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हाइवे पर जमीन की रजिस्ट्री कराने के आरोप में चार लेखपाल निलंबित
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हाइवे पर जमीन की रजिस्ट्री कराने के आरोप में चार लेखपाल निलंबित
देवरिया। गोरखपुर रोड पर हाईवे के किनारे एसएसबीएल इंटर कालेज के सामने तकरीबन दो कट्ठा जमीन अपनों के नाम बैनामा कराने के मामले में देवरिया सदर, सलेमपुर, भाटपाररानी तहसीलों में तैनात चार लेखपालों को संबंधित तहसीलों के एसडीएम ने निलंबित कर दिया है। आरोप है कि बिना विभागीय अनुमति के अपने परिवार के लोगों के नाम दो कट्टा भूमि बैनामा करा लिया। अमर उजाला ने इस मामले में आठ अगस्त को ‘चार राजस्वकर्मियों ने दो कट्टा भूमि करा ली अपनों के नाम’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की तो डीएम आशुतोष निरंजन ने जांच बैठा दी थी।
जांच के तकरीबन 50 दिन बाद चार लेखपालों पर कार्रवाई की गाज गिरी है। सदर तहसील में तैनात लेखपाल बैरिस्टर चतुर्वेदी, संदीप यादव, गजेंद्र दीक्षित, लालटू सिंह ने अपने परिवार के सदस्यों के नाम तकरीबन 28 एयर जमीन का बैनामा करा लिया। सात लोगों ने यह रजिस्ट्री उन्हें अलग-अलग नाम से की। इसकी बाजार में कीमत दो से ढाई करोड़ की है। कमिश्नर गोरखपुर एवं डीएम से किसी ने गोपनीय शिकायत की तो अमर उजाला ने इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसके बाद डीएम ने मुख्य राजस्व अधिकारी अमृतलाल बिंद, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट गुंजन द्विवेदी, एसडीएम बरहज संजीव यादव की संयुक्त टीम बनाकर जांच का निर्देश दिया। इस दौरान बैरिस्टर चतुर्वेदी को सलेमपुर, गजेंद्र दीक्षित, संदीप यादव को भाटपाररानी स्थानांतरित कर दिया गया था। लालटू सिंह देवरिया सदर तहसील में स्थानांतरित किया गया। सूत्रों की मानें तो जांच टीम के एक अफसर की भूमिका शक के दायरे में थी। उन्होंने पूरे मामले की लीपापोती करने का प्रयास करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। डीएम आशुतोष निरंजन ने बताया कि पूर्व नियुक्ति प्राधिकारी से बिना अनुमति के बैनामा लेना कर्मचारी आचरण नियमावली के विरुद्ध है। इस आरोप में चार लेखपालों को संबंधित एसडीएम ने निलंबित कर जांच बैठा दी है।
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देवरिया। गोरखपुर रोड पर हाईवे के किनारे एसएसबीएल इंटर कालेज के सामने तकरीबन दो कट्ठा जमीन अपनों के नाम बैनामा कराने के मामले में देवरिया सदर, सलेमपुर, भाटपाररानी तहसीलों में तैनात चार लेखपालों को संबंधित तहसीलों के एसडीएम ने निलंबित कर दिया है। आरोप है कि बिना विभागीय अनुमति के अपने परिवार के लोगों के नाम दो कट्टा भूमि बैनामा करा लिया। अमर उजाला ने इस मामले में आठ अगस्त को ‘चार राजस्वकर्मियों ने दो कट्टा भूमि करा ली अपनों के नाम’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की तो डीएम आशुतोष निरंजन ने जांच बैठा दी थी।
जांच के तकरीबन 50 दिन बाद चार लेखपालों पर कार्रवाई की गाज गिरी है। सदर तहसील में तैनात लेखपाल बैरिस्टर चतुर्वेदी, संदीप यादव, गजेंद्र दीक्षित, लालटू सिंह ने अपने परिवार के सदस्यों के नाम तकरीबन 28 एयर जमीन का बैनामा करा लिया। सात लोगों ने यह रजिस्ट्री उन्हें अलग-अलग नाम से की। इसकी बाजार में कीमत दो से ढाई करोड़ की है। कमिश्नर गोरखपुर एवं डीएम से किसी ने गोपनीय शिकायत की तो अमर उजाला ने इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसके बाद डीएम ने मुख्य राजस्व अधिकारी अमृतलाल बिंद, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट गुंजन द्विवेदी, एसडीएम बरहज संजीव यादव की संयुक्त टीम बनाकर जांच का निर्देश दिया। इस दौरान बैरिस्टर चतुर्वेदी को सलेमपुर, गजेंद्र दीक्षित, संदीप यादव को भाटपाररानी स्थानांतरित कर दिया गया था। लालटू सिंह देवरिया सदर तहसील में स्थानांतरित किया गया। सूत्रों की मानें तो जांच टीम के एक अफसर की भूमिका शक के दायरे में थी। उन्होंने पूरे मामले की लीपापोती करने का प्रयास करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। डीएम आशुतोष निरंजन ने बताया कि पूर्व नियुक्ति प्राधिकारी से बिना अनुमति के बैनामा लेना कर्मचारी आचरण नियमावली के विरुद्ध है। इस आरोप में चार लेखपालों को संबंधित एसडीएम ने निलंबित कर जांच बैठा दी है।
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