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यहां काबा और काशी करते है अलिगम
Updated Sun, 01 Oct 2017 10:31 PM IST
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देवरिया। ना मंदिर में खुदा है ना मस्जिद में, जिस दिल में मोहब्बत है उस दिल में खुदा है.... सलेमपुर में तीन दशक से एक हिन्दू परिवार ताजिया रख जहां पुरखों की रवायत को आगे बढ़ा रहा है। वहीं दोनों समुदाय के आपसी भाईचारे को मजबूती मिल रही है।
सलेमपुर नगर के परशुराम धाम वार्ड के रहने वाले मेहंदी हसन का परिवार अपना घर शिवनाथ यादव के परिवार को बेचकर साढ़े तीन दशक पूर्व कानपुर चला गया। तभी से इस परिवार के लोग अपने दरवाजे पर ताजिया रखते है। बीच में करीब पांच साल तक नई पीढ़ी ताजिया रखना छोड़ दिया था। घर वालों को ऐसा लगा कि ताजिया नहीं रखने से परिवार के सदस्य अक्सर परेशान रहते है। इसके बाद पुन:ताजिया रखना शुरू कर दिए। निर्वतमान सभासद प्रदीप यादव के नेतृत्व में लोग आपसी सहयोग से 15 साल से लगातार ताजिया रख रहे है। इस वार्ड में सिर्फ पांच घर मुसलमानों की है, जो इसी ताजिया में अपना सहयोग करते है। शनिवार की रात चौक पर ताशा की धुन के साथ ताजिया रखा गया। हिन्दू और मुसलमान की महिलाएं ताजिया पर रोट चढ़ाया और अन्य रस्मे पूरी हुई। देर रात तक ताशा बजता रहा और मेले जैसा चौक का माहौल रहा। इसमें मोहल्ले के इंद्रदेव यादव, नरेन्द्र यादव, डबलू, दीनानाथ गोड़, शिवजी, अनिरूद्घ, रत्नेश आदि लोगों का सहयोग रहता है। मोहल्ले में ताजिया को घुमाया नहीं जाता है। शाम को कस्बा सलेमपुर कर्बला में युवा ताजिया को जुलूस के साथ लेकर जाते है।
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सलेमपुर नगर के परशुराम धाम वार्ड के रहने वाले मेहंदी हसन का परिवार अपना घर शिवनाथ यादव के परिवार को बेचकर साढ़े तीन दशक पूर्व कानपुर चला गया। तभी से इस परिवार के लोग अपने दरवाजे पर ताजिया रखते है। बीच में करीब पांच साल तक नई पीढ़ी ताजिया रखना छोड़ दिया था। घर वालों को ऐसा लगा कि ताजिया नहीं रखने से परिवार के सदस्य अक्सर परेशान रहते है। इसके बाद पुन:ताजिया रखना शुरू कर दिए। निर्वतमान सभासद प्रदीप यादव के नेतृत्व में लोग आपसी सहयोग से 15 साल से लगातार ताजिया रख रहे है। इस वार्ड में सिर्फ पांच घर मुसलमानों की है, जो इसी ताजिया में अपना सहयोग करते है। शनिवार की रात चौक पर ताशा की धुन के साथ ताजिया रखा गया। हिन्दू और मुसलमान की महिलाएं ताजिया पर रोट चढ़ाया और अन्य रस्मे पूरी हुई। देर रात तक ताशा बजता रहा और मेले जैसा चौक का माहौल रहा। इसमें मोहल्ले के इंद्रदेव यादव, नरेन्द्र यादव, डबलू, दीनानाथ गोड़, शिवजी, अनिरूद्घ, रत्नेश आदि लोगों का सहयोग रहता है। मोहल्ले में ताजिया को घुमाया नहीं जाता है। शाम को कस्बा सलेमपुर कर्बला में युवा ताजिया को जुलूस के साथ लेकर जाते है।
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