।