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मंत्री जी मरीज मर जाएगा तब आएंगी एंबुलेंस
Updated Mon, 14 Aug 2017 10:48 PM IST
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नीलांबुज मिश्र
देवरिया। कैबिनेट और राज्यमंत्री जिला अस्पताल में बच्चों के वार्ड का निरीक्षण कर रहे थे। उसी दरम्यान एक युवती पहुंच और आंखों में आंसू लिए कैबिनेट मंत्री से बोली क्या मेरे पिता की मौत हो जाएगी, तब एंबुलेंस मिलेगी। तीन घंटे से परेशान हूं, कोई सुनने वाला नहीं है। इसके बाद उसे एंबुलेंस मिला।
जिला अस्पताल में सरकार की मंशा के हिसाब से जिम्मेदार काम नहीं कर रहे हैं। बहोरवा गांव निवासी महेश्वर मिश्रा को तीन दिन पहले हॉर्ट अटैक हुआ। इनकी बेटी मीना पिता को लेकर जिला अस्पताल आई। यहां पर रोगियों ने भर्ती कर लिया। तबीयत में सुधार नहीं होने पर रविवार की देर शाम को मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया। किसी वजह से घर वाले रात को उन्हें लेकर नहीं गए। सुबह आठ बजे से मेडिकल कॉलेज ले जाने के लिए एंबुलेंस के लिए 108 और 102 पर फोन कर रही थी। कैबिनेट मंत्री से अपनी समस्या बताई। उसे एंबुलेंस उपलब्ध कराने की बात सीएमओ ने कही। लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंचा। कुछ देर बाद मीना वार्ड में मंत्री के पास पहुंची और सिस्टम पर सवाल खड़ा करते हुए रूंधे गले से बोली क्या मरीज की मौत हो जाएगी, तब एंबुलेंस आएगा। पीड़ा सुन मंत्री का भौवे तन गई। डीएम के हस्तक्षेप के बाद इसे एंबुलेंस मुहैया कराया। इस सिस्टम से अंदाजा लगाया जा सकता है कि मंत्रियों के सामने जब यह व्यवस्था है, तो बाकी दिनों रोगियों को कितनी तकलीफें झेलनी पड़तीं होंगी। डीएम सुुजीत कुमार ने कहा कि एंबुलेंस इमरजेंसी पर आकर खड़ी थी, युवती समझ नहीं पाई।
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देवरिया। कैबिनेट और राज्यमंत्री जिला अस्पताल में बच्चों के वार्ड का निरीक्षण कर रहे थे। उसी दरम्यान एक युवती पहुंच और आंखों में आंसू लिए कैबिनेट मंत्री से बोली क्या मेरे पिता की मौत हो जाएगी, तब एंबुलेंस मिलेगी। तीन घंटे से परेशान हूं, कोई सुनने वाला नहीं है। इसके बाद उसे एंबुलेंस मिला।
जिला अस्पताल में सरकार की मंशा के हिसाब से जिम्मेदार काम नहीं कर रहे हैं। बहोरवा गांव निवासी महेश्वर मिश्रा को तीन दिन पहले हॉर्ट अटैक हुआ। इनकी बेटी मीना पिता को लेकर जिला अस्पताल आई। यहां पर रोगियों ने भर्ती कर लिया। तबीयत में सुधार नहीं होने पर रविवार की देर शाम को मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया। किसी वजह से घर वाले रात को उन्हें लेकर नहीं गए। सुबह आठ बजे से मेडिकल कॉलेज ले जाने के लिए एंबुलेंस के लिए 108 और 102 पर फोन कर रही थी। कैबिनेट मंत्री से अपनी समस्या बताई। उसे एंबुलेंस उपलब्ध कराने की बात सीएमओ ने कही। लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंचा। कुछ देर बाद मीना वार्ड में मंत्री के पास पहुंची और सिस्टम पर सवाल खड़ा करते हुए रूंधे गले से बोली क्या मरीज की मौत हो जाएगी, तब एंबुलेंस आएगा। पीड़ा सुन मंत्री का भौवे तन गई। डीएम के हस्तक्षेप के बाद इसे एंबुलेंस मुहैया कराया। इस सिस्टम से अंदाजा लगाया जा सकता है कि मंत्रियों के सामने जब यह व्यवस्था है, तो बाकी दिनों रोगियों को कितनी तकलीफें झेलनी पड़तीं होंगी। डीएम सुुजीत कुमार ने कहा कि एंबुलेंस इमरजेंसी पर आकर खड़ी थी, युवती समझ नहीं पाई।
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